-सपा विधायकों पर बरसे योगी सरकार के मंत्री,जीरो टॉलरेंस की सरकार, दोषी बचेंगे नहीं- नितिन अग्रवाल
-विपक्ष मुद्दाविहीन है-दयाशंकर,कानून सम्मत तरीके से होगी कार्रवाई-खन्ना
- REPORT BY:K.K.VARMA || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK
लखनऊ ।उत्तर प्रदेश विधानसभा मानसून सत्र के दूसरे दिन मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने फतेहपुर में मकबरे से जुड़ी घटना को लेकर सरकार को घेरा।प्रश्नकाल समाप्त होते ही नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने इस मुद्दे को उठाया। सपा के सदस्य वेल में आकर सरकार विरोधी नारेबाजी शुरू की। सरकार ने कहा कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। विपक्ष नहीं माना और सपा के सदस्य वेल में नारे बाजी करते रहे। विधान सभा अध्यक्ष को आखिरकार आज भी विधान सभा स्थगित करनी पड़ी।यह लगातार दूसरा दिन है जब सदन की कार्यवाही हंगामे की भेंट चढ़ गया। सरकार ने फतेहपुर घटना को लेकर सदन में स्पष्ट किया कि इसमें एफआईआर दर्ज हो चुकी है। दोषियों की पहचान कर सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिर भी विपक्ष का हंगामा जारी रहा। संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना, आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल और परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने विपक्ष पर जानबूझकर अराजकता फैलाने और राजनीतिक लाभ लेने के आरोप लगाया है।वित्त एवं संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष ने फतेहपुर की घटना उठाई, जिस पर उन्होंने उसी वक्त विस्तृत जवाब दिया। “क्राइम नंबर 319 के तहत एफआईआर दर्ज है। 10 नामजद और 150 अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। जिन धाराओं में केस हुआ है, वह गंभीर हैं और विवेचना के बाद दोषियों को सजा मिलेगी। पप्पू चौहान का नाम सामने आया है, जिन्हें समाजवादी पार्टी से निकाला गया है। यही इनका तरीका है। पहले घटना में शामिल होना, फिर सड़क और सदन में माहौल बिगाड़ना।” उन्होंने कहा कि छोटा सत्र ऐतिहासिक कार्यों के लिए था लेकिन विपक्ष ने दोनों दिन सत्र नहीं चलने दिया।
आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल ने कहा कि संसदीय कार्यमंत्री ने नेता प्रतिपक्ष के सवाल का स्पष्ट जवाब दे दिया है। सरकार की नजर मामले पर है। दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है। जांच जारी है और जो दोषी होगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। यह सरकार करप्शन हो या कानून-व्यवस्था का मामला, जीरो टॉलरेंस पर काम करती है। उत्तर प्रदेश में किसी को माहौल खराब करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि विपक्ष ने जिस मुद्दे पर हंगामा किया, उस पर पहले से ही मुकदमा दर्ज है और कार्रवाई चल रही है। विपक्ष के पास न कोई मुद्दा है, न विजन। ये लोग गुंडागर्दी के आधार पर चुनाव लड़ते और सरकार चलाते हैं। इसलिए लोकतंत्र पर इनका भरोसा नहीं है। फतेहपुर मामले में चाहे दोषी सपा कार्यकर्ता हो या कोई और कार्रवाई तय है। मंत्रियों ने कहा कि सरकार कानून के तहत ही आगे बढ़ेगी और किसी को भी राजनीतिक या साम्प्रदायिक माहौल बिगाड़ने की इजाजत नहीं दी जाएगी। विपक्ष को तथ्यों के बाद शांत हो जाना चाहिए लेकिन उन्होंने व्यवधान डालकर जनता के कामकाज में बाधा पहुंचाई।
यूपी सरकार ने पूरा किया वादा, 56 लाख लोगों के खाते में भेजे 1,000 रुपये
