LUCKNOW:तीसरा स्थान पाने वाले नगर निगम को विधायक ने दिखाया आइना,क्लिक करें और भी खबरें

  • REPORT BY:AAJ NATIONAL NEWS || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK 

लखनऊ। जी हॉ नगर निगम को अभी कुछ दिनों पहले ही देश में तीसरा स्थान अवार्ड से सम्मानित किया गया था। इसके बाद नगर निगम ने इस अर्वाड का जमकर ढ़िढोरा पीटा था। यही नही इस अर्वाड के मिलने के बाद देश के अन्य राज्य नही बल्कि विदेश तक से अधिकारियों ने आकार राजधानी के अधिकारियों से स्वच्छता, सीवर, कचरा निस्तारण की बरीकियों का लाभ लिया। अब इन भारी भरकम उपलब्धियों के बीच सत्तारूढ़ दल के तेजतरार्ट विधायक पूर्व पुलिस अधिकारी डा.ॅराजेश्वर सिंह ने एक पत्र भेज कर नगर निगम को आईना दिखा दिया है। यह सब एक दिन का हाल नही बल्कि लम्बे समय से विधायक को मिल रहे जनता के फीडबैंक एवं स्वंय के दौरों का अनुभव है। वैसे भी एक जनप्रतिनिधि का अपने मतदाता के प्रति यही कर्तव्य है। उन्होंने सीधे मुख्यमंत्री को सम्बोधित पत्र में केवल कमियॉ ही नही बताई बल्कि उनके निस्तारण के लिए भी कुछ सुझाव रखे है। यानि की क्षेत्रीय विधायक ने यह पत्र केवल शिकायत के लिहाज से नही लिखा। भले ही यह पहला ऐसा पत्र है जिसमें अपने क्षेत्र का मामला उठाने वाले वह पहले विधायक है। हालॉकि कामोबेश स्थिति प्रदेश के 95 प्रतिशत विधानसभा क्षेत्रों की यही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार डॉ. राजेश्वर सिंह विधायक 170- सरोजनी नगर, लखनऊ सदस्य, सार्वजनिक उपक्रम एवं निगम संयुक्त समिति सदस्य, पुलिस स्थायी समिति ने मुख्यमंत्री को सम्बोधित पत्र में लिखा है कि लखनऊ नगर निगम एवं नगर विकास विभाग की लापरवाही के कारण राजधानी के नागरिक इन दिनों भारी जलभराव, टूटी-फूटी सड़कों और जाम हुई नालियों से त्रस्त है। हाल की तेज बारिश ने एक बार फिर इन विभागों की अक्षमता को उजागर कर दिया है। हर वर्ष करोड़ों रुपये सड़क मरम्मत, नालियों की सफाई और ड्रेनेज सुधार के नाम पर खर्च होते हैं, किंतु जमीनी हकीकत यह है कि सामान्य वर्षा में ही कई क्षेत्रों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो जाते हैं। जनता को आवागमन में भारी कठिनाई, बीमारियों का खतरा और शहरी ढाँचे को गंभीर नुकसान झेलना पड़ रहा है। उन्होंने मुख्य समस्याओं से अवगत कराते हुए लिखा है कि अधिकांश नालियॉ जाम या अतिक्रमण से बाधित हैं। मानसून पूर्व नियमित सफाई नही हो रही है। सड़कों की खस्ताहाल है। जबकि हाल ही में बनी या मरम्मत की गई। सड़कों पर भी पहली बारिश में गड्ढे उभर आते है। जिससे कार्य कीगुणवत्ता पर सवाल उठते हैं। बार-बार जलभराव वाले क्षेत्र आलमबाग, राजाजीपुरम, चारबाग, इन्दिरानगर, गोमतीनगर विस्तार, हजरतगंज, सरोजनी नगर आदि में हर वर्ष जलभराव की गंभीर स्थिति बन जाती है। सवबसे बड़ी बॉत विधायक द्वारा यह रखी गई कि नगर निगम व नगर विकास विभाग के अभियंताओं अधिकारियों की कोई जिम्मेदारी तय नहीं होती। उन्होंने अपने सुझाव और आग्रह में कहा कि लखनऊ नगर निगम एवं नगर विकास विभाग की कार्यप्रणाली की तत्काल समीक्षा कराई जाए। एक उच्च स्तरीय मॉनिटरिंग समिति गठित की जाए, जो नालों की सफाई, सड़क मरम्मत व ड्रेनेज सुधार कार्य की गुणवत्ता और समय-सीमा पर निगरानी रखे। जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए तथा लापरवाही पर दंडात्मक कार्यवाही हो। लखनऊ के लिए दीर्घकालिक बाढ़ प्रबंधन योजना बने, जिसमें आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक, जीआईएस मैपिंग, और वर्षा – जल निकासी का वैज्ञानिक आकलन शामिल हो। समीक्षा समिति में स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञों (सिविल इंजीनियर, शहरी योजनाकार, जल प्रबंधन विशेषज्ञ) को भी शामिल किया जाए। उन्होंने लिखा कि लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी है और यहाँ की स्थिति पूरे राज्य की छवि का प्रतिनिधित्व करती है। हर वर्ष बारिश में जलमग्न सड़कें और परेशान जनता राजधानी की गरिमा को आघात पहुँचाती हैं। उन्होंने लिखा कि नगर निगम व नगर विकास विभाग की कार्यप्रणाली की शीघ्र समीक्षा कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएँ ।

