-खाद्य प्रसंस्करण ढांचे की मजबूती के लिए हर संभव सहायता करेगी केन्द्र सरकार-पासवान
- REPORT BY:K.K.VARMA || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK
लखनऊ/नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने आज नई दिल्ली में लोक जनशक्ति पार्टी
रामविलास के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच उत्तर प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के विकास और किसानों की आय दोगुनी करने से जुड़े विषयों पर गहन चर्चा हुई।
रामविलास के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच उत्तर प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के विकास और किसानों की आय दोगुनी करने से जुड़े विषयों पर गहन चर्चा हुई।उपमुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया कि प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के सफल क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश निरंतर नए आयाम स्थापित कर रहा है। ऋण स्वीकृति और वितरण के मामले में उत्तर प्रदेश वर्तमान में पूरे देश में अग्रणी प्रथम स्थान पर है। खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना, तकनीकी अपग्रेडेशन और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर विस्तृत संवाद हुआ।
श्री मौर्य ने उत्तर प्रदेश की विशाल कृषि क्षमता को देखते हुए विभाग से जुड़ी योजनाओं और अतिरिक्त संसाधनों के आवंटन के लिए केंद्रीय मंत्री का ध्यान आकर्षित किया।उन्होंने प्रदेश के लघु उद्यमियों और किसानों के हित में विशेष रियायतों और नई परियोजनाओं को मंजूरी देने का अनुरोध किया। चिराग पासवान ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा राज्य को वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की है। उत्तर प्रदेश देश की आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और यहां की नीतियां निवेश को आकर्षित करने में सफल रही हैं।
चिराग पासवान ने उत्तर प्रदेश सरकार के प्रयासों की पुनः सराहना करते हुए कहा कि पीएमएफएमई योजना में यूपी का प्रदर्शन अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल है। उन्होंने आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार उत्तर प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए हर संभव सहायता प्रदान करेगी।राज्य में सूक्ष्म उद्यमी तेजी से सशक्त हो रहे हैं। केंद्र सरकार यूपी के विकास के लिए प्रतिबद्ध है।
भूसा टेंडर मे तेजी, कई जिलों में प्रक्रिया जारी
प्रदेश में गोवंश संरक्षण को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार एक्शन मोड में नजर आ रही है। भूसा और साइलेज की
उपलब्धता के लिए सरकार ने टेंडर प्रक्रिया में तेजी लाने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। इसके तहत कई जिलों में टेंडर प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है, जबकि 6 जिलों में साइलेज टेंडर की प्रक्रिया पूरी भी कर ली गई है। सरकार ने सभी जिलाधिकारियों और संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि गोआश्रय स्थलों पर चारे की किसी भी प्रकार की कमी न होने पाए।
