LUCKNOW:यूनियनों पर भड़के ऊर्जा मंत्री, पूछे कड़े सवाल,क्लिक करें और भी खबरें

  • REPORT BY:PREM SHARMA || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK 

लखनऊ।लम्बे समय से विभाग में चल रहे आन्दोलन और टिप्पणियों से नाराज यूपी के ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा एक बार फिर अपने विभाग के अधिकारियों पर निशाना साधा है। उन्होंने कर्मचारी यूनियन पर भड़ास निकालते हुए कहा कि उनसे जलने वाले सभी लोग इकट्ठे हो गए हैं। दूसरे विभाग में हड़ताल क्यों नहीं होती है क्या वहां कर्मचारी यूनियन नहीं है। कुछ कर्मचारी नेता की वजह से बिजली विभाग बदनाम हो रहा है। उन्होंने पोस्ट में चंद सवाल भी उठाए है। ऊर्जा मंत्री एके शर्मा के ऑफिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया। जिसमें लिखा, एके शर्मा की सुपारी लेने वालों में विद्युत कर्मचारी के वेश में कुछ अराजक तत्व भी हैं। कुछ विद्युत कर्मचारी नेता काफी दिनों से परेशान घूम रहे हैं क्योंकि उनके सामने ऊर्जा मंत्री झुकते नहीं हैं। ये वही लोग हैं जिनकी वजह से बिजली विभाग बदनाम हो रहा है। ज्यादातर विद्युत अधिकारियों और कर्मियों के दिन-रात की मेहनत-परुषार्थ पर ये लोग पानी फेर रहे हैं। ए के शर्मा के तीन वर्ष के कार्यकाल में ये

ऊर्जा मंत्री ने पोस्ट में लिखा, अन्य विभागों में हड़ताल क्यों नहीं हो रही ? वहां यूनियन नहीं हैं क्या ? वहां समस्या या मुद्दे नहीं हैं क्या ? इन लोगों द्वारा ली गई सुपारी के तहत ही कुछ दिन पहले ये अराजक तत्व ऊर्जा मंत्री के सरकारी निवास पर आकर निजीकरण के विरोध के नाम पर 6 घंटे तक अनेक प्रकार की अभद्रता किए और उनके और परिवार के विरुद्ध असभ्य भाषा का प्रयोग किए। एके शर्मा ऐसे हैं कि इन्हें मिठाई खिलाया और पानी पिलाया। इसके अलवा मिलने के लिए ढाई घंटे प्रतीक्षा किया।पोस्ट के आखिरी में लिखा, लगता है कि ए के शर्मा से जलने वाले सभी लोग इकट्ठे हो गए हैं। लेकिन ईश्वर और जनता एके शर्मा के साथ है। उनकी भावना बिजली की बेहतर व्यवस्था सहित जनता की बेहतर सेवा करने की है और कुछ नहीं।ष्

यह सवाल उठाए

1. जब 2010 में टोरेंट कंपनी को निजीकरण करके आगरा दिया गया तब भी तुम लोग यूनियन लीडर थे। कैसे हो गया यह निजीकरण? सुना है वो शांति से इसलिए हो गया कि ये बड़े कर्मचारी नेता लोग हवाई जहाज से विदेश पर्यटन पर चले गए थे।
2. दूसरा प्रश्न यह है कि जब तुम लोग सारी बातें बारीकी से जानते हो तो यह भी जानते ही होगे कि निजीकरण का इतना बड़ा निर्णय अकेला एके शर्मा का नही हो सकता। जब एक श्रम् तक का ट्रांसफर ऊर्जा मंत्री नहीं करता, जब न्च्च्ब्स् प्रबंधन की सामान्य कार्यशैली स्वतंत्र है तो इतना बड़ा निर्णय कैसे ऊर्जा मंत्री अकेले कर सकता है ?
3. तुम यह भी जानते हो कि वर्तमान में यह पूरा निर्णय चीफ सेक्रेटरी की अध्यक्षता में बनाई गई टास्क फोर्स ले रही है। उसके तहत ही सारी कार्यवाही हो रही है।4. तुम लोग पूरी तरह जानते हो कि राज्य सरकार की उच्चस्तरीय अनुमति से ही औपचारिक शासनादेश हुआ हे निजीकरण का।

