- REPORT BY:PREM SHARMA || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK
लखनऊ। उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन व यूपीएसएलडीसी की वार्षिक राजस्व आवश्यकता व बिजली दर की सुनवाई आज विद्युत नियामक आयोग सभागार में आयोग अध्यक्ष श्री अरविंद कुमार व सदस्य संजय कुमार सिंह की उपस्थिति में संपन्न हुई। जिसमें पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन व यूपीएसएलडीसी के सभी निदेशक उपस्थित थे सबसे पहले पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन द्वारा प्रस्तुतीकरण किया गया। सुनवाई 11 बजे से शुरू होकर लगभग 1बजे तक चली। उपभोक्ता परिषद में पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन में निजीकरण रूपी टैरिफ बेस कंपटेटिव बिडिंग (टीबीसीबी) व्यवस्था पर तत्काल रोक लगाने की मांग उठाई। तर्क रखा कि जो काम पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन 25 प्रतिशत कर रहा वही निजी घराने 25 प्रतिशत से ज्यादा महंगी दरों पर कर रहे हैं। जो पूरी तरह गलत है। पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन नहीं सभी डिस्काउंट में निजीकरण पर पूर्णतया प्रतिबंध लगाना चाहिए।
प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की तरफ से पक्ष रखते हुए उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन इस बार अब तक का सबसे बड़ा वार्षिक राजस्व आवश्यकता 6279 करोड़ दाखिल किया है। जो बढ़ा चढ़ा कर प्रदेश की जनता पर भार डालने की कोशिश की गई है। इस पर आयोग को गंभीरता से विचार करना होगा। पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन को पहले अपने सिस्टम पर काम करना चाहिए। तब ट्रांसमिशन चार्ज की दरों में बढ़ोतरी की बात करना चाहिए। वर्तमान में पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन को पता ही होगा कि 132 केवी सब स्टेशनों क्षमता 69232 एमवीए है। उसका भार यदि किलो वाट में निकाला जाए तो वह 6 करोड़ 23 लाख किलो वाट के बराबर होगा। वही प्रदेश के विद्युत उपभोक्ता वर्तमान में 3 करोड़ 61 लाख है। उनके द्वारा लिया गया कुल स्वीकृत बार 8 करोड़ 17 लाख 85457 किलोवाट है। जब गर्मी में पीक अवर्स में डायवर्सिटी फैक्टर 1 अनुपात 1 होता है तो इनका सिस्टम कांपने लगता है।ऊपर से बिजली चोरी का लोड भी इसी सिस्टम पर आता है। ऐसे में प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं को सुचारू रूप से 24 घंटा विद्युत आपूर्ति करने के लिए पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन व बिजली कंपनियों का सिस्टम ही सही नहीं है। दरों में बढ़ोतरी की बात बंद होकर सिस्टम सही होना चाहिए। पूरे प्रदेश में पावर सिस्टम मिसमैच कर रहा है। जिसका खामियाजा गर्मी में प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ता है।उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने आगे कहा यूपीएसएलडीसी स्वतंत्र होकर काम करें। आज भी भारत सरकार द्वारा बनाए गए कानून के तहत 24 घंटे विद्युत आपूर्ति के मामले पर यूपीएसएलडीसी चुप रहता है। प्रदेश में विद्युत आपूर्ति की आवश्यकता होते हुए भी उत्पादन इकाइयों को रिजर्व शटडाउन दिया जाता है। जो गलत है ग्रामीण शहरी सभी को 24 घंटे बिजली मिलनी चाहिए। पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन उत्पादन निगम व यूपीएसएलडीसी सभी के एचडी अध्यक्ष एक है या गलत है। एक दूसरे के खिलाफ अपील करने की बात आएगी तो कोई अपने ही खिलाफ अपील करने की परमिशन कैसे देगा। इस पर आयोग गंभीरता से विचार करें। उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन की टैरिफ पर करारा हमला बोलते हुए कहा सबसे पहले पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन केवल रिटर्न ऑफ इक्विटी लाभांश 2 प्रतिशत लेता था। इस बार 14.5 प्रतिशत लेने की बात कही गई है। इससे उपभोक्ताओं पर सीधे तौर पर 1824 करोड़ का भार आएगा। वास्तव में यदि इसे आयोग द्वारा स्वीकार किया जाता है तो टैरिफ बेस कॉम्पिटेटिव बिडिंग की प्रक्रिया जो निजीकरण को बढ़ावा है, इस पर पूर्णतया प्रतिबंध लगना चाहिए क्योंकि जब लाभांश के रूप में पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन के पास उचित धन उपलब्ध रहेगी तो वह स्वयं ट्रांसमिशन के काम करेगा। निजी क्षेत्र में ट्रांसमिशन के कार्य को बढ़ावा देने पर तत्काल रोक लगाई है।
लोनिवि मिनिस्टीरियल एसोसिशन का 41वॉ अधिवेशन 23 और 24 को होगा
उ.प्र. लोक निर्माण विभाग मिनिस्टीरियल एसोसिएशन का 41 वॉ द्विवार्शिक अधिवेशन रवीन्द्रालय प्रेक्षागृह में 23 एवं 24 को सम्पन्न होगा। यह जानकारी एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष पद्मनाभ त्रिवेदी ने दी।एसोसिएशन के महामं.ी जे.पी. पाण्डेय ने बताया कि अधिवेशन का उद्घाटन प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक और राज्य ऊर्जा मंत्री सोमन्द्र सिंह तोमर करेंगें। अधिवेशन के तह्त 23 को उद्घाटन कार्यक्रम के उपरान्त अन्तरिक सत्र में चर्चा होगी। 24 अगस्त को चुनाव अधिकारी यू0पी0 सिंह अध्यक्ष मिनिस्टीरियल एसोसिएशन पंचायती राज और उपेन्द्र नाथ त्रिपाठी अध्यक्ष उ0प्र0 फेडरेशन ऑफ मिनिस्टीरियल सर्विस की उपस्थिति में प्रदेश कार्यकारिणी एवं क्षेत्रीय पदाधिकारियों का चुनाव होगा।
अमराईगांव में लाखों कब्जा मुक्त कराई गई
लखनऊ मण्डल की मण्डलायुक्त और नगर आयुक्त गौरव कुमार के निर्देश पर बुधवार को ग्राम अमराईगांव में नगर निगम द्वारा अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया। इस दौरान ग्राम की सार्वजनिक उपयोग की भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराया गया।यह अभियान अपर नगर आयुक्त नम्रता सिंह के निर्देश पर चलाया गया। मौके पर कार्यवाही का नेतृत्व प्रभारी अधिकारी (सम्पत्ति) रामेश्वर प्रसाद ने किया। उनके साथ नगर निगम के नायब तहसीलदार राजेन्द्र कुमार, लेखपाल विनोद वर्मा और आशुतोष कुमार मौजूद रहे।टीम ने सरकारी भूमि पर किए गए अवैध प्लॉटिंग और बाउंड्रीवॉल को जेसीबी मशीन की मदद से हटवाया। पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न हुई। अभियान के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए थानाध्यक्ष इंदिरानगर की ओर से पुलिस बल भी मौजूद रहा। अभियान के तहत ग्राम अमराईगांव, तहसील सदर, जिला लखनऊ की खसरा संख्या-1033 (क्षेत्रफल 0.0600 हे.) और चकमार्ग की भूमि को खाली कराया गया। इसमें से 1162 वर्ग फुट भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया। यह भूमि नगर निगम के नाम दर्ज है और इसकी अनुमानित बाजार कीमत लगभग 29 लाख रुपये आंकी गई है।