उपलब्धता के लिए सरकार ने टेंडर प्रक्रिया में तेजी लाने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। इसके तहत कई जिलों में टेंडर प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है, जबकि 6 जिलों में साइलेज टेंडर की प्रक्रिया पूरी भी कर ली गई है। सरकार ने सभी जिलाधिकारियों और संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि गोआश्रय स्थलों पर चारे की किसी भी प्रकार की कमी न होने पाए।खासतौर पर गर्मी के मौसम को देखते हुए भूसा और साइलेज का पर्याप्त भंडारण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। शासन स्तर से लगातार मॉनीटरिंग की जा रही है, जिससे प्रक्रिया में पारदर्शिता और गति बनी रहे। अधिकारियों ने बताया कि जिन जिलों में साइलेज टेंडर पूरे हो चुके हैं, जल्द ही आपूर्ति शुरू कर दी जाएगी। वहीं शेष जिलों में भी टेंडर प्रक्रिया अंतिम चरण में है। अधिकारियों को इसे शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार की सख्ती का ही परिणाम है कि इस बार टेंडर प्रक्रिया में देरी नहीं हो रही है। दान एवं क्रय के माध्यम से विशेष भूसा संग्रह अभियान 15 अप्रैल से प्रारंभ किया जाए। प्रत्येक गो-आश्रय स्थल की 4 किलोमीटर परिधि में स्थित गोचर भूमि को सम्बद्ध करते हुए चारा आच्छादन का विस्तार किया जाए। इस महत्वपूर्ण पहल के तहत योगी सरकार किसानों से सीधे भूसा खरीद को भी बढ़ावा दे रही है।
पीडब्ल्यूडी ने बजट व्यय में स्थापित किया कीर्तिमान,बेहतर प्लानिंग,नियमित समीक्षा, जवाबदेही से मिली उपलब्धि
लोक निर्माण विभाग यानि पीडब्ल्यूडी ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में बजट व्यय में नया कीर्तिमान स्थापित किया। स्वीकृत
बजट के सापेक्ष अभूतपूर्व व्यय कर राज्य के विकास कार्यों को नई गति प्रदान की है। लोक निर्माण विभाग की उपलब्धि राज्य सरकार की विकासोन्मुखी नीतियों, सुदृढ़ वित्तीयअनुशासन तथा अधिकारियों एवं कर्मचारियों के समर्पित प्रयासों का परिणाम है।
बजट के सापेक्ष अभूतपूर्व व्यय कर राज्य के विकास कार्यों को नई गति प्रदान की है। लोक निर्माण विभाग की उपलब्धि राज्य सरकार की विकासोन्मुखी नीतियों, सुदृढ़ वित्तीयअनुशासन तथा अधिकारियों एवं कर्मचारियों के समर्पित प्रयासों का परिणाम है।वित्तीय वर्ष 2025-26 में विभाग को 36,293.95 करोड़ का बजट प्राप्त हुआ, जिसके सापेक्ष 30,581.98 करोड़ का व्यय किया गया, जो कुल बजट का 84.26 प्रतिशत है। स्थापना व्यय को छोड़कर विभाग द्वारा 32,676.49 करोड़ रूपये के बजट के सापेक्ष 28,086.82 करोड़ का व्यय करते हुए 85.95 प्रतिशत की उच्चतम उपलब्धि दर्ज की गई। विभाग ने 28,000 करोड़ के निर्धारित लक्ष्य को पार करते हुए 28,087 करोड़ का व्यय कर लक्ष्य से अधिक उपलब्धि हासिल की है।पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 की तुलना में भी विभाग ने उल्लेखनीय प्रगति की है, जिसमें 23,850 करोड़ के व्यय के मुकाबले इस वर्ष 28,086.82 करोड़ का व्यय दर्ज किया गया है, जो स्पष्ट रूप से विकास कार्यों में तीव्रता को दर्शाता है। वित्तीय वर्ष के अंतिम दिनों में विभाग द्वारा निरंतर प्रगति करते हुए 31 मार्च तक व्यय को निर्धारित लक्ष्य से आगे बढ़ाया गया। विभाग द्वारा प्रमुख लक्ष्यो 23,000 करोड़ से लेकर 28,000 करोड़ तक को सफलतापूर्वक प्राप्त कर लिया गया।इसके पीछे मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप प्रमुख सचिव अजय चौहान और प्रमुख अभियंता एके द्विवेदी का कुशल नेतृत्व और रणनीतिक प्रबंधन अहम माना जा रहा है। पिछले दो महीनों से लगातार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बजट खर्च की मॉनिटरिंग की वजह से कार्यों में तेजी आई और धनराशि का समयबद्ध उपयोग हुआ। इससे विकास कार्यों को गति मिली है। विभाग की कार्यशैली में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है।