अब हर विधायक को बताया जाएगा बिजली निजीकरण घोटाला
-अभद्र भाषा प्रयोग करने का ऊर्जा मंत्री का आरोप गलत

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ  को सर्वाधिक समय तक लगातार प्रदेश का मुख्यमंत्री रहने पर बधाई देते हुए एक बार पुनः उनसे अनुरोध किया है कि वे ऊर्जा विभाग की कमान खुद संभाले और निजीकरण का निर्णय निरस्त करने की कृपा करें। संघर्ष समिति ने यह भी निर्णय लिया है कि विधानसभा के मानसून सत्र के पहले बिजली के निजीकरण के पीछे हो रहे घोटाले से सभी विधायकों को अवगत कराया जाएगा।विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने ऊर्जा मंत्री के एक्स पर किए गए बिजली कर्मियों के विषय में ट्वीट पर टिप्पणी करते हुए कहा है की बिजली कर्मी कभी अभद्र भाषा का प्रयोग नहीं करते और जिस तरह विदेश यात्रा से टोरेंट के निजीकरण को जोड़ा गया है वह पूर्णतया निराधार और भ्रम फैलाने वाला है।संघर्ष समिति निजीकरण के पीछे हो रहे इन तमाम घोटालों को अगले 15 दिन तक सम्मानित विधायकों के सामने रखेगी।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां बताया कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण घाटे के झूठे आंकड़े देकर और बिजली कर्मचारियों में भय का वातावरण बना कर किया जा रहा है। संघर्ष समिति ने निर्णय लिया है कि पावर कॉरपोरेशन की ऑडिटेड बैलेंस शीट सभी विधायकों को भेजी जाएगी। इस बैलेंस शीट के माध्यम से स्पष्ट किया जाएगा कि सब्सिडी की धनराशि और सरकारी विभागों के बिजली राजस्व के बकाए की धनराशि जोड़कर घाटा दिखाया जा रहा है जो निजीकरण की एक साजिश है।संघर्ष समिति ने कहा कि जिस ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 को पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण का आधार बनाया जा रहा है वह ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट आज तक पब्लिक डोमेन में नहीं है। इतना ही नहीं तो भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय ने ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 को आज तक राज्य सरकार और राज्यों के विद्युत वितरण निगमों को न तो सर्कुलेट किया है और न ही इस पर कोई आपत्ति मांगी है। संघर्ष समिति ने सवाल उठाया कि ऐसे में लाखों करोड़ रुपए की परिसंपत्तियों को ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 को आधार मानकर कैसे बेचा जा सकता है ? संघर्ष समिति ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण हेतु ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति भी अवैध ढंग से की गई है। ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति में पहले हितों के टकराव का प्राविधान हटा दिया गया फिर मेसर्स ग्रांट थॉर्टन द्वारा झूठा शपथ पत्र देने का फर्जीवाडा सामने आने के बावजूद इसी कंपनी से निजीकरण के दस्तावेज तैयार कराये गए। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की परिसंपत्तियों का और रेवेन्यू पोटेंशियल का मूल्यांकन किए बिना आरएफपी डॉक्यूमेंट में एक लाख करोड रुपए की परिसंपत्तियों को बेचने की रिजर्व प्राइस मात्र 6500 करोड रुपए रख दी गई।
मंत्री के आरोप पर संघर्ष समिति ने कहा कि मौके पर पुलिस के बड़े अधिकारी भी मौजूद थे जो संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों के लगातार संपर्क में थे। पूरे घटनाक्रम का वीडियो फुटेज ऊर्जा मंत्री के पास होगा ही पुलिस के पास भी होगा। बिजली कर्मी शांतिपूर्ण ढंग से समझौतों का क्रियान्वयन न होने पर ऊर्जा मंत्री के प्रति अपना विरोध दर्ज कर रहे थे। किसी ने उनके परिवार के प्रति किसी अभद्र भाषा का प्रयोग नहीं किया। संघर्ष समिति का इतिहास रहा है कि वह सदा ही गांधीवादी ढंग से सत्याग्रह आंदोलन करती है। कभी अभद्र भाषा का प्रयोग नहीं किया जाता।

