LUCKNOW:विशेष वेबिनार में संघन वृक्षारोपण की तैयारी पर चर्चा,क्लिक करें और भी खबरें

  • REPORT BY:PREM SHARMA || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK 

लखनऊ। रविवार को नगर निगम द्वारा आगामी 9 जुलाई को प्रस्तावित वृहद वृक्षारोपण अभियान की तैयारियों को अंतिम रूप देने के क्रम में रविवार को नगर निगम मुख्यालय स्थित समिति कक्ष में एक विशेष वेबिनार आयोजित किया गया।जिसमें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा प्रदेश भर के नगरीय निकायों को संबोधित करते हुए पर्यावरण संरक्षण की दिशा में व्यापक पहल के लिए प्रेरित किया गया।वहीं वेबिनार में लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल, पार्षद, अपर नगर आयुक्त डॉ. अरविंद कुमार राव, चीफ टैक्स असेसमेंट ऑफिसर अशोक सिंह एवं नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी सम्मिलित हुए।सभी ने मुख्यमंत्री के दिशा-निर्देशों को आत्मसात करते हुए अभियान की रूपरेखा साझा की और इसे जनसहभागिता से सफल बनाने का संकल्प लिया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों से ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत वृक्षारोपण करने की भावनात्मक अपील की। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि यह प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। उन्होंने इसे जनआंदोलन बनाने की जरूरत पर बल दिया।नगर निगम लखनऊ इस अभियान के अंतर्गत 09 जुलाई को एक दिन में कुल 1,37,312 पौधे लगाने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। यह वृक्षारोपण नगर के विभिन्न हिस्सों में चरणबद्ध रूप से संपन्न किया जाएगा।उद्यान अधीक्षक गंगाराम गौतम ने बताया कि इस वृक्षारोपण अभियान के तहत पूरे शहर में एक लाख से अधिक पौधे रोपे जाएंगे। जिसमें पौधों में आम, सिंदूर बेल, आंवला, पीपल, नीम, बॉटल ब्रश, जामुन, कचनार, इमली, पाकड़, बरगद, रुद्राक्ष, पारिजात और अर्जुन के पौधे शामिल रहेंगे। इस दौरान नागरिकों से यह भी अपील भी की जाएंगी कि वे इन पौधों को “अपनाएं” और उनकी देखरेख करें ताकि यह वृक्ष भविष्य में छाया, फल और स्वच्छ वातावरण प्रदान कर सकें।

नगर निगम का लक्ष्य

नगर निगम के पार्कों में -40,598 पौधे

रसूलपुर कायस्थ (पार्ट-सी) -37,600 पौधे

रसूलपुर कायस्थ (पार्ट-डी)-44,800 पौधे

बरावन कलां गांव- 14,314 पौधे

आपूर्ति का कीर्तिमान,कम लाइन हानियाॅं, तो निजीकरण क्यो ?
-अवकाश के दिन जनसंपर्क कर जेल भरो आंदोलन की तैयारी

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश ने कहा है कि भीषण गर्मी में रिकॉर्ड बिजली आपूर्ति करने और लाइन हानियां राष्ट्रीय मापदंड से नीचे कर देने के बावजूद उत्तर प्रदेश में बिजली का निजीकरण किसके हित में किया जा रहा है। आज अवकाश के दिन सभी जनपदों और परियोजनाओं पर बैठक कर संघर्ष समिति ने निजीकरण के विरोध में जेल भरो अभियान की तैयारी की गई।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां जारी बयान में कहा कि वर्ष 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में बिजली के क्षेत्र में हुए उल्लेखनीय सुधार के बारे में रोज समाचार पत्रों में पूरे पृष्ठ का विज्ञापन छप रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार के इस विज्ञापन से ही स्पष्ट है की 2017 से अब तक उत्तर प्रदेश में बिजली के क्षेत्र में बहुत ही उल्लेखनीय सुधार हुआ है और लाइन हानियां राष्ट्रीय मापदंड से कम हो गई हैं। संघर्ष समिति ने सवाल किया कि इतने उल्लेखनीय सुधार के बाद बिजली का निजीकरण किसके हित में किया जा रहा है। आज अवकाश के दिन संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने सभी जनपदों और परियोजनाओं पर बैठक कर निजीकरण के विरोध में स्वेच्छा से जेल जाने वाले कर्मचारियों की सूची तैयार की गई। संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है की पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का टेंडर जारी होते ही बिजली कर्मचारी अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार प्रारंभ कर देंगे और सामूहिक जेल भरो आंदोलन शुरू हो जाएगा।