ऊर्जा मंत्री को दिखे लटकते तार, जताई नाराजगी
-जनता की सुरक्षा से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं- शर्मा
-एमडी को किया फोन, दोषियों पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश
नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने लखनऊ से बलिया जाते समय गाजीपुर के महड़ौर मार्ग पर विद्युत व्यवस्था का
औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सड़क किनारे और आबादी वाले क्षेत्रों में लटके एवं अव्यवस्थित विद्युत तारों को देख नाराजगी व्यक्त की और इसे आमजन की सुरक्षा के साथ गंभीर लापरवाही बताया। श्री शर्मा ने मौके पर ही गाड़ी रुकवाकर स्थिति का निरीक्षण किया। उन्होंने पाया कि कई स्थानों पर विद्युत तार अत्यंत नीचे झूल रहे हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। उन्होंने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक शंभू कुमार से फोन पर बात कर जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सड़क किनारे और आबादी वाले क्षेत्रों में लटके एवं अव्यवस्थित विद्युत तारों को देख नाराजगी व्यक्त की और इसे आमजन की सुरक्षा के साथ गंभीर लापरवाही बताया। श्री शर्मा ने मौके पर ही गाड़ी रुकवाकर स्थिति का निरीक्षण किया। उन्होंने पाया कि कई स्थानों पर विद्युत तार अत्यंत नीचे झूल रहे हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। उन्होंने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक शंभू कुमार से फोन पर बात कर जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए।उन्होंने कहा कि विद्युत व्यवस्था में इस प्रकार की लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। जनता की सुरक्षा सर्वोपरि है और इसमें किसी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लटके, जर्जर एवं अव्यवस्थित तारों को तत्काल ठीक कराया जाए तथा भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न उत्पन्न हो, इसके लिए नियमित निरीक्षण एवं प्रभावी मॉनिटरिंग की जाए। नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री एके शर्मा बलिया के रसड़ा स्थित नागा जी सरस्वती विद्या मंदिर के वार्षिकोत्सव में सहभाग करने जा रहे थे। श्री शर्मा ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि विद्युत लाइनों के रखरखाव को प्राथमिकता पर लिया जाए, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां आबादी अधिक है या आवागमन अधिक होता है।
लखनऊ को मिलेगा शौर्य और तकनीक का नया केंद्र
लखनऊ के आईटी सिटी क्षेत्र में बन रहे नौसेना शौर्य संग्रहालय का निर्माण कार्य करीब 70 प्रतिशत पूरा हो चुका है और
अब यह परियोजना भारतीय नौसेना की ताकत और गौरव का जीवंत प्रतीक बनती नजर आ रही है। जहाज के आकार में तैयार हो रहा संग्रहालय नौसैनिक वास्तुकला, पोर्थोल स्टाइल खिड़कियों, जहाज की रेलिंग और नौ सेना उपकरणों से सुसज्जित किया जा रहा है। परिसर में ‘नौसेना शौर्य वाटिका’ विशेष आकर्षण के रूप में विकसित की जा रही है, जहां ऐतिहासिक टीयू-142एम विमान और सी किंग एसके-42बी हेलीकॉप्टर स्थापित किए जा रहे हैं। आईएनएस गोमती से जुड़े मिसाइल, टारपीडो, गन और पनडुब्बी रोधी उपकरण भी यहां पहुंच चुके हैं। निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। जल्द ही संग्रहालय प्रदेशवासियों के लिए आकर्षण का नया केंद्र बनकर तैयार होगा।