पीएम और राष्टपति से निजीकरण मामले की सीबीआई जाॅच की मांग
मुख्यमंत्री से उठाई मांग, निजीकरण का फैसला किया जाए निरस्त

उत्तर प्रदेश के 42 जनपदों के निजीकरण को लेकर जिस प्रकार से घमासान मचा है उसे यह बात तो स्पष्ट हो गई है कहीं ना कहीं कुछ तो दाल में काला है। इसीलिए उपभोक्ता परिषद लगातार या मांग उठा रहा है कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एनर्जी टास्क फोर्स द्वारा जो भी निजीकरण से संबंधित निर्णय लिए गए हैं इसकी सीबीआई जांच कराई है। आज ट्विटर पर ऊर्जा मंत्री कार्यालय द्वारा जो ट्वीट सार्वजनिक किया गया है उसमें भी यह स्पष्ट हो गया है कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली एनर्जी टास्कफोर्स द्वारा निजीकरण के संबंध में निर्णय लिए जा रहे हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश सरकार को सबसे पहले निजीकरण के फैसले को जनहित में निरस्त करते हुए पूरे प्रकरण की जांच करते हुए जनहित में उपभोक्ता हित में अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए। एनर्जी ट्रांसफर्स ने अलग-अलग अपने फसलों में अनेकों बार कनफ्लिक्ट आप इंटरेस्ट के मामले में शिथिलता प्रदान की जो पूरी तरह पूरे मसौदे पर प्रश्न चिन्ह लगाती है। उद्योगपतियों के दबाव में ऐसा किया गया यह सभी को पता है। लेकिन कौन उद्योगपति पूरे मामले पर अपने अनुसार रिपोर्ट तैयार करवा रहा था उसका खुलासा होना चाहिए।

उपभोक्ता परिषद की तरफ से पहले ही देश के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को निजीकरण के पूरे फैसले पर सीबीआई जांच करने के लिए एक विस्तृत प्रस्ताव भेजा जा चुका है। इसके बाद कैग ने भी निजीकरण की जांच शुरू कर दी है। वहीं उपभोक्ता परिषद की लोक महत्व याचिकाओं के बाद विद्युत नियामक आयोग ने भी पूरे मसौदे में बड़े पैमाने पर वित्तीय और संवैधानिक कमियां निकली।उपभोक्ता परिषद ने कहा कि सभी को पता है कि निजीकरण का मसौदा तैयार करने वाला ग्रांट थॉर्नटन अमेरिका रेगुलेटर द्वारा दोषी पाया गया है और उस पर 40000 डॉलर की पेनल्टी लगी है। आज भी पत्रावली धूल चाट रही है और उस पर ब्लैक लिस्टिंग की कार्यवाही क्यों नहीं की गई इसके लिए कौन जिम्मेदार है इस पर सब चुप्पी क्यों साधे हैं।