कर्मचारी संघों की बैठक में निगम प्रशासन का आश्वासन

नगर निगम लखनऊ के कर्मचारियों की समस्याओं और मांगों के समाधान के लिए निगम प्रशासन सक्रिय नजर आ रहा है। नगर आयुक्त गौरव कुमार के निर्देश पर बुधवार को अपर नगर आयुक्त  नम्रता सिंह की अध्यक्षता में समिति कक्ष में नगर निगम से जुड़े तीन प्रमुख कर्मचारी संगठनों के साथ बैठक आयोजित की गई।इस बैठक में नगर निगम जलकल कर्मचारी संघ लखनऊ, नगर निगम कर्मचारी संघ लखनऊ तथा उत्तर प्रदेश नगर निगम कर्मचारी संघ के पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक में संगठनों के अध्यक्ष, महामंत्री और उपाध्यक्ष स्तर के पदाधिकारी मौजूद रहे।बैठक के दौरान कर्मचारी संगठनों द्वारा पूर्व में नगर निगम प्रशासन को सौंपे गए मांग पत्रों पर विस्तृत चर्चा हुई। इनमें कर्मचारियों के हितों से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे। संगठनों ने कर्मचारियों की सेवा शर्तों, सुविधाओं और कार्य-स्थितियों से जुड़ी विभिन्न मांगों को विस्तार से रखा।अपर नगर आयुक्त ने सभी संगठनों की बातों को ध्यानपूर्वक सुना और उनकी समस्याओं का सकारात्मक समाधान निकालने का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि नगर आयुक्त के निर्देशानुसार कर्मचारियों की जायज मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और जल्द से जल्द ठोस कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।नगर निगम प्रशासन का मानना है कि कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान से कार्यक्षमता और सेवा व्यवस्था में और अधिक सुधार आएगा। कर्मचारियों की भूमिका शहर की स्वच्छता, जलापूर्ति और अन्य सेवाओं में अहम है, ऐसे में उनकी समस्याओं का निराकरण प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।
बैठक में नगर निगम कर्मचारी संघ लखनऊ के अध्यक्ष आनंद वर्मा और महामंत्री शमील एख़लाक,मोहम्मद शोएब, हेमंत कुमार, श्रीमती रेखा यादव, शत्रुघ्न लाल बाल्मीकि, अर्जुन यादव, मनीष चंद्रपाल शामिल हुए उनके अनुसार ने भाग लिया, नगर निगम प्रशासन से कर्मचारियों के लम्बित 30 सूत्रीय माँग-पत्र पर चर्चा कर विभिन्न बिंदुओं पर सहमति बनी। उत्तर प्रदेश नगर निगम कर्मचारी संघ लखनऊ के अध्यक्ष राजेश सिंह, उपाध्यक्ष दीपक शर्मा, महामंत्री रमेश चौरसिया,मंत्री राजीव रतन राय, हिमांशु सावंत,अमित शुक्ला, मोहम्मद रेहान संगठन मंत्री, राजीव जैन कोषाध्यक्ष ,एवं राजीव कुमार ,सर्वेश पाल, संतोष कुमार दुबे ने 16 सूत्रीय मांगें नगर निगम प्रशासन के समक्ष रखी।नगर निगम एवं जलकल कर्मचारी संघ की लम्बित 17 सूत्रीय मांगो पर नगर निगम प्रशासन की अध्यक्ष्ता मे हुई बैठक मे महत्वपूर्ण विषयो,मांगो पर समयबद्ध निर्णय लिये जाने का अश्वासन दिया गया।संघ के शशि कुमार मिश्र, आर.पी. सिंह, आनन्द मिश्रा अध्यक्ष, कैसर रजा महामंत्री, सतीश कुमार सिंह, हरिशंकर पांडये, चन्द्रमोहन, श्रीमती विभा यादव उपाध्यक्ष, कुंवर जय सिंह, संतोश श्रीवास्तव, संजय चन्द्रा, कुलदीप चौधरी, अम्बरीश अवस्थी, आयुष पंत आदि प्रतिनिधि उपस्थित हुए। बैठक के अंत में यह आश्वासन दिया गया कि तीनों संगठनों के मांग पत्रों का परीक्षण कर जल्द ही ठोस निर्णय लिया जाएगा। साथ ही, भविष्य में भी ऐसे संवाद जारी रखने पर सहमति बनी, ताकि प्रशासन और कर्मचारी संगठन मिलकर शहर के विकास और नागरिकों को बेहतर सेवाएँ उपलब्ध कराने में सहयोग कर सकें।

