-पावर ऑफिसर एसोसिएशन ने कुठाराघात बर्दाश्त नहीं
- REPORT BY:PREM SHARMA || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के 42 जनपदों के निजीकरण को लेकर प्रदेश के बिजली कार्मिकों के लगभग सभी संगठन विरोध कर रहे हैं। अब पावर कारपोरेशन ने दमनात्मक कार्यवाही करते हुए कुछ कार्मिकों व अभियंताओं पर किसी न किसी मामले में हतोत्साहित करने के लिए एफआईआर दर्ज करने की घटना से पूरे प्रदेश के दलित व पिछड़े वर्ग के अभियंताओं में भारी रोष व्याप्त है।। एसोसिएशन ने कहा कि प्रबंधन की कार्यवाही पूरी तरह चिन्हित कर व्यक्तिगत रूप से उकसाने की है। पावर ऑफिसर एसोसिएशन ने कहा बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने कहा था बिजली हमेशा सरकारी क्षेत्र में रहना चाहिए। इसलिए निजीकरण का तो सवाल ही नहीं बाबा साहब ने जो कह दिया उसके पीछे पूरे प्रदेश का दलित और पिछड़े वर्ग का अभियंता खड़ा है किसी भी सूरत में निजीकरण बर्दाश्त नहीं करेगा।
उत्तर प्रदेश पावर ऑफिसर्स एसोसिएशन की आज एक आपात बैठक में यह निर्णय लिया गया कि इस प्रकार की दमनात्मक कार्यवाही के खिलाफ पूरे प्रदेश में दलित व पिछड़े वर्ग के अभियंता चुप नहीं बैठेंगे। पावर कॉरपोरेशन इस प्रकार की कार्यवाही पर विराम लगे पहले स्थानांतरण नियमावली का उल्लंघन करके बड़े पैमाने पर उत्पीड़न करने की नीयत से स्थानांतरण किए गए। अब इस प्रकार की कार्यवाही निजीकरण के खिलाफ और मजबूत आंदोलन खड़ा करेगा। उत्तर प्रदेश पावर ऑफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष आरपीकेन कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा संगठन सचिव बिंदा प्रसाद ट्रांसमिशन अध्यक्ष सुशील कुमार वर्मा एक प्रभाकर ने अपने बयान में कहा पावर कार्पोरेशन प्रबंधन को इस प्रकार की कार्यवाही से बाज आना चाहिए संवैधानिक रूप से आंदोलन करने का सभी संगठनों को अधिकार है वह अपने संवैधानिक अधिकार के तहत निजीकरण का विरोध कर रहे हैं।
संवैधानिक सवालों से पावर कारपोरेशन के छूटे पसीने
उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन की पोल लगातारखुलती जा रही है अब जो उपभोक्ता परिषद खुलासा करने से अब उसे पूरे ऊर्जा सेक्टर में हाहाकार मच जाएगा। उत्तर उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन ने एनर्जी टास्क फोर्स के साथ मिलीभगत करके यह प्रस्ताव पास करा लिया कि दक्षिणांचल व पूर्वांचल बिजली कंपनी को तोड़कर पांच नई बिजली कंपनी बनाई जाएगी, जिनका निजीकरण के तहत टेंडर किया जाएगा। यानि कि पांच नई बिजली कंपनियों के गठन के ऐलान के बाद ही दोनों बिजली कंपनियों का वजूद खत्म हो जाएगा। दोनों कंपनियों के लगभग 1 करोड़ 72 लाख विद्युत उपभोक्ता पांचो बिजली कंपनियों मे बट जाएंगे ऐसा प्रावधान एनर्जी टास्क फोर्स से पास कर लिया।
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा अब सबसे बड़ा संवैधानिक सवाल यह उठना लाजिमी है कि पावर कॉरपोरेशन ने कैसे मान लिया की पांचो बनने वाली नई बिजली कंपनियों को देश के बड़े निजी घराने खरीद लेंगे ? यह तभी संभव है जब पूरी तरीके से फिक्सिंग हो की सभी बिजली कंपनियों को कोई ना कोई देश का बड़ा उद्योगपति खरीद लेगा। इसका मतलब कहीं ना कहीं बड़ा गोलमाल है और इसकी गहन जांच उत्तर प्रदेश सरकार को कराना जरूरी है।
