- REPORT BY:PREM SHARMA || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK
लखनऊ। निजीकरण के हो हल्ले के बीच मुख्यमंत्री ने उर्जा विभाग की समीक्षा बैठक में नसीहत के साथ जिम्मेदारी तय करने के
निर्देश दिये। प्रदेश में बिजली कटौती और ट्रिपिंग को लेकर सीएम योगी ने सख्त रुख अपनाया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को ऊर्जा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रदेश में बिजली व्यवस्था अब केवल तकनीकी या प्रशासनिक विषय नहीं, बल्कि जनता के भरोसे और शासन की संवेदनशीलता का पैमाना बन चुकी है।
उन्होंने अफसरों को दो टूक शब्दों में कहा कि ट्रिपिंग, ओवरबिलिंग और अनावश्यक कटौती अब किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। अधिकारियों को बिजली व्यवस्था में सुधार करना ही होगा वर्ना कार्रवाई तय है। बैठक में मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि जून 2025 में उत्तर प्रदेश ने रिकॉर्ड 31,486 मेगावाट की अधिकतम बिजली मांग सफलतापूर्वक पूरी की। इस अवधि में 16,930 मिलियन यूनिट बिजली की आपूर्ति की गई। लगातार बढ़ रही उमस और तापमान ने खपत को अप्रत्याशित रूप से बढ़ाया, इसके बावजूद शहरी क्षेत्रों में औसतन 24 घंटे, तहसील स्तर पर 21.5 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे तक बिजली उपलब्ध कराई गई।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बिजली व्यवस्था केवल ट्रांसफॉर्मर और वायरिंग नहीं, यह जन अपेक्षा और शासन की प्रतिबद्धता का दर्पण है। हमारा दायित्व है कि हर नागरिक को यह महसूस हो कि उसे बिना भेदभाव, पारदर्शी और समयबद्ध बिजली मिल रही है।मुख्यमंत्री ने ट्रिपिंग की लगातार आ रही शिकायतों पर गहरी नाराजगी जताई और निर्देश दिया कि प्रत्येक फीडर की तकनीकी जांच हो, कमजोर स्थानों की पहचान कर तुरंत सुधार कराया जाए। उन्होंने कहा कि जहां ज़रूरत हो, वहां ट्रांसफॉर्मरों की क्षमता तुरंत बढ़ाई जाए ताकि ओवरलोडिंग की स्थिति न बने। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि फील्ड से प्राप्त वास्तविक शिकायतों का समाधान समयबद्ध ढंग से हो. ताकि जनता को राहत मिले।मुख्यमंत्री ने ऊर्जा विभाग के अधिकारियों से कहा कि संसाधनों की कोई कमी नहीं है, सरकार ने बिजली उत्पादन, पारेषण और वितरण को मजबूत करने के लिए रिकॉर्ड बजट उपलब्ध कराया है। ऐसे .में किसी स्तर पर लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी डिस्कॉम के प्रबंध निदेशकों से उनके क्षेत्रों की आपूर्ति की स्थिति जानने के बाद मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि हर स्तर पर जवाबदेही तय की जाए।
बैठक में उपभोक्ता परिषद ने रखा जनता का पक्ष
निजीकरण और दर बढ़ोत्तरी गैर संवैधानिक: अवधेश वर्मा
उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग द्वारा बुलाई गई ऊर्जा क्षेत्र की सबसे बड़ी संवैधानिक कमेटी राज्य सलाहकार समिति की
बैठक आयोग अध्यक्ष अरविंद कुमार की अध्यक्षता में हुई। संजय कुमार सिंह की उपस्थिति में संपन्न हुई जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से अपर मुख्य सचिव ऊर्जा नरेंद्र भूषण पावर कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक पंकज कुमार मध्यांचल प्रबंध निदेशक रिया केजरीवाल अनेकों विभागों के विशेष सचिव प्रबंध निदेशक मेट्रो सहित उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा सहित उपभोक्ता प्रतिनिधि व इंडियन इंडसटी संगठन के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक श्री पंकज कुमार जहां बिजली दरों में बढ़ोतरी के लिए कहा पावर कारपोरेशन के पास दो ही विकल्प है या तो सरकार सब्सिडी दे या बिजली दरों में बढ़ोतरी होने दे क्योकि प्रदेश में 5 साल से बिजली दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। आयोग इसे समझे और उनके द्वारा स्मार्ट प्रीपेड मीटर पर होने वाले खर्च को भी आम जनता पर डालने आग्रह किया गया।
