-उत्पादन बंद करना,कंस्यूमर राइट रूल 2020 की धारा 10 का उल्लंघन
- REPORT BY:AAJ NATIONAL NEWS || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK
लखनऊ। प्रदेश के ऊर्जा मंत्री अनेकों बार विधानसभा में कह चुके हैं कि वह निजीकरण इसलिए कर रहे हैं क्योंकि 24 घंटे बिजली राज्य की जनता को देना है। हम जो भी कुछ कर रहे हैं प्रदेश और देश को विकसित बनाने के लिए कर रहे हैं। अब आज उपभोक्ता परिषद सरकार व ऊर्जा मंत्री का ध्यान दिलाना चाहता है केंद्र सरकार द्वारा कंस्यूमर राइट रूल 2020 देश में लागू करते हुआ। उसकी धारा 10 के तहत कहा गया कि प्रदेश के सभी विद्युत उपभोक्ताओं को 24 घंटे बिजली दिया जाना अनिवार्य चाहिए। भले ही ग्रामीण या शहरी उपभोक्ता हो। पावर कॉरपोरेशन निश्चित तौर पर प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं को गर्मी के कुछ महीनो में 24 घंटे बिजली देने का अभी तक इंतजाम नहीं कर पाया है। जबकि 24 घंटे बिजली देने का सरकार और पावर कारपोरेशन के पास पुख्ता इंतजाम है। तो फिर प्रदेश की जनता को 24 घंटे बिजली मिलना चाहिए।ऐसे में रोस्टर से 18 घंटे और 21 घंटे बिजली देने का क्या मतलब है।
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कोई भी राज्य अपने प्रदेश की जनता को अच्छी विद्युत आपूर्ति करने के लिए उत्पादन इकाइयां लगता है। उत्तर प्रदेश में भी बहुत सी उत्पादन इकाइयां लगी ह।ै लेकिन आज जो खुलासा उपभोक्ता परिषद करने जा रहा है वह सभी के लिए चिंता का विषय होगा। उत्तर प्रदेश में 5 सितंबर 2025 तक चार उत्पादन इकाइयां हरदुआगंज एक्सटेंशन -द्वितीय यूनिट -1 660 मेगावाट हरदुआगंज यूनिट- 8 कुल 250 मेगावाट हरदुआगंज यूनिट -9 कुल 250 मेगावाट टांडा यूनिट -1 कुल 110 मेगावाट व टांडा यूनिट -2 कुल 110 मेगावाट हरदुआगंज यूनिट -7 कुल 105 मेगावाट सब टोटल 1486 मेगावाट उत्पादन इकाइयों को लो- डिमांड यानि की बिजली की आवश्यकता नहीं कह कर बंद कर दिया गया है। जबकि आज भी ग्रामीण क्षेत्र में पावर कॉरपोरेशन 24 घंटे बिजली नहीं दे पा रहा है। ऐसे में लो डिमांड कैसे कहा जा सकता है। जब प्रदेश के सभी विद्युत उपभोक्ताओं को 24 घंटे बिजली देने के बाद भी बिजली बचे तब तो लो डिमांड में मशीन बंद किया जाना। उचित होगा ऐसे में उत्तर प्रदेश में को लो डिमांड कहकर मशीनों को बंद किया जाना कंस्यूमर राइट रूल 2020 का खुला उल्लंघन है।उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा वर्तमान में 24 घंटे बिजली तत्काल उपभोक्ताओं को मिल सकती है केवल लो डिमांड में जो मशीन बंद है उन्हें चालू कर दिया जाए। पावर कारपोरेशन को याद ही होगा कि लोकसभा चुनाव में भी उपभोक्ताओं को 24 घंटे बिजली आराम से मिली थी।
निजीकरण की प्रक्रिया पर संघर्ष समिति ने उठाये सवाल,सरकार का निजी घरानों को आर्थिक सहयोग,जनता पर बोझ