उपभोक्ता परिषद क अनुसार अब दूसरा विधिक सवाल या उठेगा कि यदि किसी बिजली कंपनी को कोई नहीं खरीद रहा तो फिर जब दोनों बिजली कंपनियां दक्षिणांचल व पूर्वांचल समाप्त हो जाएगी जिस भी नई बनने वाली बिजली कंपनी को कोई टेंडर मान लो अवार्ड नहीं हुआ तो उसका क्या होगा ? यह कभी पावर कारपोरेशन ने सोचा ही नहीं फिर क्या था विद्युत नियामक आयोग ने सबसे बड़ा पावर कॉरपोरेशन पर यही सवाल उठा दिया की पांच बनने वाली नई बिजली कंपनियों को कोई ना कोई निजी घराना खरीद लेगा। यह कैसे कहा जा सकता है हो सकता कोई बिजली कंपनी को कोई ना खरीदें तो उस दशा में क्या होगा पुरानी बिजली कंपनी तो खत्म हो चुकी होगी ? विद्युत नियामक आयोग ने आगे यह भी सवाल उठा दिया कि दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम जब समाप्त हो जाएगा तो टोरेंट पावर जो उसकी फ्रेंचाइजी है उसका क्या होगा। कुल मिलाकर विद्युत नियामक आयोग ने पावर कारपोरेशन को बड़े संवैधानिक सवालों के बीच फंसा दिया।यह सभी को पता है कि पावर कारपोरेशन ने जिस कंसलटेंट ग्रांट थॉर्नटन को ट्रांजैक्शन एडवाइजर बनाया है। उसे संवैधानिक रूप से टेंडर दिया गया है वह हाईवे का एक्सपर्ट था उसे बिजली का काम दे दिया तो फिर ऐसा ही प्रस्ताव हुआ तैयार करेगा। विद्युत नियामक आयोग ने उत्तर प्रदेश सरकार के निजीकरण के मसौदे पर जो सवाल उठाया है उसमें यह भी लिख दिया है कि यह अंतरिम रिपोर्ट है। जब पावर कॉरपोरेशन इसका उत्तर दाखिल कर देगा तब फाइनल रिपोर्ट पर आयोग विचार करेगा। यानि की पावर कॉरपोरेशन जो गुपचुप तरीके से यह सोच रहा है कि वह जुलाई के पहले वीक में टेंडर निकाल देगा वह संभव नहीं है पावर कॉरपोरेशन बार-बार गलती ना करें और निजी घरानों के आगे पीछे घूमेगी तो आगे उसे कोई नहीं बचा पाएगा।
अभियंताओं कार्मिकों पर उत्पीडनात्मक करने के खिलाफ उपभोक्ताओं में आक्रोश
-आम उपभोक्ता किसान नौजवान सभी ऐसे ऐसे में उनके धैर्य की परीक्षा ना ले
निजीकरण को लेकर अभियंताओं कार्मिकों पर उत्पीडनात्मक करने के खिलाफ उपभोक्ताओं में आक्रोश व्याप्त है। उपभोक्ता परिषद के साप्ताहिक वेबीनार में निजीकरण और उत्पीड़न के विरोध में उपभोक्तओं ने जोरदार विरोध दर्ज कराया। उपभाक्ताओं ने स्पष्ट का अब पावर कारपोरेशन उपभोक्ताओं के धैर्य की परीक्षा न ले।
उत्तर प्रदेश के साप्ताहिक वेबीनार में आज प्रदेश भर से अनेकों जनपदों से जुड़े विद्युत उपभोक्ताओं ने उत्तर प्रदेश सरकार के निजीकरण के फैसले पर अपना विरोध जाहिर करते हुए सरकार के उस निर्णय की निंदा की है। बिजली कार्मिकों द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन में उनका स्थानांतरण किया जा रहा है और उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज कराये जा रहे हैं उपभोक्ताओं ने कहा बिजली कंपनियों में जिस प्रकार की कार्यवाही चल रही है उससे ऐसा प्रतीत होता है कि बिजली कंपनी को पावर कार्पोरेशन प्रबंधन नहीं बल्कि उद्योगपतियों का प्रबंध चल रहा है और जो बिजली कंपनियों को खरीदने के पहले उनके कार्मिकों को कमजोर कर रहा है जिससे वह अपने अधिकारों की लड़ाई ना लड़ पाए और उद्योगपति बिजली कंपनियों को कम लागत में फायदा कमाने के लिए खरीद सके जो बहुत ही शर्मनाक और आसंवैधानिक है।