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के 61 लाख गरीब बुजुर्गों को वृद्धा पेंशन देने के अपने वादे को वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में ही पूरा कर लिया है।राज्य सरकार की ओर से मंगलवार को जानकारी दी गयी।जारी बयान के मुताबिक अब सरकार ने चालू वित्त वर्ष में 67.50 लाख पात्र बुजुर्गों तक पेंशन की राशि पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।इससे पहले बीते वित्त वर्ष की पहली तिमाही में ही सरकार ने अपने लक्ष्य के अनुरूप 56 लाख गरीब बुजुर्गों के खाते में 1,000 रुपये प्रतिमाह की दर से पेंशन की राशि देकर उनकी आर्थिक सहायता कर चुकी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने समाज कल्याण विभाग द्वारा वर्ष 2025-26 में वृद्धावस्था पेंशन योजना में पेंशन धारकों का लक्ष्य 61 लाख निर्धारित किया था, जिसे पहले ही वित्त वर्ष में प्राप्त कर आगे का नया लक्ष्य तय किया है। इस फैसले से सरकार ने प्रदेश के बुजुर्गों के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूत किया है।पेंशन प्रक्रिया डिजिटल और पारदर्शी बनाया है, जिससे पेंशन सीधे आधार से जुड़े लाभार्थी के खाते में जाती है। लाभार्थी बिना देरी के लाभ पाते हैं। वृद्धावस्था पेंशन योजना सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों का प्रमुख हिस्सा है, जो बुजुर्गों को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने पर केंद्रित है।इस योजना के तहत 60 वर्ष से अधिक उम्र के आर्थिक रूप से कमजोर वृद्धजनों को प्रतिमाह 1,000 रुपये की पेंशन प्रदान की जाती है। प्रदेश सरकार ने इस योजना को शुरू से ही प्राथमिकता दी है। 2017 में जब योजना का विस्तार शुरू हुआ, तब लाभार्थियों की संख्या 37.47 लाख थी, जो आज बढ़कर 67.50 लाख के लक्ष्य तक पहुंच गई है।यह वृद्धि सरकार की सक्रियता का नतीजा है, जहां विकासखंड और ग्राम पंचायत स्तर पर पात्र बुजुर्गों को चिह्नित किया गया।
स्कूलों के मर्जर पर विपक्ष ने राज्य को किया गुमराह, एक भी स्कूल बंद नहीं-संदीप
उत्तर प्रदेश विधानसभा में छात्रों के नामांकन, शिक्षकों की नियुक्ति, स्कूल मर्जर, शिक्षा भर्ती और प्राथमिक स्कूलों में बच्चों की प्रवेश आयु 4 वर्ष करने जैसे मुद्दों पर विपक्ष के हमलों का बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने आंकड़ों की बौछार से जवाब दिया। सपा के सदस्यों पंकज पटेल,अनिल प्रधान और प्रभू नरायन सिंह ने पूछा कि बेसिक स्कूलों में कितने छात्र अध्ययन रत हैं।कितने शिक्षकों की नियुक्ति है।कितने पद स्वीकृत हैं।छात्र शिक्षकों हेतु कोई अनुपात है या नहीं। वही सपा के समरपाल सिंह ने सवाल किया कि प्रदेश में कार्यरत शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ाएंगे या नहीं। सपा सदस्यों के सवाल का जवाब देते हुए बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि विपक्ष ने मर्जर व्यवस्था का पूरी तरह राजनीतिकरण कर आमजन को गुमराह किया है, जबकि सच्चाई यह है कि सरकार ने शिक्षा के स्तर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए ऐतिहासिक कार्य किए हैं।मंत्री ने सदन में बताया कि वर्तमान में परिषदीय विद्यालयों में कुल नामांकित छात्रों की संख्या लगभग 1.48 करोड़ से अधिक है। परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों, शिक्षामित्रों और अनुदेशकों की कुल संख्या 6.28 लाख से अधिक है।उन्होंने बताया कि प्राथमिक विद्यालयों में 1 करोड़ 4 लाख 93 हजार 389 बच्चे नामांकित हैं।इनको शिक्षा देने के लिए 3,38,590 शिक्षक और 1,43,450 शिक्षामित्र नियुक्त हैं, जबकि उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 43,01,483 बच्चों को पढ़ाने के लिए 1,20,860 शिक्षक और 25,223 अनुदेशक तैनात हैं। प्राथमिक शिक्षा में 30:1 और उच्च प्राथमिक शिक्षा में 35:1 का अनुपात भी ठीक है।उन्होंने स्पष्ट किया कि पेयरिंग के बाद 50 तक के नामांकन वाले विद्यालयों में दो शिक्षक और एक शिक्षामित्र तैनात किए जाएंगे। छात्र-शिक्षक अनुपात पूरी तरह संतुलित है और इसे बनाए रखने की कार्रवाई जारी रहेगी।स्कूल बंद करने के आरोपों को खारिज करते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार ने एक भी विद्यालय को बंद करने का निर्णय नहीं लिया है। सभी परिषदीय विद्यालय बेसिक शिक्षा विभाग अंतर्गत संचालित हो रहे हैं।