एसोसिएयशन को 1.30 करोड़ चंदे की भरपाई कौन करेंगा: संघर्ष समिति

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने आज खुलासा किया कि विगत 03 जून 2025 को उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन और उप्र के पांचो विद्युत वितरण निगमों ने ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन को एक करोड़ 30 लाख 80 हजार रुपए का भुगतान किया है। संघर्ष समिति ने सवाल किया है कि एक ओर पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन घाटे के नाम पर विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण की दलील दे रहा है और दूसरी ओर एक निजी संस्था ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन को करोड़ों रुपए का चंदा दे रहा है , यह बहुत गम्भीर मामला है।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के गठन से लेकर उप्र पॉवर कॉरपोरेशन और विद्युत वितरण निगमों द्वारा डिस्कॉम एसोशिएशन को चंदा देने के मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाय। साथ ही हितों के टकराव को देखते हुए उप्र पॉवर कॉरपोरेशन के चेयरमैन डॉ आशीष गोयल को निर्देश दिया जाय कि वे या ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के महामंत्री का पद छोड़ दें या पॉवर कॉरपोरेशन के चेयरमैन के पद से उन्हें हटा दिया जाय। संघर्ष समिति ने कहा कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन का गठन और चंदे की ऊपर से दिखाई दे रही रकम ष्टिप ऑफ द आईस बर्गष् है। संघर्ष समिति ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के पीछे मेगा घोटाला है। संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश के ऊर्जा निगमों को बहुत बड़े घोटाले से बचाने के लिए पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय तत्काल निरस्त किया जाय।संघर्ष समिति ने यह आरोप पुनः लगाया है कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन विद्युत वितरण निगमों में समानांतर प्रशासनिक व्यवस्था का संचालन कर रही है और विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण में पूरी मदद कर रही है।संघर्ष समिति ने कहा कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के गठन के पीछे देश के बड़े कॉर्पाेरेट घरानों का हाथ है और इस एसोसिएशन का गठन विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण हेतु किया गया है। आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के कोषाध्यक्ष पद पर इसीलिए निजी क्षेत्र के प्रतिनिधि को नियुक्त किया गया है। इस एसोसिएशन में निजी क्षेत्र की कई विद्युत वितरण कंपनियां सम्मिलित हैं और उप्र सहित अन्य प्रांतों में निजीकरण हेतु दस्तावेज तैयार कराने में उनकी अहम भूमिका है। संघर्ष समिति ने बताया कि उप्र पॉवर कॉरपोरेशन ने आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की सदस्यता लेने के लिये 10 लाख रुपए और 01.80 लाख रुपए जी एस टी मिलाकर 11.80 लाख रुपए का भुगतान किया है। इसके अतिरिक्त इनीशियल कॉन्ट्रिब्यूशन के रूप में 10 लाख रुपए का अलग भुगतान किया है। इस प्रकार उप्र पॉवर कॉरपोरेशन ने आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन को कुल 21.80 लाख रुपए का भुगतान विगत 03 जून, 2025 को किया। उप्र पॉवर कॉरपोरेशन के निर्देश पर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम, दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम, पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम, मध्यांचल विद्युत वितरण निगम और केस्को ने इसी प्रकार ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन को अलग-अलग 21 लाख 80 हजार रुपए का भुगतान 03 जून 2025 को किया है। इस प्रकार उप्र पॉवर कारपोरेशन लिमिटेड और उप्र के विद्युत वितरण निगमों ने कुल मिलाकर एक करोड़ 30 लाख 80 हजार रुपए का भुगतान ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन को किया। संघर्ष समिति ने कहा है कि पावर कॉरपोरेशन यह बताये कि एक करोड़ तीस लाख अस्सी हजार रुपए के भुगतान हेतु पॉवर कारपोरेशन और विद्युत वितरण निगमों ने उप्र राज्य विद्युत नियामक आयोग से पूर्व अनुमति ली है या नहीं। और यदि अनुमति नहीं ली है तो इस चंदे की धनराशि को खर्च में जोड़कर उपभोक्ताओं पर भार डालने का आधार क्या है ? संघर्ष समिति ने कहा कि घाटे के नाम पर एक निजी संस्था को करोड़ों रुपए का चंदा देना और उसका बोझ आम उपभोक्ताओं पर डालना कितनी नैतिकता है ? संघर्ष समिति ने कहा कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के डायरेक्टर जनरल सेवानिवृत आईएएस अधिकारी आलोक कुमार के 01 अगस्त के पत्र से स्पष्ट है कि अब तक देश के 39 विद्युत वितरण निगम ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की सदस्यता ले चुके हैं। यदि सभी विद्युत वितरण निगमों ने न्यूनतम 21.80 लाख रुपए भी दिया हो तो अब तक ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन को चंदे के रूप में 08 करोड़ 50 लाख 20 हजार रुपए चंदे के रूप में मिल चुके हैं।