जिस पर उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कड़ा विरोध करते हुए कहा यह भारत सरकार व नियामक आयोग द्वारा पारित आदेश के खिलाफ है। स्मार्ट प्रीपेड मीटर का खर्च पब्लिक पर नहीं डाला जा सकता। जब पावर कॉरपोरेशन 18885 करोड़ का टेंडर 27342 करोड़ में दिया उस समय क्यों नहीं सोचा कि यह पैसा कहां से आएगा। जबकि उपभोक्ता परिषद लगातार इसका विरोध कर रहा था कि 9000 करोड़ कौन देगा ? जो अतिरिक्त खर्च किया जा रहा है। इसके बावजूद महंगे दरों पर टेंडर दिया गया। 5 सालों से बिजली दरों में बढ़ोतरी इसलिए नहीं हुई क्योंकि प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं का बिजली कंपनियों पर सरप्लस है। इसलिए 5 साल की बात कह कर नॉरेटिव ना सेट किया जाए। उन्होंने स्पष्ट रूप से बैठक में कहाकि निजीकरण और बिजली दर बढोत्तरी का प्रयास भी असंवैधानिक है। सर्वप्रथम विद्युत नियामक आयोग की तरफ से निदेशक टैरिफ सरबजीत सिंह की तरफ से प्रस्तुतीकरण किया गया इसके बाद सभी ने अपनी बात रखनी शुरू की। राज्य सलाहकार समिति की बैठक में तीन सदस्यों ने सामूहिक रूप से बिजली दर में 45 प्रतिशत की कमी व निजीकरण के प्रस्ताव को खारिज करने का एक प्रस्ताव भी आयोग के सामने लिखित रूप में पेश कर दिया। जो निजीकरण के लिए एक नया पेच फंसेगा।
प्रदेश के उपभोक्ताओं की तरफ से अपनी बात रखते हुए उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा जिस प्रकार से बिजली दर में बढ़ोतरी प्रस्तावित की गई है वह आसंवैधानिक है। मल्टी ईयर टैरिफ रेगुलेशन 2025 के तहत टैरिफ का प्रस्ताव आना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं किया गया पावर कारपोरेशन ने करोड़ों रुपए का कंसलटेंट इस काम के लिए रखा है टैरिफ बनाने के लिए इसके बाद भी इस प्रकार का प्रस्ताव जो रेगुलेशन के विपरीत है कैसे लाया गया। इस प्रकार की कार्यवाही से गलत प्रभाव पड़ता है। घरेलू उपभोक्ताओं की बीपीएल श्रेणी की दरें रुपया 3 से 4 प्रति यूनिट प्रस्तावित की गई जो भाजपा के संकल्प पत्र के खिलाफ है। इसी प्रकार से घरेलू उपभोक्ताओं की बिजली दरों में 45 प्रतिशत तक की वृद्धि यह दर्शाती है कि आम जनता को लालटेन में ले जाया जा रहा। उपभोक्ता परिषद ने आगे कहा कि इस बस भी 2025 -26 में उपभोक्ताओं का 2000 करोड़ से ज्यादा का सर प्लस निकलेगा। पावर कॉरपोरेशन परेशान न हो आयोग दरें काम करने के लिए तैयार रहे।उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा भारत सरकार के नियम के तहत प्रीपेड मीटर लगाने वाले विद्युत उपभोक्ताओं को 2 प्रतिशत की जगह 5 प्रतिशत की छूट मिलना चाहिए।
राज्य सरकार समिति की बैठक में समिति के तीन सदस्य जिसमें अवधेश कुमार वर्मा, दीपा जैननी, डॉक्टर भारत राज सिंह ने सामूहिक रूप से एक प्रस्ताव पेश कर दिया। जिसमें जनता सर प्लस के एवज में 45 प्रतिशत कमी की मांग रखी। निजीकरण का प्रस्ताव पूरी तरह गलत है इसे खारिज किया जाए। कहा गया कि जब भारत सरकार आरडीएसएस स्कीम में 44094 करोड़ खर्च कर रही है तो सरकारी क्षेत्र में ही दक्षिणांचल व पूर्वांचल को आत्मनिर्भर बनाया जाए। वितरण हानियों के मामले में विद्युत नियामक आयोग से स्वत अध्ययन कराकर आगे की कार्यवाही कराई जाने की मांग उठाई। उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने नोएडा पावर कंपनी में लागू 10 प्रतिशत बिजली दरों में कमी के प्रस्ताव को आगे भी जारी रखने की मांग उठाते हुए कहा नोएडा पावर कंपनी ने बड़े पैमाने पर लाभ कमाया है और वहां की जनता परेशान है। 1993 में जब इसको लाइसेंस दिया गया तभी से उपभोक्ता परिषद विरोध कर रहा है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार लाइसेंस समाप्त करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा लड़ रही है। नोएडा पावर कंपनी के इतिहास को देखते हुए पूर्वांचल और दक्षिणांचल का निजीकरण किसी भी हालत में उपभोक्ताओं को स्वीकार नहीं है।मेट्रो कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक श्री सुशील कुमार ने बिजली दरों में बढ़ोतरी का विरोध करते हुए कहा मेट्रो को कोई भी सब्सिडी नहीं मिलती यदि उसकी दरों में बढ़ोतरी हुई तो मेट्रो कॉरपोरेशन बंदी के कगार पर पहुंच जाएगा। इंडियन इंडस्ट्री एसोसिएशन के प्रतिनिधि ने भी बिजली दारो में बढ़ोतरी का विरोध करते हुए कहा उत्तर प्रदेश में पहले से ही बिजली दरें ज्यादा है। इसलिए उपभोक्ताओं की बिजली दरों में कोई भी बढ़ोतरी न की जाए