बच्चों की प्रवेश आयु 4 वर्ष करने के सवाल पर उन्होंने दो टूक कहा कि यह संभव नहीं है क्योंकि आरटीई के प्रावधानों के तहत देशभर में एक समान व्यवस्था लागू है।3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए आंगनवाड़ी में पढ़ाई व पोषण की व्यवस्था पहले से है।मर्जर पर मंत्री ने बताया कि 1 किमी के दायरे और 50 से कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों को ही पेयर किया गया है। पेयर् किये गये स्कूलों को संसाधनयुक्त विद्यालयों में समाहित किया गया है । बच्चों को बेहतर सुविधा और निकटतम स्कूल की पहुंच मिले।खाली विद्यालयों में आईसीडीएस विभाग के साथ मिलकर प्री-प्राइमरी यानी प्ले स्कूल और नर्सरी कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। 3000 से अधिक विद्यालय आईसीडीएस के साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं और इनके लिए 19,484 एसीसीई की संविदा पर नियुक्ति की जा चुकी है।बेसिक शिक्षा मंत्री ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि 2017 से 2025 तक सरकार ने जितना काम किया, उतना किसी भी पूर्ववर्ती सरकार ने नहीं किया।इस वर्ष 27 लाख से अधिक बच्चों का नामांकन हुआ है।सपा सरकार के समय 3.45 करोड़ बच्चे शिक्षा से दूर थे, जबकि मौजूदा सरकार ने अभियान चलाकर बच्चों को घर से निकालकर स्कूल तक पहुंचाने का कार्य किया है। शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए मॉडल कंपोजिट विद्यालय बनाए जा रहे हैं।30 करोड़ की लागत से प्रत्येक विद्यालय का निर्माण होगा और हर जनपद में दो विद्यालय बनाए जाएंगे।उन्होंने कहा कि हमारी योगी सरकार शिक्षा की गुणवत्ता को ऊंचाई तक ले जाने के लिए संकल्पित है।
यूपी में महिला उत्पीड़न के मामलों में बढ़ोतरी,1090 वीमेन पावर लाइन पर बढ़ी कॉल संख्या
उत्तर प्रदेश में महिला उत्पीड़न के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है, जिसका प्रमुख कारण अनचाही फोन कॉल्स, साइबर बुलिंग और घरेलू हिंसा है। 1090 वीमेन पावर लाइन के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में महिला उत्पीड़न से संबंधित मामलों में 12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।आंकड़े यह संकेत देते हैं कि महिलाएं विभिन्न तरह के उत्पीड़न का शिकार हो रही हैं, जिससे उनकी मानसिक स्थिति पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ा। लखनऊ से सबसे अधिक शिकायतें मिल रही हैं। 1090 वीमेन पावर लाइन को जुलाई से अगस्त के बीच प्रतिमाह करीब पांच हजार कॉल्स मिल रही हैं। यह आंकड़ा यह दर्शाता है कि राजधानी में महिला उत्पीड़न की घटनाएं काफी अधिक हो रही हैं, जिसके कारण महिला सुरक्षा के मुद्दे को और अधिक गंभीरता से उठाने की आवश्यकता है।1090 वीमेन पावर लाइन में प्राप्त होने वाली शिकायतों में सबसे अधिक मामले अनचाही फोन कॉल्स और साइबर बुलिंग के हैं। घरेलू हिंसा, रिश्तों में दरार, दहेज प्रताड़ना भी प्रमुख समस्याएं हैं। इन मामलों में महिलाओं को मानसिक और शारीरिक दोनों प्रकार का उत्पीड़न सहना पड़ता है, जो उनके आत्मविश्वास को प्रभावित करता है। इन कारणों से महिलाएं मानसिक तनाव का सामना करती हैं और अक्सर खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करतीं।1090 वीमेन पावर लाइन की डिप्टी एसपी, विनोद यादव के अनुसार, घरेलू हिंसा के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं, खासकर शहरी इलाकों में। ऐसे मामलों में पीड़ित महिलाओं को काउंसलिंग के माध्यम से मानसिक शांति दी जा रही है। यूनिसेफ के 36 मनोवैज्ञानिकों की मदद ली जा रही है, हर दिन सैकड़ों महिलाओं की काउंसलिंग कर उन्हें आत्मविश्वास प्रदान करते हैं।वर्ष 2023-2024 के बीच 1090 वीमेन पावर लाइन में कॉल्स की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। 