अब यह परियोजना भारतीय नौसेना की ताकत और गौरव का जीवंत प्रतीक बनती नजर आ रही है। जहाज के आकार में तैयार हो रहा संग्रहालय नौसैनिक वास्तुकला, पोर्थोल स्टाइल खिड़कियों, जहाज की रेलिंग और नौ सेना उपकरणों से सुसज्जित किया जा रहा है। परिसर में ‘नौसेना शौर्य वाटिका’ विशेष आकर्षण के रूप में विकसित की जा रही है, जहां ऐतिहासिक टीयू-142एम विमान और सी किंग एसके-42बी हेलीकॉप्टर स्थापित किए जा रहे हैं। आईएनएस गोमती से जुड़े मिसाइल, टारपीडो, गन और पनडुब्बी रोधी उपकरण भी यहां पहुंच चुके हैं। निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। जल्द ही संग्रहालय प्रदेशवासियों के लिए आकर्षण का नया केंद्र बनकर तैयार होगा।पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि,“लखनऊ में बन रहा नौसेना शौर्य संग्रहालय प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। 70 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और जल्द ही यह संग्रहालय भारतीय नौसेना की अदम्य वीरता, त्याग और समुद्री शक्ति का जीवंत प्रतीक बनकर सामने आएगा। इसे जहाज के स्वरूप में तैयार किया जा रहा है, जिससे यहां आने वाले लोगों को एक वास्तविक नौसैनिक अनुभव मिल सके।हमारा प्रयास है कि यह संग्रहालय पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ नई पीढ़ी को देशभक्ति और सैनिकों के बलिदान से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम बने। संग्रहालय में आधुनिक तकनीक के जरिए नौसेना के युद्धक इतिहास, रणनीतियों और प्रमुख अभियानों पुलवामा के बाद की सैन्य कार्रवाई और ऑपरेशन सिंदूर की झलक दिखाई जाएगी। इसे इंटरएक्टिव बनाने के लिए एयरक्राफ्ट कैरियर लैंडिंग और वॉरशिप सिम्युलेटर, 7डी थिएटर, सबमर्ज्ड द्वारका मॉडल, डिजिटल वॉटर स्क्रीन शो, मरीन लाइफ एक्वेरियम और ‘ड्रेस लाइक योर हीरोज़’ जैसी गतिविधियां भी जोड़ी जाएंगी। सैनिकों की वीरता और बलिदान को श्रद्धांजलि अर्पित करता हुआ एक विशेष ‘स्मृति उद्यान’ भी विकसित किया जा रहा है। प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर इस उद्यान को शांत और सार्थक स्मरण स्थल के रूप में तैयार किया जा रहा है, जहां आगंतुक देश की सेवा में अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों को सम्मानपूर्वक याद कर सकेंगे। अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग अमृत अभिजात ने बताया कि, “ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों को समृद्ध किया जा है, लखनऊ स्थित इकाना स्टेडियम के पास सीजी सिटी में बन रहा यह संग्रहालय उसी श्रृंखला में एक नया और महत्वपूर्ण आकर्षण बनकर उभरेगा।
पालि दिवस पर वैश्विक संवाद: अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में समानता, बंधुत्व, शांति पर मंथन
पालि दिवस के मौके पर 17वें अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन ने ज्ञान, संस्कृति और आध्यात्मिक चिंतन को एक मंच पर साकार किया।
मेरठ के स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में ‘पालि साहित्य में समानता और बंधुत्व’ विषय पर देश-विदेश के विद्वानों ने गहन विचार-विमर्श किया। पालि सोसाइटी ऑफ इंडिया और तथागत बुद्ध चेयर के संयुक्त आयोजन में अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के सहयोग से यह सम्मेलन सांस्कृतिक और बौद्धिक संवाद का प्रभावशाली मंच बनकर उभरा।