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष, राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा बिजली दर की सुनवाई में पूरे प्रदेश में चाहे प्रधानमंत्री का क्षेत्र बनारस, आगरा, केस्को, मेरठ या नोएडा पावर कंपनी की बात हो सभी सुनवाई की बैठक में बड़े पैमाने पर उद्योगपति, किसान, नौजवान, बुनकर, कार्मिक सभी ने निजीकरण का खुलकर विरोध करते हुए कहा किसी भी हालत में निजीकरण स्वीकार नहीं है के संबंध में अपनी आवाज बुलंद की है। ऐसे में जनता की आवाज मानकर उत्तर प्रदेश सरकार को अपने फैसले को वापस लेना चाहिए।

सरकार से नाराज कार्मिको में बड़े आंदोलन की मांग

इप्सेफ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक 23 अगस्त को नई दिल्ली में आहूत की गई है जिसमें आंदोलन की रूपरेखा घोषित की जाएगी। इंडियन पब्लिक सर्विस इंप्लाइज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीपी मिश्रा एवं महासचिव श्री प्रेमचंद ने संवाददाताओं को बताया है कि मा प्रधानमंत्री एवं एनडीए के मुख्यमंत्रियों को कई बार आंदोलन के माध्यम से ज्ञापन पत्र भेजकर आग्रह किया गया था कि स्वयं एवं राज्यों के मुख्यमंत्री कर्मचारी समस्याओं से बातचीत करके उनकी पीड़ा पर सार्थक निर्णय करें परंतु खेद है कि माननीय प्रधानमंत्री जी एवं मुख्यमंत्रीगण कर्मचारियों की समस्याओं के प्रति गंभीर नहीं है जिससे आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है।
उप महासचिव अतुल मिश्रा ने बताया कि उत्तर प्रदेश की हालत और खराब हैं। बार-बार आग्रह के बावजूद मुख्यमंत्री जी एवं मुख्य सचिव ने एक बार बैठक करके समस्या का निराकरण नहीं कराया। वर्तमान मुख्य सचिव के साथ एक बार बैठक हुई थी उसका कार्यवृत्त ही जारी नहीं किया गया। प्रमुख सचिव और मुख्य सचिव के द्वारा कर्मचारी समस्याओं पर बैठक नहीं की गई है यहां तक की प्रमुख सचिव कार्मिक द्वारा कर्मचारी शिक्षक संयुक्त मोर्चा, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद एवं अन्य विभागीय संगठनों के अध्यक्षध् महामंत्री के सचिवालय प्रवेश पत्र भी नहीं बनाई जा रहे हैं जिससे शासन एवं कर्मचारी के बीच संवाद शून्य है। श्री वीपी मिश्रा ने बताया कि प्रमुख मांगों पर यदि निर्णय नहीं किया गया तो 23 अगस्त को आंदोलन की घोषणा की जाएगी। मुख्य मांगों में पुरानी पेंशन बहाली, आठवीं वेतन आयोग का गठन करके वेतन भत्तों पर निर्णय किया जाना। आउटसोर्सिंग ठेका कर्मचारी को विनियमित करण की नीति बनाने, और सरकारी संस्थाओं का निजीकरण न किया जाए विभागों में रिक्त पदों पर तत्काल भर्तियां की मांग शामिल है। श्री मिश्रा ने सरकार को आग्रह किया है कि यदि देश भर के करोड़ों कर्मचारी परिवार शिक्षक बेरोजगारी महंगाई पर सार्थक निर्णय नहीं किया गया तो 23 अगस्त को बड़े आंदोलन की घोषणा होगी। कर्मचारियों की नाराजगी का भावी चुनावों में सत्ताधारी दल को भारी नुकसान होगा जिसका उत्तरदायित्व सरकार का होगा।

संचारी रोगों की रोकथाम जनजागरूकता

मानसून के आगमन के साथ ही डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया जैसे वेक्टर जनित रोगों की संभावित आशंका को देखते हुए नगर निगम लखनऊ द्वारा संक्रमण की रोकथाम हेतु सभी स्तरों पर सक्रियता बढ़ा दी गई है। नगर आयुक्त एवं नगर स्वास्थ्य अधिकारी के नेतृत्व में फॉगिंग व एंटी लार्वा गतिविधियों को और अधिक तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही इन गतिविधियों की नियमित समीक्षा एवं क्षेत्रीय भ्रमण कर उनके पर्यवेक्षण का कार्य भी किया जा रहा है ताकि जमीनी स्तर पर अभियान की प्रगति सुनिश्चित हो सके।