निजीकरण प्रयोग फेल, मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की अपील
-उड़ीसा में सत्तारूढ़ दल कर रहा निजीकरण का विरोध
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की है कि वे प्रभावी हस्तक्षेप
करने की कृपा करें जिससे देश के अन्य हिस्सों में विफल हो चुके निजीकरण के प्रयोग को उत्तर प्रदेश की गरीब जनता पर न थोपा जाय। बिजली कर्मचारियों ने आज लगातार 240 वें दिन निजीकरण के विरोध में विरोध प्रदर्शन जारी रखा। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के पदाधिकारियों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी से अपील करते हुए कहा है कि उनके मार्गदर्शन में बिजली कर्मचारियों ने रिकॉर्ड विद्युत आपूर्ति की है और लाइन हानियां में कमी कर उसे राष्ट्रीय मानक के नीचे कर दिया है। महाकुंभ के दौरान बिजली कर्मियों ने अथक परिश्रम कर 65 दिनों तक चले महाकुंभ में पल मात्र के लिए भी विद्युत आपूर्ति में व्यवधान नहीं आने दिया। आंदोलन रत रहते हुए भी बिजली कर्मियों ने भीषण गर्मी के दौरान लगातार बेहतर विद्युत आपूर्ति बनाए रखने का प्रयास किया।
संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली के क्षेत्र में निजीकरण का प्रयोग एक विफल प्रयोग है। प्रांत के स्तर पर सबसे पहले वर्ष 1999 में उड़ीसा में विद्युत वितरण का निजीकरण किया गया था। निजीकरण का यह प्रयोग उड़ीसा के सबसे अधिक औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्र में एक वर्ष में ही विफल हो गया। अमेरिका की एईएस कंपनी एक वर्ष बाद ही काम छोड़कर भाग गई और उसने महा चक्रवात के दौरान टूटे बिजली के ढांचे का पुनर्निर्माण करने से इनकार कर दिया। रिलायंस पावर अन्य तीन विद्युत वितरण निगमों में काम करता रहा। फरवरी 2015 में उड़ीसा के विद्युत नियामक आयोग ने बेहद खराब परफॉर्मेंस के चलते रिलायंस पावर के भी तीनों लाइसेंस रद्द कर दिये। उड़ीसा में यह दूसरी विफलता थी। कोरोना के दौरान जून 2020 में उड़ीसा के चारों विद्युत वितरण निगमों का लाइसेंस टाटा पावर को दे दिया गया। इसी माह 15 जुलाई को उड़ीसा के विद्युत नियामक आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए बेहद खराब परफॉर्मेंस के कारण टाटा की चारों कंपनियों को नोटिस जारी किया है और उनके परफॉर्मेंस पर जनसुनवाई का आदेश जारी कर दिया है ।उड़ीसा में यह निजीकरण की तीसरी विफलता है। उड़ीसा में भारतीय जनता पार्टी टाटा पावर के विरोध में लगातार आंदोलन कर रही है। संघर्ष समिति ने कहा कि पड़ोसी प्रांत बिहार में गया, भागलपुर और समस्तीपुर में अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी के नाम पर निजीकरण का प्रयोग किया गया था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसके पूरी तरह असफल रहने के चलते इसे एक साल बाद ही रद्द कर दिया। महाराष्ट्र में औरंगाबाद, जलगांव, नागपुर और झारखंड में रांची और जमशेदपुर में निजीकरण के विफल प्रयोग निरस्त किए जा चुके है।संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश में ग्रेटर नोएडा और आगरा में निजीकरण का प्रयोग असफल रहा है। ग्रेटर नोएडा में आए दिन किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं की शिकायतें सामने आ रही है। ग्रेटर नोएडा में निजी कंपनी का लाइसेंस निरस्त कराने हेतु स्वयं उत्तर प्रदेश सरकार माननीय सर्वाेच्च न्यायालय में मुकदमा लड़ रही है। आगरा में टोरेंट पावर कंपनी अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी के करार का खुलेआम उल्लंघन कर रही है।