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा निजीकरण के विरोध में पूरे प्रदेश में उपभोक्ता किसान आम जनता बिजली कार्मिक सभी अपना विरोध संवैधानिक तरीके से दर्ज करा रहे हैं ऐसे में उनके खिलाफ कोई भी उत्पीड़नात्मक कार्यवाही पर उपभोक्ता चुप बैठने वाले नहीं है। निजीकरण के विरोध में पूरे प्रदेश में उपभोक्ता किसान आम जनता बिजली कार्मिक सभी अपना विरोध संवैधानिक तरीके से दर्ज करा रहे हैं ऐसे में उनके खिलाफ कोई भी उत्पीड़नत्मक कार्यवाही किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं की जाएगी। जल्द ही उपभोक्ता परिषद इस मामले पर विद्युत नियामक आयोग से भी बात करेगा कि देश के उद्योगपति बिजली विभाग में औद्योगिक माहौल खराब कर रहे हैं जिसका खामियाजा प्रदेश की जनता को भुगतना पड़ रहा है।उपभोक्ता परिषद के साप्ताहिक वेबीनार में आज यह मुद्दा भी उठा की नोएडा गाजियाबाद के डूब क्षेत्र में जो लंबे समय से बिजली कनेक्शन देने पर रोक लगी है उसे हटाया जाए। आज भी लगभग 1 लाख से ज्यादा विद्युत उपभोक्ता पूरे डूब क्षेत्र में बिजली कनेक्शन का इंतजार कर रहे हैं और यह भी बताना उचित होगा कि वहां पर करोड़ों रुपए की बिजली चोरी हो रही है। निजीकरण के खिलाफ आंदोलित कार्मिकों व अभियंताओं पर उन्हें हतोत्साहित करने के लिए जो उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज कराये जा रहे हैं उस पर उपभोक्ता विनोद कुमार गुप्ता योगेंद्र दुबे संदीप कुमार गुप्ता हिमांशु तेजस और चमन लाल भारती ने अपना विरोध दर्ज कराते हुए कहा अभियंताओं के खिलाफ इस प्रकार की कार्रवाई पर रोक लगना चाहिए।
उत्तर प्रदेश में बिजली के निजीकरण के खिलाफ संयुक्त संघर्ष तेज
बिजली क्षेत्र के ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर बिजली के निजीकरण के खिलाफ एकजुट संघर्ष को संयुक्त किसान मोर्चा का उत्तर प्रदेश समर्थन तेज हो रहा है। 22 जून 2025 को लखनऊ में आयोजित संयुक्त सम्मेलन में सैकड़ों किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (पीवीवीएनएल) और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (डीवीवीएनएल) पर शुरू किए गए निजीकरण अभियान के खिलाफ जीत तक लड़ने का संकल्प लिया। एसकेएम ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि वे बिजली क्षेत्र के निजीकरण को वापस लें, ताकि लोगों की कॉर्पोरेट लूट न हो। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार सभी सार्वजनिक बिजली उपयोगिताओं का निजीकरण करने के लिए बेताब है। उत्तर प्रदेश में बिजली कर्मचारी निजीकरण का विरोध करने के लिए 200 दिनों से अधिक समय से संघर्ष कर रहे हैं और किसान भी बड़ी संख्या में विरोध प्रदर्शन में शामिल हो रहे हैं।
एसकेएम की यूपी राज्य समन्वय समिति के निर्णय के अनुसार सैकड़ों किसानों ने जिला मुख्यालयों में प्रदर्शन आयोजित किए हैं और 24 जून 2025 को संबंधित जिलाधिकारी को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है। यह महत्वपूर्ण बात है कि ऐतिहासिक किसान संघर्ष ने मोदी सरकार को तीन काले कृषि कानूनों को निरस्त करने के साथ-साथ बिजली (संशोधन) विधेयक को वापस लेने का वादा करने के लिए मजबूर किया था। बाद में सरकार ने विश्वासघात किया और संसद में बिजली (संशोधन) विधेयक 2022 को फिर से पेश किया। इस विधेयक के अनुसार, निजी वितरकों को वितरण