-योगी सरकार नें दी अहम जिम्मेदारी, बनाये गये अध्यक्ष
- REPORT BY:AAJ NATIONAL NEWS || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK
लखनऊ।यूपी में एक बार फिर बड़ा फैसला सामने आया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के पूर्व डीजीपी और “एनकाउंटर स्पेशलिस्ट” प्रशांत कुमार को रिटायरमेंट के बाद अब उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग का अध्यक्ष बनाया है।जानकारी के अनुसार, 1990 बैच के आईपीएस अधिकारी प्रशांत कुमार को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष के रूप में उनका कार्यकाल तीन वर्षों का होगा।
उच्च शिक्षा विभाग के अनुभाग-5 से विशेष सचिव गिरिजेश कुमार त्यागी के द्वारा जारी किये गये पत्र में कहा है कि उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग अधिनियम, 2023 यथा-संशोधित उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (संशोधन) अध्यादेश, 2025 की धारा-4 के अधीन प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करके राज्यपाल नें डा० प्रशान्त कुमार पुत्र स्व० लल्लन प्रसाद, पूर्व पुलिस महानिदेशक, उ०प्र० (सेवानिवृत्त), मकान नं०- शिव-शक्ति” ए 1/73 जी, विनीत खण्ड, गोमती नगर, लखनऊ, उ०प्र०-226010 को उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज के अध्यक्ष पद पर सहर्ष नियुक्त करते हैं।
योगी सरकार के सबसे भरोसेमंद अफसरों में होती है गिनती
प्रशांत कुमार योगी सरकार के सबसे भरोसेमंद अफसरों में गिने जाते है।उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कानून-व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाया था, यूपी में अपराध के खिलाफ चलाए गए अभियानों में प्रशांत कुमार की भूमिका काफी अहम मानी जाती है। योगी सरकार के पहले और दूसरे कार्यकाल में कई बड़े अपराधियों पर कार्रवाई हुई।इसके अलावा कुख्यात माफिया अतीक अहमद से जुड़े मामलों में भी कार्रवाई से जुड़ी फाइलें प्रशांत कुमार तक पहुंची थीं। यही वजह है कि उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बेहद करीबी अफसर माना जाता है। प्रशांत कुमार एक सख्त प्रशासक हैं और भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और अनुशासन लाने में उनकी भूमिका अहम होगी।शिक्षा सेवा चयन आयोग के चेयरमैन की बनाये जाने से प्रशांत कुमार की यह नई भूमिका उत्तर प्रदेश की शिक्षा भर्ती व्यवस्था के लिए कितनी असरदार साबित होगी।
उच्च शिक्षा को दी प्राथमिकता,पुलिसिंग के साथ-साथ है रणनीतिक और वैज्ञानिक सोच
प्रशांत कुमार अपनी सेवा के साथ-साथ उच्च शिक्षा को भी प्राथमिकता दी। उन्होंने अप्लाइड जूलॉजी में एमएससी, डिजास्टर मैनेजमेंट में एमबीए और डिफेंस एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज में एमफिल की डिग्रियां हासिल की हैं। उन्होंने शैक्षणिक योग्यता को भी बढ़ाने में काफी समय दिया। उनकी पुलिसिंग के साथ-साथ रणनीतिक और वैज्ञानिक सोच में भी गहरी रुचि है।1990 बैच के आईपीएस अफसर प्रशांत कुमार इसी वर्ष जून में डीजीपी पद से रिटायर हुए थे। उस समय भी उनके सेवा विस्तार की अटकलें काफी तेज थीं, लेकिन राजीव कृष्णा को डीजीपी नियुक्त किया गया। प्रशांत कुमार ने करीब डेढ़ वर्ष तक कार्यवाहक डीजीपी के रूप में उत्तर प्रदेश पुलिस का नेतृत्व किया। प्रशांत कुमार मूल रूप से बिहार के सीवान जिले के हैं। वह केरल कैडर के आईपीएस अधिकारी थे और उन्होंने लंबे समय से उत्तर प्रदेश पुलिस में सेवा दी। उन्होंने एडीजी व आईजी मेरठ जोन, डीजी कानून-व्यवस्था और डीजी आर्थिक अपराध शाखा जैसे महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। उन्होंने अपने रणनीतिक कौशल और कड़क प्रशासनिक फैसलों के चलते एक सख्त और प्रभावशाली पुलिस अधिकारी की छवि बनाई।
चार बार ‘गैलंट्री अवॉर्ड’ से सम्मानित किए गये प्रशांत कुमार
1990 बैच के आईपीएस अधिकारी प्रशांत कुमार ने चार बार ‘गैलंट्री अवॉर्ड’ से सम्मानित किए गये, इनके कार्यकाल में कुख्यात अपराधियों और माफियाओं का खात्मा हुआ है । प्रशांत कुमार की पत्नी आईएएस अधिकारी थीं । रिटायरमेंट के बाद उन्हें यूपी रेरा का मेंबर बनाया गया है । सरकार के हर ट्रबल को निपटाने वाले प्रशांत कुमार को सरकार का ‘ट्रबल शूटर’ भी कहा जाता है।प्रशांत कुमार ने अब तक 300 से अधिक एनकाउंटर को अंजाम दिया है । एक हजार से ज्यादा अपराधियों का एनकाउंटर उनकी निगरानी में हुआ है।वर्ष 2020 और 2021 में प्रशांत कुमार को वीरता पुरस्कार से नवाजा गया था। प्रशांत कुमार को वीरता के लिए पुलिस पदक (पीएमजी) अंतरराज्यीय गैंगस्टर शिव शक्ति नायडू के एनकाउंटर के लिए दिया गया था।वह राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों भी सम्मानित हो चुके हैं।