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की सारी प्रक्रिया पर सवाल उठाया है। संघर्ष समिति ने कहा है कि स्टैण्डर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट के अनुसार निजीकरण के बाद भी सरकार निजी घरानों को आर्थिक सहयोग देती रहेगी तो निजीकरण से क्या लाभ होने जा रहा है ? संघर्ष समिति ने एक बार पुनः प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की है कि तमाम घोटालों से भरे निजीकरण की सारी प्रक्रिया बहुत ही संदेहास्पद है। अतः वे प्रभावी हस्तक्षेप कर निजीकरण को निरस्त करने की कृपा करें।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां बताया कि भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय द्वारा सितंबर 2020 में जारी ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट की धारा 2.2 (बी) में लिखा है कि जिस विद्युत वितरण निगम का निजीकरण किया जा रहा है अगर वहां औसत बिजली विक्रय मूल्य और औसत राजस्व वसूली में अधिक अन्तर है तो निजीकरण के बाद सरकार निजी विद्युत कम्पनी को सब्सिडाइज्ड रेट पर बिजली आपूर्ति तब तक सुनिश्चित करेगी जब तक निजी कम्पनी मुनाफे में नहीं आ जाती।संघर्ष समिति ने कहा कि बिडिंग डॉक्यूमेंट की उक्त धारा के अनुसार सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि निजी कम्पनी को सब्सिडाइज्ड रेट पर सरकार कितने वर्ष बिजली आपूर्ति कराएगी और इस हेतु सरकार को कितने अरब रुपए की धनराशि खर्च करनी पड़ेगी।संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश के सरकारी विद्युत वितरण निगमों के घाटे का सबसे बड़ा कारण बहुत महंगी दरों पर निजी विद्युत उत्पादन घरों से बिजली खरीद के करार है। ऐसे बिजली क्रय करार भी हैं जिनसे बिना बिजली खरीदे प्रति वर्ष 6761 करोड रुपए फिक्स चार्ज देना पड़ रहा है। संघर्ष समिति ने कहा कि निजीकरण के ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट के अनुसार सरकार निजीकरण के बाद निजी घरानों को महंगे पावर परचेज एग्रीमेंट के एवज में सब्सिडाइज्ड बल्क पावर सप्लाई करेगी और इसका खर्चा सरकार उठायेगी। संघर्ष समिति ने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि सब्सिडाइज्ड बल्क सप्लाई का प्रतिवर्ष कितना खर्चा आएगा और यह कितने वर्ष तक जारी रखा जाएगा।संघर्ष समिति ने कहा कि इसके अलावा स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट की धारा 1.1 (ई) के अनुसार निजी कंपनियों को क्लीन बैलेंस शीट दी जाएगी और घाटे तथा देनदारियों का सारा उत्तरदायित्व भी सरकार का होगा ।
कल्याणपुर में रामलीला 27 सितम्बर से प्रारम्भ होगी
श्री रामलीला समिति कल्याणपुर लखनऊ द्वारा विगत 23 वर्शाे की भॉति आम सभा की बैठक में निर्णय लिया गया है कि श्री रामलीला मंचन की
परम्पराओं को बनाये रखते हुए छः दिवसीय श्री रामलीला महोत्सव 2025 का आयोजन 27 सितम्बर 2025 से 02 अक्टूबर 2025 तक सायं 7ः00 बजे से किजा जा रहा है। एक अगस्त 2025 से रामलीला का पूर्वाभ्यास प्रारम्भ हो गया था।