बुनियादी ढांचे को बनाने में कोई निवेश नहीं करना होगा बिजली क्षेत्र के कर्मचारियों और उपभोक्ताओं द्वारा लंबे समय तक लगातार संघर्ष के बाद, यह विधेयक भी समाप्त हो गया। भारत में लंबे संघर्ष के बाद क्रॉस-सब्सिडी की स्थापना की गई थी और यह भारत की खाद्य संप्रभुता और लघु-मध्यम वस्तु उत्पादन नेटवर्क के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण थी। यदि इस तरह की मदद वापस ले ली जाती है, तो इससे खुदरा बिजली की कीमत में अचानक वृद्धि होगी, जिसके परिणामस्वरूप भुगतान में चूक होगी और अंततः जबरन कनेक्शन काट दिए जाएंगे और बिजली सेवा से वंचित कर दिया जाएगा। क्रॉस सब्सिडी के बिना, 7.5 एचपी पंप-सेट का उपयोग करने वाले किसान को मासिक बिजली बिल के रूप में 10,000 रुपये से अधिक का भुगतान करना होगा, जिसका अर्थ है सिंचाई लागत में असहनीय वृद्धि। किसान जो पहले से ही गंभीर कृषि संकट में हैं और खेती की बढ़ती लागत का सामना कर रहे हैं, वे खेती से छुटकारा पाने और पलायन करने की स्थिति में आ जाएंगे। विद्युत मंत्रालय ने विनाशकारी रूप से नापाक प्रीपेड स्मार्ट मीटरिंग परियोजना शुरू की है। प्रत्येक व्यक्तिगत उपभोक्ता को प्रति प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने के लिए 8 से 10 हजार रुपये का भुगतान करना होगा। इस मीटर का अधिकतम जीवनकाल लगभग 7-8 वर्ष है। भारत में लगभग 26 करोड़ उपभोक्ताओं के साथ, यह लोगों की जेब से 26 Û 10,000 = 2,60, 000 करोड़ रुपये की सीधी लूट है। एस.के.एम. सभी प्रभावित उपभोक्ताओं के साथ मिलकर देशव्यापी अभियान कार्यक्रम शुरू करेगा, जिसमें चल रहे बिजली कर्मचारियों के संघर्ष के साथ एकजुटता दिखाई जाएगी और हर संभव स्तर पर प्रतिरोध और अवज्ञा का निर्माण किया जाएगा। एस.के.एम. 9 जुलाई 2025 को अखिल भारतीय आम हड़ताल पर बिजली के निजीकरण
छूट के साथ रविवार को भी खुले रहेंगे जोनल कार्यालय और कैश काउंटर
वर्तमान वित्तीय वर्ष में नगर निगम लखनऊ द्वारा भवन स्वामियों को गृहकर पर दी जा रही 10 प्रतिशत की विशेष छूट की अंतिम तिथि 30 जून 2025 निर्धारित की गई है। इस महत्वपूर्ण सुविधा का लाभ उठाने हेतु अब केवल तीन दिन शेष रह गए हैं। अनुमान है कि इन अंतिम दिनों में बड़ी संख्या में भवनस्वामी गृहकर का भुगतान करेंगे।
नगर आयुक्त श्री गौरव कुमार के आदेशानुसार रविवार, 29 जून 2025 को भी गृहकर जमा कराने की सुविधा प्रदान की जाएगी। इस क्रम में नगर निगम के सभी जोनल कार्यालयों एवं कैश काउंटरों को प्रातः 10रू00 बजे से सायं 05रू00 बजे तक खुले रखने का निर्देश दिया गया है।नगर निगम प्रशासन का यह प्रयास है कि अधिक से अधिक नागरिक इस छूट का लाभ उठाएं और निर्धारित समयसीमा में अपना गृहकर जमा करें। इस निर्णय से जहां एक ओर भवनस्वामियों को सुविधा मिलेगी, वहीं दूसरी ओर नगर निगम की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि संभव होगी। सभी जोनल अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे इस छूट योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करें ताकि शहर के अधिकतम नागरिक समय पर गृहकर का भुगतान कर सकें।चीफ टैक्स असेसमेंट ऑफिसर अशोक सिंह ने बताया कि लखनऊ के सभी भवनस्वामी 30 जून 2025 तक गृहकर जमा कर 10ः छूट का लाभ उठाएं और नगर के विकास में सहभागी बनें।