व्यावसायिक करदाताओं मिलेगी भुगतान पर 5 प्रतिशत की छूट
नगर निगम लखनऊ ने शहर के व्यावसायिक करदाताओं के हित में एक अहम और सराहनीय कदम उठाया है। स्वच्छता सर्वेक्षण
2024-25 में लखनऊ को देशभर में तीसरा स्थान मिलने की ऐतिहासिक उपलब्धि के उपलक्ष्य में, नगर निगम ने व्यावसायिक भवनों पर देय संपत्ति कर के भुगतान पर 5 प्रतिशत की विशेष छूट देने की घोषणा की है।यह छूट 25 जुलाई 2025 से 31 अगस्त 2025 तक लागू रहेगी और उन सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को दी जाएगी जो इस अवधि में अपना लंबित कर भुगतान करेंगे।
महापौर सुषमा खर्कवाल द्वारा जारी निर्देश में कहा गया है कि लखनऊ को स्वच्छता में तीसरा स्थान दिलाने में व्यापारियों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। सफाई अभियान, जागरूकता रैलियों और निगम के विभिन्न अभियानों में व्यापारिक संगठनों ने सक्रिय भूमिका निभाई। ऐसे में यह छूट न केवल आर्थिक राहत है, बल्कि उनके योगदान के प्रति सम्मान और आभार भी है।
महापौर ने कहाकि लखनऊ को स्वच्छता रैंकिंग में देश में तीसरे स्थान पर पहुंचाने में हमारे व्यापारियों की भागीदारी अत्यंत सराहनीय रही है। उनकी सहभागिता को देखते हुए हमने यह निर्णय लिया है कि वे कर भुगतान पर 5 प्रतिशत की छूट के पात्र होंगे।
नगर निगम का यह कदम न केवल व्यापारियों के लिए राहतदायक है, बल्कि इससे निगम के राजस्व संग्रह में भी इजाफा होने की उम्मीद है। यह योजना व्यापारिक प्रतिष्ठानों को समयबद्ध कर भुगतान के लिए प्रेरित करेगी और नागरिक-निगम संबंधों को और सुदृढ़ बनाएगी। नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, इस छूट का लाभ उठाने के लिए व्यावसायिक करदाता नगर निगम की वेबसाइट या अधिकृत कर काउंटरों के माध्यम से कर भुगतान कर सकते हैं।
नगर निगम द्वारा निकाली गई भव्य तिरंगा यात्रा
स्वच्छ सर्वेक्षण 2025 में लखनऊ को देशभर में तीसरा स्थान प्राप्त होने की गौरवपूर्ण उपलब्धि के उपलक्ष्य में नगर निगम
लखनऊ द्वारा आज एक भव्य तिरंगा यात्रा का आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक यात्रा का नेतृत्व महापौर सुषमा खर्कवाल ने किया। इस आयोजन का उद्देश्य लखनऊ की जनता को स्वच्छता अभियान में उनके योगदान के लिए आभार प्रकट करना था। यह तिरंगा यात्रा प्रातः 7 बजे नगर निगम मुख्यालय से आरंभ हुई और मेफेयर चौराहा, हजरतगंज चौराहा होते हुए भाजपा मुख्यालय से वापस नगर निगम परिसर में संपन्न हुई। यात्रा के दौरान महापौर ने हजरतगंज चौराहे पर भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इसके उपरांत महात्मा गांधी जी और सरदार वल्लभभाई पटेल जी की प्रतिमाओं पर भी माल्यार्पण कर स्वच्छता, एकता और राष्ट्रीय मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त की गई।
इस अवसर पर महापौर सुषमा खर्कवाल ने उपस्थित नागरिकों को संबोधित करते हुए कहा कि यह उपलब्धि लखनऊ के हर नागरिक, सफाई मित्र और नगर निगम के हर कर्मचारी की है। आप सभी ने मिलकर लखनऊ को स्वच्छता की दिशा में एक आदर्श शहर बनाया है। यात्रा में नगर निगम के सभी पार्षदगण, नगर आयुक्त गौरव कुमार, अपर नगर आयुक्त ललित कुमार, अरुण कुमार गुप्त, डॉ. अरविंद कुमार राव, जीएम जलकल कुलदीप सिंह, मुख्य कर निर्धारण अधिकारीअशोक सिंह एवं श्री विनय कुमार राय, मुख्य अभियंता (सिविल एवं आरआर), सभी जोनल अधिकारी, जोनल सेनेटरी अधिकारी, एसएफआई, अभियंता, सफाई मित्र एवं नगर निगम के समस्त कर्मचारीगण शामिल रहे। अमीनाबाद इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य, शिक्षकगण एवं छात्र-छात्राएं, और लखनऊ की आम जनता ने भी पूरे जोश और उत्साह के साथ भागीदारी निभाई।