रामलीला चौपाई, छन्द, दोहा व राधेश्याम रामायण की गायन शैली पर है, इसमें श्री रामचरितमानस की चौपाइयों व राग रागिनियों का गायन अभिनय करने वाले कलाकारों द्वारा स्वयं किया जाता है। इस वर्ष की रामलीला के आयोजन हेतु कलाकरों का चयन कर लिया गया है। श्री रामलीला समिति कल्याणपुर लखनऊ के महामंत्री मुकेश चन्द्र जोशी ने बताया कि कोविड काल में भी रामलीला आयोजन की परम्परा को बनाये रखते हुए समिति द्वारा 2020 में एक दिवसीय तथा 2021 में दो दिवसीय रामलीला का आयोजन किया गया था। समिति द्वारा विगत 23 वर्षाे से रामलीला कराने के पश्चात् अवशेष धनराशि से राम भवन में राम दरबार की स्थापना तथा श्री रामजानकी भवन की भी स्थापना की गयी है तथा भविष्य मंे शिवालय बनाया जाएगा। प्रत्येक मंगलवार को सुन्दरकाण्ड पाठ का आयोजन पंडित भुवन चन्द्र जोशी तथा समिति के पदाधिकारियों द्वारा किया जाता है।
इप्सेफ प्रतिनिधिमंडल कैबिनेट सचिव टी वी सोमनाथम से मिला
भारत सरकार के कैबिनेट सचिव टी वी सोमनाथम से इप्सेफ के सात सदस्यीय प्रतिनिधि मण्डल ने राष्टपति भवन में मुलाकात करते हुए
कर्मचारियों की समस्याओं से अवगत कराय। इप्सेफ के प्रतिनिधिमंडल में वी पी मिश्रा राष्ट्रीय अध्यक्ष एस बी सिंह वरिष्ठ उपाध्यक्ष ,एम पी द्विवेदी अध्यक्ष मध्य प्रदेश कर्मचारी अधिकारी शिक्षक मोर्चा ,अतुल मिश्रा उप महासचिव इप्सेफ ,सतीश कुमार पांडेय संयोजक कर्मचारी शिक्षक संयुक्त मोर्चा उत्तर प्रदेश ,गिरीश चन्द्र मिश्रा वरिष्ठ उपाध्यक्ष राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तर प्रदेश ,शाह फैजल अध्यक्ष शिक्षक कर्मचारी संयुक्त मोर्चा जम्मू कश्मीर एवं अनिकेत द्विवेदी उपस्थित रहे। मांग पर चर्चा करते हुए कैबिनेट सचिव ने बताया कि भारत सरकार का इप्सेफ की मांगों पर सकारात्मक दृष्टिकोण है। कुछ महत्वपूर्ण मांगों पर बहुत जल्द ही सकारात्मक निर्णय कर दिया जाएगा।उन्होंने प्रतिनिधि मण्डल को बताया कि आठवीं वेतन आयोग की संस्तुतियां 1 जनवरी 2026 से लागू कर दी जाएगी। आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्तियां जल्द ही हो जाएगी। सभी कर्मचारियों को ओ पी एस पेंशन की सभी सुविधाएं प्रदान कर दी जाएगी ,वित्त विभाग प्रभावी कार्यवाही कर रहा है। 50 प्रतिशत डी ए मर्जर के संबंध में कैबिनेट सचिव ने सैद्धांतिक सहमति व्यक्त की और आश्वस्त किया कि इस पर भी जल्द ही निर्णय कर दिया जाएगा। आउटसोर्स,संविदा,ठेका एवं केंद्र सरकार द्वारा संचालित परियोजनाओं के कर्मचारियों के बारे में उन्होंने कहा कि ऐसे कर्मचारियों के साथ नाइंसाफी हो रही है उनकी सेवा सुरक्षा ,न्यूनतम वेतन ,विनियमिति करण ,एजेंसी से मुक्ति पर वे सहमत हैं। उन्होंने कहा कि वह मिलने वाले पारिश्रमिक से वे अपना पेट नहीं भर सकते हैं। उनका परिवार बच्चों की शिक्षा दीक्षा भोजन ,पहनने के लिए कपड़े एवं अन्य खर्च कैसे पूरा कर सकेंगे। उन्होंने आश्वासन दिया कि उनकी समस्या दूर करने के बारे में प्रभावी कार्यवाही करके उन्हें न्याय मिलेगा।कैबिनेट सचिव ने कहा कि कर्मचारियों की समस्याओं के प्रति उनका हमेशा सकारात्मक दृष्टिकोण रहा है। वे उन्हें अपने परिवार का अंग मानते हैं।इप्सेफ के पदाधिकारी ने उन्हें धन्यवाद ज्ञापित किया।
जवाहर भवन महासंघ में एकजुट हुए पेंशनर्स
उत्तर प्रदेश पेंशनर्स कल्याण संस्था जनपद लखनऊ की बैठक आज जवाहर भवन इंदिरा भवन कर्मचारी महासंघ कार्यालय में संपन्न हुई। इस