नगर निगम द्वारा क्षेत्रवार एयरोड्रोनिक स्क्रीन एवं पीए सिस्टम के माध्यम से ऑडियो विजुअल प्रचार अभियान प्रारंभ किया गया है, जिसके तहत डेंगू व मलेरिया से बचाव के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। यह प्रचार सामग्री आगामी 4-5 महीनों तक निरंतर प्रसारित की जाएगी। इसके अतिरिक्त, फॉगिंग और एंटी लार्वा अभियान में प्रयुक्त उपकरणों की स्थिति पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। किसी भी उपकरण के खराब होने की स्थिति में मुख्य अभियंता (त्त्) को तत्काल मरम्मत सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, फॉगिंग के लिए आवश्यक डीजल की अनवरत उपलब्धता भी मुख्य अभियंता द्वारा सुनिश्चित की जा रही है।नालियों एवं अन्य जलजमाव वाले स्थानों की स्थिति पर लगातार निगरानी रखते हुए तत्काल जल निकासी कराने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि मच्छरों के पनपने के स्रोत को समाप्त किया जा सके और सोर्स रिडक्शन को प्रभावी रूप से लागू किया जा सके। नगर निगम लखनऊ जन स्वास्थ्य की रक्षा हेतु पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है और आमजन से भी अपील करता है कि वे अपने आसपास की साफ-सफाई बनाए रखें तथा किसी भी समस्या की सूचना तुरंत नगर निगम को दें।

प्लास्टिक विरोधी मुहिम जारी, 33,000 जुर्माना वसूला

नगर आयुक्त  गौरव कुमार के निर्देशानुसार लखनऊ नगर निगम द्वारा सोमवार को शहर भर में प्लास्टिक के खिलाफ विशेष अभियान चलाया गया। इस अभियान के तहत नगर निगम की विभिन्न जोनों की टीमों ने कार्यवाही करते हुए कुल 3.7 किलोग्राम प्रतिबंधित प्लास्टिक जब्त की और 30 लोगों के खिलाफ चालान काटते हुए 33,000 का जुर्माना वसूला।

नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि यह अभियान प्लास्टिक मुक्त लखनऊ की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे न केवल पर्यावरण को संरक्षित किया जा सकेगा, बल्कि नागरिकों को भी प्लास्टिक के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। जोनवार कार्यवाही में जोन में 1 किलोग्राम प्लास्टिक सामग्री जब्त की गई। चार व्यापारियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए चालान काटे गए, जिनसे कुल 9500 का जुर्माना वसूला गया। जोन 2 में 1.2 किलोग्राम प्लास्टिक बरामद किया गया। इस जोन में भी चार लोगों के खिलाफ चालान कर 4000 का जुर्माना वसूला गया।जोन 4 में करीब 700 ग्राम प्रतिबंधित प्लास्टिक मिलने पर दो व्यक्तियों पर चालान काटा गया और 3000 की धनराशि वसूल की गई। जोन 5 में प्लास्टिक उपयोग करने पर 5 व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई की गई और उनसे कुल 6000 का जुर्माना वसूला गया।जोन 6 में प्लास्टिक उपयोग करने पर 10 व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई की गई और उनसे कुल घ्2000 का जुर्माना वसूला गया। जोन सात में 800 ग्राम प्लास्टिक जब्त की गई और एक व्यक्ति के विरुद्ध चालान काटते हुए 1000 का जुर्माना वसूला गया। जोन 8 में चार व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए कुल 7500 का जुर्माना वसूला गया।

Aaj National

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