डिस्काम एसोसिएशन चंदे का मामला पहुंचा आयोग, जॉच की मांग

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने आज विद्युत नियामक आयोग में एक लोक महत्व प्रस्ताव दाखिल करते हुए एक बड़ा गंभीर मुद्दा उठा दिया इसके बाद बिजली कंपनियों में हड़कंप मच गया। उत्तर प्रदेश के 42 जनपदों के निजीकरण के साथ ही उत्तर प्रदेश के लखनऊ स्थित एक पांच सितारा होटल में ऑल इंडिया डिस्कोम एसोसिएशन का गठन किया गया था। जिसके महामंत्री डॉक्टर आशीष कुमार गोयल वर्तमान पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष है। उसके डायरेक्टर जनरल आलोक कुमार रिटायर्ड आईएएस पूर्व पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष वह केंद्रीय ऊर्जा सचिव रहे हैं। कुल मिलाकर एक निजी संस्था बनाई। इसमें 3 जून 2025 को पावर कॉरपोरेशन सहित पांचो वितरण कंपनियों ने इस संस्था को सदस्यता शुल्क व चंदे के नाम पर उपभोक्ताओं से वसूले गए राजस्व से सभी बिजली कंपनियों ने 21 लाख 80 हजार अलग-अलग भुगतान कर दिया। इस प्रकार पावर कॉरपोरेशन व सभी बिजली कंपनियों ने कुल 1 करोड़ 30 लाख 80 हजार रुपए का भुगतान कर दिया। अब सवाल यह उठना लाजिमी है कि किसी निजी संस्था को घाटे में चल रही बिजली कंपनियां इतना बड़ा भुगतान कैसे दे सकता है, क्या इसके लिए विद्युत नियामक आयोग की अनुमति गई थी।
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने विद्युत नियामक आयोग से गुहार लगाई कि यह कितना दुर्भाग्य की बात है कि पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष अपनी पावर का गलत इस्तेमाल करके एक निजी संस्था को इतनी बड़ी धनराशि दिला दी। जिसमें देश के निजी घराने सहित अन्य बिजली कंपनियां भी सदस्यता के रूप में करोड़ दे रही है। इस संस्था की कोई भी लीगल वैध्यता नहीं है। कैसे उसको सरकारी बिजली कंपनियां करोड़ो पैसा दे रही है। इसीलिए विगत दिनो उपभोक्ता परिषद ने इस पूरे मामले की सीबीआई से जांच करने की मांग उठाई थी। कोई भी व्यक्ति संस्था बनाने के लिए हमेशा स्वतंत्र है। लेकिन उसमें सरकारी बिजली कंपनियां चंदे के रूप में लाखों रुपया दे यह पूरी तरह असंवैधानिक है।उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने विद्युत नियामक आयोग को अवगत कराया कि निजीकरण की शुरुआत होने के बाद से ही प्रदेश की बिजली कंपनियों मे निजीकरण की कार्यवाही शुरू होते ही सभी बिजली कंपनियों में इस प्रकार का बंदरबांट का खेल चल रहा है कि जो बड़े घोटाले को जन्म दे रहा है इस मेघा घोटाले की जांच होना बहुत जरूरी है विद्युत नियामक आयोग पूरी तरह सुनिश्चित करें कि इस प्रकार के खर्च का कहीं भी भार प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं पर ना पड़ने पाए और इसके लिए जो भी जिम्मेदार है उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष का तत्काल स्पष्टीकरण लिया जाए कि उनके द्वारा अपने पद का दुरुपयोग किस पावर के तहत किया जा रहा है।

अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के राष्ट्रीय संगठन मंत्री बने ओ.पी. श्रीवास्तव

अखिल भारतीय कायस्थ महासभा ने लखनऊ पूर्वी विधानसभा के विधायक माननीय ओ.पी. श्रीवास्तव को राष्ट्रीय संगठन मंत्री (कार्यकाल 2024-2028) नियुक्त किया है। यह निर्णय महासभा की भोपाल में हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में लिया गया, जिसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष  जितेन्द्र नाथ सिंह, राष्ट्रीय कार्यवाहक अध्यक्ष विश्वास कैलाश सारंग (कैबिनेट मंत्री, मध्यप्रदेश) और राष्ट्रीय महामंत्री अजय श्रीवास्तव ‘नीलू’ की सहमति रही।नियुक्ति पत्र में उल्लेख किया गया कि विधायक श्रीवास्तव अपने अनुभव और संगठनात्मक क्षमता से महासभा के कार्यों को नई दिशा देंगे। उनसे अपेक्षा की गई है कि वे सदस्यता अभियान, परिचय सम्मेलन, सांस्कृतिक आयोजन और समाजहित के कार्यक्रमों में सक्रिय योगदान देंगे।नियुक्ति पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए विधायक श्रीवास्तव ने कहा कि “यह केवल एक पद नहीं, बल्कि समाज, संगठन और राष्ट्र सेवा का संकल्प है। मैं तन-मन-धन से निष्ठा और समर्पण भाव के साथ महासभा के प्रत्येक कार्य में अपनी पूरी भूमिका निभाऊँगा। महासभा द्वारा जताए गए विश्वास पर मैं सदैव खरा उतरने का प्रयास करूंगा।”इस नियुक्ति से कायस्थ समाज में उत्साह का माहौल है। प्रदेश, नगर एवं विभिन्न चित्रांश सभाओं के पदाधिकारियों ने विधायक श्रीवास्तव को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। बधाई देने वालों में कायस्थ समाज के प्रदेश अध्यक्ष शेखर कुमार, चित्रगुप्त परिवार, गोमती नगर के अध्यक्ष राजेश श्रीवास्तव, चित्रांश सभा, विक्रम नगर सूर्य नगर के अध्यक्ष मुनेन्द्र प्रसाद श्रीवास्तव, चित्रांश सभा, आरडीएसओ के महामंत्री श्री अवधेश श्रीवास्तव, चित्रगुप्त सभा, इन्दिरा नगर के महामंत्री शशिकांत श्रीवास्तव शामिल हैं।

Aaj National

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