मेरठ के स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में ‘पालि साहित्य में समानता और बंधुत्व’ विषय पर देश-विदेश के विद्वानों ने गहन विचार-विमर्श किया। पालि सोसाइटी ऑफ इंडिया और तथागत बुद्ध चेयर के संयुक्त आयोजन में अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के सहयोग से यह सम्मेलन सांस्कृतिक और बौद्धिक संवाद का प्रभावशाली मंच बनकर उभरा।इस कार्यक्रम के मुख्य वक्ता भदंत डॉ. तेजवरो महाथेरो ने पालि परंपराओं को वैश्विक शांति, समानता और भाईचारे का आधार बताते हुए उनके महत्व पर प्रकाश डाला। साथ ही विश्वविद्यालय के कुलपति प्रमोद कुमार शर्मा ने अपने वक्तव्य में पालि साहित्य की आज के समय में प्रासंगिकता और सामाजिक समरसता को मजबूत करने में उसकी भूमिका को विस्तार से समझाया। इसके अलावा सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में रवींद्र पंथ उपस्थित रहे। इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में अकादमिक सत्र के दौरान देश-विदेश के विद्वानों और शोधकर्ताओं ने विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर शोध पत्र प्रस्तुत किए। इनमें बौद्ध समाजशास्त्र और सामाजिक न्याय, संघ के भीतर सांप्रदायिक सद्भाव, तथा पालि साहित्य में समानता और बंधुत्व के नैतिक आधार जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई। इस बौद्धिक विमर्श ने न केवल शोध के नए आयाम खोले, बल्कि समकालीन समाज के लिए भी महत्वपूर्ण संदेश दिए। समापन सत्र में वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि पालिसाहित्य के माध्यम से समानता और बंधुत्व का संदेश जन-जन तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है। विशेषज्ञों ने ऐसे अकादमिक मंचों को सांस्कृतिक संवाद और शोध सहयोग के लिए बेहद जरूरी बताया। धन्यवाद ज्ञापन और राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
यह सम्मेलन बौद्ध अध्ययन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और वैश्विक समझ को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ।पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया, पालि साहित्य हमारी सांस्कृतिक चेतना का आधार है, जो समाज को समानता, बंधुत्व और शांति का मार्ग दिखाता है। ऐसे अंतर्राष्ट्रीय मंच विचारों के आदान-प्रदान को मजबूत करते हैं, हमारी विरासत को वैश्विक पहचान दिलाते हैं। हमारी जिम्मेदारी है कि हम इस ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक प्रभावी रूप से पहुंचाएं और इसे भविष्य से जोड़ें।
तूर, चना, मसूर एवं लाही-सरसों की खरीद लक्ष्य का आवंटन
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा रबी विपणन वर्ष 2026-27 में मूल्य समर्थन योजना के अंतर्गत विभिन्न फसलों की खरीद के लिए
विस्तृत दिशा-निर्देश और लक्ष्यों का आवंटन जारी कर दिया गया है। शासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार, तूर अरहर-खरीफ, चना, मसूर एवं लाही-सरसों की अधिकतम अनुमन्य मात्रा के क्रय हेतु केंद्रीय और राज्य स्तरीय एजेंसियों के मध्य लक्ष्यों का विभाजन सुनिश्चित कर दिया गया है। इस वर्ष इन फसलों की खरीद 7 अप्रैल से प्रारंभ की जाएगी।