अतिक्रमण और पॉलिथीन विरोधी अभियान तेज
शहर में बढ़ते पॉलिथीन प्रयोग, अवैध अतिक्रमण और यातायात बाधाओं को गंभीरता से लेते हुए नगर निगम लखनऊ ने बुधवार को कई जोनों में एक साथ व्यापक अभियान चलाया। यह कार्रवाई महापौर सुषमा खर्कवाल के निर्देश और नगर आयुक्त गौरव कुमार के आदेश पर की गई। अभियान का मुख्य उद्देश्य सड़कों और फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त कराना और नागरिकों को सुगम व सुरक्षित यातायात उपलब्ध कराना है।
जोनल अधिकारी शिल्पा कुमारी के नेतृत्व में वार्ड मोतीलाल नेहरू चंद्रभानु गुप्त नगर क्षेत्र में चारबाग नत्था चौराहा, बस स्टैंड और मेट्रो स्टेशन के आस-पास अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया गया। इस दौरान 2 काउंटर, 4 मेज़ और 2 बोर्ड फ्लेक्स जब्त किए गए। गंदगी फैलाने वालों पर 14 चालान लगाकर 16,100 वसूले गए और पॉलिथीन के खिलाफ 4 चालानों से 8,000 का जुर्माना वसूल किया गया। कार्रवाई में एसीपी रत्नेश सिंह पुलिस बल के साथ मौजूद रहे।जोनल अधिकारी श्री मनोज यादव के नेतृत्व में वार्ड भवानीगंज क्षेत्र में टूरियागंज चौराहे से बालदा ढाल तक अभियान चलाया गया। यहां 10 ठेले, 4 काउंटर, 15 अस्थाई दुकानें, 1 लोहे की बेंच और 1 लकड़ी का तख्त हटाया गया। अतिक्रमणकर्ताओं से 6,800 का जुर्माना वसूला गया और उन्हें चेतावनी दी गई कि भविष्य में पुनः अतिक्रमण न करें।जोनल अधिकारी श्री नंदकिशोर की अध्यक्षता में चारबाग रेलवे स्टेशन से नत्था चौराहे तक अभियान चलाकर 2 काउंटर, 2 गुमटी और 10 ठेले हटाए गए। इसके अलावा 6 लकड़ी की बेंच और 1 लोहे की बेंच जब्त की गई। जिन वेंडरों ने वेडिंग शुल्क जमा नहीं किया था, उन्हें एक सप्ताह के भीतर शुल्क जमा करने की अंतिम चेतावनी दी गई। जोनल अधिकारी संजय यादव के नेतृत्व में पत्रकारपुरम चौराहे से गोमती नगर रेलवे स्टेशन तक सड़क के दोनों किनारों से अतिक्रमण हटाया गया। अभियान के दौरान साइकिल ट्रैक और ग्रीनबेल्ट पर की गई अवैध पार्किंग भी हटाई गई। नगर निगम की टीम ने मौके से बड़ी मात्रा में सामान जब्त किया। जोनल अधिकारी अजीत राय ने अवध शिल्पग्राम स्थित जी-20 चौराहे पर अभियान चलाकर 5 किलोग्राम पॉलिथीन और 2 गुमटी जब्त कीं। इस दौरान 23,000 का शमन शुल्क वसूला गया।
बकाएदारों से 18 लाख गृहकर वसूली
नगर निगम लखनऊ ने कर जमा न करने वालों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए मंगलवार को एक बड़ा वसूली अभियान चलाया। नगर आयुक्त के निर्देश पर जोन-03, 04, 05, 06, 07 और 08 की संयुक्त टीमों ने बकाया संपत्ति कर जमा कराने के लिए अभियान चलाया। इस दौरान नगर निगम ने विभिन्न क्षेत्रों में स्थित भवन स्वामियों से लगभग 18 लाख रुपये की वसूली की।अभियान के दौरान जोन-03 में सीतापुर रोड और केशव नगर इलाके में कार्रवाई की गई। यहाँ भवन स्वामी टिकाराम से घ्61,740.51, फखरुद्दीन से 1,17,891.74 और विद्या श्रीवास्तव से 85,580.85 की वसूली हुई। जोन-04 के चिनहट बाजार क्षेत्र में सैयद मोहम्मद अतीक शाह से 41,127, सरवर जहां से 20,000 और दिनेश चंद्र शर्मा से 50,000 वसूले गए। जोन-05 के इंद्रलोक इलाके में अरुण शुक्ला से 70,000 और अवतार सिंह से 40,000 की वसूली की गई।जोन-06 में कन्हैया माधवपुर दित्तीय और लाल जी टंडन क्षेत्र में कार्रवाई हुई। यहाँ मो. जुबैर से 30,000, लखनऊ फिनिशिंग गत्ता फैक्ट्री से 50,000 और ऊदन कुमार से सबसे बड़ी रकम 1,70,683 की वसूली की गई। जोन-07 में प्रधान यादव से 10,044, रूपचंद्र से 32,000, सिया राम से 48,002 और बीरेंद्र पांडेय से 17,901 की वसूली की गई।जोन-08 में सबसे बड़ी कार्रवाई हुई। एसएन आहूजा और कांता आहूजा के जे-370 और 371 नंबर भवन से कुल 9,61,099 की वसूली की गई।