संघर्ष समिति ने कहा की मार्च 2017 में 40 प्रतिशत लाइन हानियां थीं जो घटकर 15.54 प्रतिशत रह गई हैं। भारत सरकार द्वारा सितंबर 2020 में जारी निजीकरण के स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट में यह उल्लेख किया गया है कि जहां वितरण हानियां 16 प्रतिशत से कम है, उन डिस्कॉमस का निजीकरण नहीं किया जाएगा। संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश में लाइन हानियां 16प्रतिशत से कम हो गई है। अतः भारत सरकार की नीति के अनुसार उत्तर प्रदेश के विद्युत वितरण निगमों का निजीकरण किया जाना गलत है। संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार के विज्ञापन के अनुसार पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में अप्रैल , मई, जून की भीषण गर्मी में ग्रामीण क्षेत्रों में 18.20 घंटे तहसील में 21.31 घंटा और जिला मुख्यालय पर 23.49 घंटा बिजली की आपूर्ति की गई है। इसी प्रकार दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम में ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे 50 मिनट, तहसील मुख्यालय पर 21 घंटे 28 मिनट और जनपद मुख्यालय पर 23 घंटे 52 मिनट बिजली आपूर्ति की गई है। उत्तर प्रदेश के सभी विद्युत वितरण निगमों में भीषण गर्मी में ग्रामीण क्षेत्रों में 20 घंटे 6 मिनट तहसील मुख्यालय पर 22 घंटे 22 मिनट और जिला मुख्यालय पर 24 घंटे विद्युत आपूर्ति की जा रही है। सवाल है कि बिजली आपूर्ति के क्षेत्र में इतने उल्लेखनीय सुधार के बाद किन कॉर्पोरेट घरानों की मदद करने के लिए बिजली का निजीकरण किया जा रहा है। संघर्ष समिति ने कहा कि 42 जनपदों की पूरी जमीन मात्र एक रुपए की लीज पर दी जा रही है और एक लाख करोड रुपए की परिसंपत्तियों को कौड़ियों के मोल बेचा जा रहा है। निजीकरण का उपभोक्ताओं के हित से कोई लेना-देना नहीं है। निजीकरण के नाम पर बड़ी लूट हो रही है। इसी कारण निजीकरण के विरोध में चल रहे संघर्ष में बिजली कर्मचारियों के साथ किसान और आम उपभोक्ता भी लामबंद हो गए हैं।

उद्योगपतियों को लाभ देने वाला निजीकरण मसौदा
-मसौदा आसंवैधानिक, अटॉर्नी जनरल ऑफ इंडिया की ले राय

विद्युत अधिनियम 2003 लोकसभा द्वारा पारित कानून की जिन धाराओं में सरकार निजीकरण को लेकर आगे बढ़ रही है। वह कानून का उल्लंघन किया जा रहा है। ऐसे में उचित विधिक राय देश के अटॉर्नी जनरल ऑफ इंडिया ही दे सकते है।ं जिस दिन सरकार राय लेगी पावर कॉरपोरेशन की पूरी पोल खुल जाएगी। निजीकरण के लिए बनने वाली पांच नई बिजली कंपनियों की रिजर्व विद प्राइस रुपया 6500 करोड़ आंकना पूरी तरह भ्रष्टाचार है। क्योकि 10000 करोड़ से ऊपर रिजर्व बिड प्राइस होगी। इतनी कम राशि क्यों आकी गई इसमें दोषी इसकी जांच कर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।

42 जनपदों के निजीकरण के मामले पर जहां उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग द्वारा मसौदे पर संवैधानिक व वित्तीय आपत्ति उठाई गई है। उपभोक्ता परिषद ने कहा पूरा मसौदा आसंवैधानिक है। विद्युत अधिनियम 2003 की जिन धाराओं में उत्तर प्रदेश सरकार निजीकरण के लिए आगे बढ़ रही है और लगातार उपभोक्ता परिषद उस पर सवाल उठा रहा है। फिर भी यदि सरकार को यह लगता है कि यह सही है तो वह देश के अटॉर्नी जनरल ऑफ इंडिया से इस पर राय ले सकती है। विद्युत अधिनियम 2003 लोकसभा द्वारा पारित कानून है उस पर अटॉर्नी जनरल ऑफ इंडिया ही उचित विधिक राय दे सकते हैं। उस दिन पावर कॉरपोरेशन व उत्तर प्रदेश सरकार को यह पता चल जाएगा कि उपभोक्ता परिषद की सभी बातें बिल्कुल संवैधानिक है।उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा विद्युत नियामक आयोग द्वारा दो दर्जन से ज्यादा जिन मामलों पर आपत्ति उठाई गई है सही मायने में उसका निस्तारण किया जाना इतना आसान नहीं है। उसके लिए विद्युत अधिनियम 2003 के प्रावधानों के तहत नए सिरे से पावर कारपोरेशन को उस पर संवैधानिक निर्णय करने की जरूरत है। जिस दिन पावर कारपोरेशन को यह लग जाएगा कि यह मसौदा केवल देश के बड़े निजी घरानो को लाभ देने के लिए बनाया गया है। उस दिन बड़े-बड़े उच्च अधिकारियों की गर्दन फंसेगी। उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा पूरा मसौदा बनाने वाली कंसलटेंट कंपनी ग्रैंड थ्रोनटन पहले से विवादों के घेरे में है। अमेरिका रेगुलेटर द्वारा उसे पर पेनल्टी लगाई जाने के बाद भी कैसे कोई प्रबंध उसे क्लीन चिट दे सकता है। उसको निजीकरण का कोई भी ज्ञान नहीं है। वह हाईवे का काम करने वाली कंसलटेंट कंपनी थी। उसके द्वारा जिस प्रकार से मसौदा तैयार किया गया है उसे भविष्य में कोई भी ब्लैक लिस्ट करने से रोक नहीं पाएगा।

Aaj National

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