बैठक में दर्जन भर से अधिक वक्ताओं ने पेंशनर्स की समस्याओं पर विचार किया। अधिकत्तर पेंशनर्स ने इस दौरान गांधी वादी तरीके से आन्दोलन पर जोर दिया।बैठक की अध्यक्षता लखनऊ जनपद के अध्यक्ष रमेश श्रीवास्तव द्वारा तथा संचालन जिला मंत्री हरिशंकर श्रीवास्तव द्वारा किया गया। बैठक में उत्तर प्रदेश पेंशनर्स कल्याण संस्था के प्रांतीय कार्यकारी अध्यक्ष आनंद प्रकाश श्रीवास्तव, उपाध्यक्ष गोपी कृष्ण श्रीवास्तव तथा महामंत्री ओंकार नाथ तिवारी भी शामिल हुए। जिला मंत्री द्वारा संस्था के कार्यों पर प्रकाश डालते हुए पेंशनर्स की एकजुटता पर बल दिया गया। काफी संख्या में उपस्थित पेंशनरों ने प्रमुख रूप से राशि कारण की कटौती अवधि कम किए जाने, 65, 70 व 75 वर्ष की आयु पर 5 प्रतिशत अतिरिक्त पेंशन दिए जाने, कोरोना काल में रोके गए 18 माह के अवशेष महंगाई भत्ते,महंगाई राहत को अवमुक्त किए जाने, पेंशनरों एवं वरिष्ठ नागरिकों को पूर्व में प्रदत्त रेलवे कंसेशन की सुविधा बहाल किए जाने तथा राज्य परिवहन की बसों के किराए में छूट प्रदान किए जाने संबंधी मांगों को उठाया गया। बैठक में बृजेश कुमार त्रिवेदी अश्वनी कुमार उपाध्याय, कल्पना पाठक, अतुल चौधरी, होशियार सिंह, अशोक कुमार मिश्रा, नीलेश श्रीवास्तव, ए के सक्सेना, सुरेंद्र कुमार श्रीवास्तव कार्यवाहक अध्यक्ष राज्य कर्मचारी महासंघ, एनके तिवारी, रामजी श्रीवास्तव, डा चांदनी बाला, रमाशंकर सिंह आदि ने अपने विचार व्यक्त किये।
शंकरपुरवा को सीवर और पेयजल की समस्या से मिलेगी राहत
लखनऊ पूर्वी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत शंकरपुरवा वार्ड-2 में आज विधायक ओ.पी. श्रीवास्तव की पहल पर राम धर्म कांटा पर जनसुनवाई एवं स्थलीय निरीक्षण का आयोजन किया गया। इस दौरान क्षेत्रवासियों ने पानी एवं सीवर संबंधी वर्षों से चली आ रही समस्याओं को प्रमुखता से रखा।विधायक ने जलभराव और सीवर से जूझ रही जनता की समस्याओं को गंभीरता से सुना और तत्काल समाधान हेतु जलकल विभाग के महाप्रबंधक कुलदीप सिंह, अधिशासी अभियंता अनिल तथा सुएज कंपनी के अधिकारियों को मौके पर ही आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सीवर लाइन से संबंधित गंभीर समस्याओं के निवारण हेतु दीर्घकालिक योजना बनाई जाएगी और इसके लिए जल निगम, नगर निगम तथा जलकल विभाग संयुक्त निरीक्षण कर समन्वय के साथ ठोस कार्ययोजना तैयार करेंगे ताकि जनता को स्थाई राहत मिल सके।जनता की मांग पर विधायक श्रीवास्तव स्वयं मौके पर पहुँचे और समस्याओं को प्रत्यक्ष देखा। निरीक्षण के समय विभागीय अधिकारी भी साथ उपस्थित रहे।इस जनसुनवाई में क्षेत्र के प्रबुद्धजन एवं नागरिक रामदयाल, आर.के. भदौरिया, सुदामा, अमित श्रीवास्तव, अरुण कुमार गुप्ता, गिरीश तिवारी, महेंद्र निगम, नागेंद्र प्रताप सिंह, हर्षित, बृजेश अवस्थी, डॉ. ज्ञानेश्वर सिंह तथा ओरी लाल ने अपनी समस्याएँ रखीं।इस अवसर पर मंडल अध्यक्ष रेंद्र देवड़ी,, पार्षद प्रतिनिधि दीपक तिवारी सहित मंडल के वरिष्ठ पदाधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी मौजूद रहे।