स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ शीघ्र करेगा आन्दोलन की घोषणा
उत्तर प्रदेश स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष शशि कुमार मिश्रा ने प्रदेश कार्यकारणी की बैठक बुलाई है। इस बैठक में लम्बित समस्याओं के प्रति सरकार द्वारा की जा रही अनदेखी के चलते आन्दोलन की रणनीति बनाकर आन्दोलन की तिथि घोषित की जाएगी।
श्री मिश्रा स्थानीय निकाय कर्मचारियों की सेवा सम्बन्धी एवं अन्य समस्याओं का समाधान नगर विकास विभाग द्वारा पिछले लगभग 06-07 वर्षों से न किये जाने के कारण महासंघ द्वारा 20 अगस्त, 2025 तक दी गयी समय सीमा पर कोई कार्यवाही न होने पर आकोश व्यक्त करते हुए 30 अगस्त, 2025 को महासंघ की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक बुलाकर आन्दोलन की घोषणा करेगा। महासंघ गत 06-07 वर्षाे से निरन्तर सेवा सम्बन्धी एवं अन्य समस्याओं के समाधान हेतु अनेकोनेक पत्राचार, ज्ञापन, बैठक, आन्दोलन आदि करने के उपरान्त भी निकायों के कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान उक्त के पश्चात भी नहीं किया जा रहा है। आज महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष शशि कुमार मिश्र ने प्रदेश महामंत्री रमाकान्त मिश्र कानपुर तथा कार्यवाहक प्रदेश अध्यक्ष राकेश अग्निहोत्री गाजियाबाद आदि प्रदेश के प्रमुख पदाधिकारियों से सर्म्पक कर इन परिस्थीतियों मे महासंघ की कार्यसमिति की बैठक 30 अगस्त, 2025 को बुलाये जाने की सूचना प्रसारित की गयी। महासंघ द्वारा गतदिनो प्रमुख सचिव नगर विकास को 20 अगस्त, 2025 तक समस्याओं का समाधान कराये जाने का अनुरोध किया जा चुका है उक्त पत्र के द्वारा यह भी सुनिश्चित किया गया था कि यदि उक्त समस्याओ का समाधान न होने की दशा में पुनः प्रदेश व्यापी आन्दोलन किया जायेगा ।
जिसके कम में एक बार पुनः महासंघ द्वारा अपने पत्र 08 अगस्त, 2025 के द्वारा मुख्यमंत्री, नगर विकास मंत्री,, मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव,निदेशक स्थानीय निकाय उवप्रव शासन द्वारा समय रहते सार्थक र्निणय, आदेश जारी किये जाने हेतु अनुरोध किया गया है। उनके मुताबिक निकाय कर्मचारियों की प्रमुख रूप से उक्त मांगो का सार्थक निर्णय नही किया जा रहा है। जैसे अकेन्द्रीयित कर्मचारियों की सेवा नियमावली, वर्ष 2001 तक कार्यरत दैनिक वेतन, संविदा एवं तदर्थ (धारा-108) के कर्मचारियों के विनियमितीकरण हेतु जारी शासनदेश 24 फरवरी 2016 लगभग 09 वर्ष एवं तदर्थ कर्मचारियों के विनियमितीकरण हेतु 16 दिसम्ब्र 2021 लगभग 04 वर्ष व्यतीत होने के पश्चात भी उसका अनुपालन नहीं किया गया। वहीं लिपिक, राजस्व, कम्प्यूटर आपरेटर, वाहन चालक आदि संवर्गों का पुर्नगठन एवं उच्चीकरण नहीं किया गया। इसके साथ ही साथ सफाई कर्मचारियों सहित चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की पूरी सेवाकाल में तीन पदोन्नति के अवसर नहीं मिल पा रहे है। वहीं आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा, न्यूनतम वेतनमान आदि से वंचित रखते हुये महासंघ के 13 सूत्रीय मांग पत्र पर कोई सार्थक निर्णय नहीं लिया जा रहा है।