2023 में 4,00,000 कॉल्स आईं, जबकि 2024 में यह संख्या बढ़कर 4,50,000 हो गई। इसका मतलब यह है कि महिला उत्पीड़न और इससे संबंधित घटनाओं में निरंतर बढ़ोतरी हो रही है।2025 के जुलाई महीने में 1090 वीमेन पावर लाइन को प्रदेशभर से 43,000 से अधिक शिकायतें प्राप्त हुईं। इनमें से 13,925 शिकायतें फोन और साइबर बुलिंग से संबंधित थीं, जबकि 28,933 शिकायतें अन्य मामलों से संबंधित थीं। इस डेटा से यह साफ होता है कि उत्पीड़न के विभिन्न प्रकार की घटनाएं महिलाओं के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बन चुकी हैं।अपर पुलिस अधीक्षक विजय त्रिपाठी के अनुसार पूरे प्रदेश से प्रतिदिन लगभग सात हजार से अधिक कॉल्स आती हैं, जिनमें से 60 प्रतिशत मामलों में मनोवैज्ञानिक सहायता की आवश्यकता होती है। यूनिसेफ के मनोवैज्ञानिक इन महिलाओं की काउंसलिंग करते हैं ताकि उन्हें मानसिक शांति मिल सके और वे किसी गलत कदम से बच सकें। यह सहायता उन्हें आत्मनिर्भर बनने में मदद करती है, जिससे वे उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठा सकती हैं।
विधान परिषद में कानून व्यवस्था के मुद्दे पर सपा का हंगामा, बहिर्गमन
-2017 में प्रदेश में जब भाजपा की सरकार बनी तो लोगों ने राहत की सांस ली-केशव
प्रदेश में कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी ने मंगलवार को विधान परिषद में हंगामा और नारेबाजी करने के बाद सदन से बहिर्गमन किया। शून्यकाल में सपा के लाल बहादुर यादव, आशुतोष सिन्हा, डा. मानसिंह यादव ने कार्य स्थगन प्रस्ताव के तहत आरोप लगाया कि प्रदेश में कानून का राज समाप्त हो गया है। हत्याएं, लूट, रंगदारी, दुष्कर्म, महिला उत्पीड़न, अवैध कब्जे एवं फर्जी मुकदमे की घटनाएं बढ़ गईं हैं। सपा सदस्य मुकुल यादव ने कहा कि यूपी में प्रतिदिन औसतन 10 हत्याएं एवं नौ बलात्कार की घटनाएं हो रही हैं। हिरासत में हत्या तथा घरेलु हिंसा जैसे मामले में भी यूपी नम्बर वन बन चुका हैमल। सपा के अन्य सदस्य किरणपाल कश्यप ने कहा कि थानों में महीना बंधा हुआ है और पुलिस पूरी तरह से वसूली में लगी हुई है। दबंग मन्दिरों की जमीन पर अवैध रूप से खुलेआम कब्जा कर रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव ने कहा कि यूपी में रक्षक ही भक्षक बन चुका है। जिससे यूपी में अपराध का ग्राफ अन्य राज्यों की तुलना में काफी अधिक हो चुका है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कहीं भी महिलाएं सुरक्षित नहीं है। कानून-व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है और जंगलराज कायम हो गया है। अधिकारियों के बंगले में बैठते थे अपराधी: केशव प्रसाद जवाब में नेता सदन केशव प्रसाद मौर्य ने सपा के शासनकाल की आपराधिक घटनाओं को गिनाना शुरू कर दिया। केशव ने कहा कि 2017 में प्रदेश में जब भाजपा की सरकार बनी तो लोगों ने राहत की सांस ली। क्योंकि सत्ता बदलने से पूर्व हत्या, लूट, डकैती-छिनैती आम बात थी। तब सीएम के बंगले से लेकर मंत्री और बड़े-बड़े अफसरों के ड्राइंग रूप में अपराधी और माफिया बैठा करते थे। शासन से जनता का विश्वास उठ चुका था। भय का वातावरण था परिणामस्वरूप 2014 के संसदीय चुनाव में हमे 73 सीटें हासिल हुई थी। उसके बाद 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में सत्ता पक्ष की सबसे करारी हार हुई थी और जनता ने भाजपा को प्रचंड बहुमत से सत्ता सौंपी थी। उन्होंने कहा कि 2019 में हमें फिर से भारी बहुमत के साथ 64 सीटें मिलीं। वर्ष 2022 में माहौल ऐसा बनाया जाने लगा कि सपा आ रही है। अपराधी फिर से सिर उठाने लगे लेकिन जनता जानती थी कि अगर ये वापस आए तो फिर से जंगलराज आएगा लिहाजा हमें प्रचंड बहुमत देकर दोबारा सत्ता में बिठा दिया। नेता प्रतिपक्ष ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि कार्यस्थगन कानून-व्यवस्था के नाम पर है और नेता सदन मुद्दे को भटका रहे हैं। इसके बाद सपा के सभी सदस्य हंगामा करने लगे। फिर नारेबाजी करते हुए सदन से बहिर्गमन कर गए।