विस्तृत दिशा-निर्देश और लक्ष्यों का आवंटन जारी कर दिया गया है। शासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार, तूर अरहर-खरीफ, चना, मसूर एवं लाही-सरसों की अधिकतम अनुमन्य मात्रा के क्रय हेतु केंद्रीय और राज्य स्तरीय एजेंसियों के मध्य लक्ष्यों का विभाजन सुनिश्चित कर दिया गया है। इस वर्ष इन फसलों की खरीद 7 अप्रैल से प्रारंभ की जाएगी।कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही की अध्यक्षता आज कृषि भवन के समीक्षा कक्ष में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। कृषि मंत्री ने कहा कि मूल्य समर्थन योजना का लाभ फार्मर रजिस्ट्री कराने के बाद ही किसानों को मिल सकेगा। उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे शीघ्र ही अपनी फार्मर रजिस्ट्री का कार्य पूरा कर लें ताकि इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाया जा सके।प्रदेश में केंद्रीय क्रय एजेंसियों के मध्य लक्ष्यों का आवंटन 80:20 के अनुपात में किया गया है। इसके तहत नैफेड को कुल लक्ष्य का 80 प्रतिशत और एनसीसीएफ को 20 प्रतिशत हिस्सा आवंटित किया गया है।
नैफेड को प्रदेश के 55 जनपदों की जिम्मेदारी दी गई है, जिनमें बांदा, चित्रकूट, झांसी, महोबा हमीरपुर, जालौन फतेहपुर, कानपुर देहात, प्रयागराज, कौशांबी, ललितपुर, सोनभद्र, जौनपुर, गाजीपुर, औरैया, बलिया सुल्तानपुर रायबरेली प्रतापगढ़, अमेठी, वाराणसी, उन्नाव, अयोध्या, मैनपुरी, अम्बेडकर नगर, लखनऊ फिरोजाबाद फर्रुखाबाद गोण्डा बाराबंकी, संत रविदास नगर, बलरामपुर, संत कबीर नगर, सीतापुर, गोरखपुर, कासगंज, लखीमपुर खीरी, देवरिया, शाहजहांपुर, बुलंदशहर, श्रावस्ती, रामपुर, अलीगढ़, हाथरस, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, कुशीनगर, सिद्धार्थनगर, गाजियाबाद, सहारनपुर, बदायूं, शामली, गौतमबुद्ध नगर, हापुड़ एवं बिजनौर शामिल हैं। वहीं एनसीसीएफ को 20 जनपदों का आवंटन किया गया है, जिनमें कानपुर नगर, मिर्जापुर, आज़मगढ़, चंदौली, मऊ, आगरा, कन्नौज, बस्ती, हरदोई, एटा, बहराइच, मथुरा, महाराजगंज, बरेली, मेरठ, पीलीभीत, संभल, बागपत, अमरोहा एवं इटावा प्रमुख हैं। नैफेड द्वारा तूर का 91,024 मीट्रिक टन, चना का 1,79,200 मीट्रिक टन, मसूर का 5,41,600 मीट्रिक टन और लाही-सरसों का 4,24,000 मीट्रिक टन क्रय किया जाएगा।
एनसीसीएफ को तूर के लिए 22,756 मीट्रिक टन, चना हेतु 44,800 मीट्रिक टन, मसूर हेतु 1,35,400 मीट्रिक टन और लाही-सरसों हेतु 1,06,000 मीट्रिक टन का लक्ष्य दिया गया है। स्वीकृत लक्ष्य तूर के लिए 1,13,780, चना हेतु 2,24,000, मसूर हेतु 6,77,000 तथा लाही-सरसों हेतु 5,30,000 मीट्रिक टन निर्धारित है।राज्य स्तरीय क्रय एजेंसियों के मध्य भी लक्ष्यों का स्पष्ट विभाजन किया गया है। यूपीपीसीयू को सर्वाधिक 40 प्रतिशत लक्ष्य आवंटित किया गया है, जिसके अंतर्गत वह तूर का 45,512, चना का 89,600, मसूर का 2,70,800 और लाही-सरसों का 2,12,000 मीट्रिक टन क्रय करेगी। यूपीपीसीएफ को 20 प्रतिशत लक्ष्य के साथ तूर का 22,756 मीट्रिक टन और अन्य फसलों का इसी अनुपात में आवंटन मिला है।
इसके अतिरिक्त जैफेड को 15 प्रतिशत, यूपीएसएस को 15 प्रतिशत और हॉफेड को 10 प्रतिशत क्रय लक्ष्य आवंटित किए गए हैं।इस बैठक से पहले कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में वर्चुअल बैठक में शामिल हुए। इस बैठक में प्रदेश में किसान पहचान पत्र फार्मर आईडी के निर्माण की प्रगति, उर्वरकों के संतुलित एवं विवेकापूर्ण उपयोग पर अभियान, विकसित कृषि संकल्प अभियान -2026, जोनल एग्री कॉन्फ्रेंसस, रबी सीजन की खरीद रणनीति पर चर्चा की गई।