बिजली की माँग 30251 मेगावॉट: आपूर्ति बनाये रखने की अपील
-विरोध अपनी जगह, जनता जरूरत पहले: शैलेन्द्र दुबे
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने बिजली कर्मियों से अपील की है कि निजीकरण के विरोध में चलाये जा रहे आंदोलन के दौरान बढ़ी हुई बिजली की मांग को देखते हुए बिजली उपभोक्ताओं को कोई तकलीफ नहीं होनी चाहिए। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में आज लगातार 266 वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में सभी जनपदों और परियोजनाओं पर व्यापक जनसंपर्क कर विरोध प्रदर्शन जारी रखा।विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि 19 अगस्त को रात 10.21 बजे 30251 मेगावॉट बिजली की माँग पहुंच गई जिसके आने वाले दिनों में और बढ़ने की संभावना है। जून में 31486 मेगावॉट की अब तक की सबसे अधिक मांग रही है। अगस्त सितम्बर में बिजली की मांग इससे भी अधिक रहने की सम्भावना है।
संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली कर्मी निजीकरण के विरोध में चल रहे संघर्ष में उपभोक्ताओं को साथ लेकर चल रहे हैं । यह अपने आप में एक कीर्तिमान है कि विगत 266 दिन के आन्दोलन में बिजली कर्मियों ने आन्दोलनरत रहते हुये भी महाकुम्भ में बिजली की अद्वितीय व्यवस्था बनाये रखी और मई जून की भीषण गर्मी में अधिकतम बिजली आपूर्ति के कीर्तिमान बनाये। संघर्ष समिति का बिजली कर्मियों को निर्देश है कि आंदोलन के कारण किसी भी उपभोक्ता को कठिनाई नहीं होनी चाहिए।संघर्ष समिति ने कहा है कि जहां बिजली कर्मी आंदोलन के साथ उपभोक्ताओं की समस्याओं का भी समाधान कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर पावर कार्पाेरेशन प्रबंधन बिजली कर्मियों का दमन कर कार्य का वातावरण लगातार बिगाड़ रहा है। हजारों बिजली कर्मियों का जून, जुलाई माह का वेतन काम करने के बावजूद नहीं दिया गया है जो सबसे अधिक निन्दनीय है। संघर्ष समिति ने कहा कि चाहे जितना दमन किया जाए बिजली कर्मियों का आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक निजीकरण वापस नहीं होता और उत्पीड़न की समस्त कार्यवाहियां निरस्त नहीं की जाती।संघर्ष समिति का निर्णय है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का टेंडर होने पर सभी ऊर्जा निगमों के तमाम बिजली कर्मचारी, संविदा कर्मी, जूनियर इंजीनियर और अभियंता अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार प्रारंभ कर देंगे और शुरू होगा सामूहिक जेल पर हुआ आंदोलन।आज राजधानी लखनऊ में संघर्ष समिति के केन्द्रीय पदाधिकारियों की बैठक में निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन को और तेज करने की रणनीति बनाई गई। अधिकतम अभियंताओं तक जनसंपर्क तेज करने की दृष्टि से अभियन्ता संघ ने आज से परियोजना वार ऑनलाइन मीटिंग करना प्रारम्भ किया है। आज हरदुआगंज और पारीछा ताप बिजली घरों के अभियंताओं की ऑनलाइन मीटिंग हुई। अगले सप्ताह से संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों के प्रांतव्यापी दौर प्रारंभ होंगे।
