- REPORT BY:AAJ NATIONAL NEWS || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK
लखनऊ। पावर कारपोरेशन द्वारा मीटर जमा न करने तथा रीडिंग हटाए जाने की खबर को भ्रामक बताये जाने पर परिषद ने समीक्षा बैठक में
उनके अभियंताओं द्वारा भेजी गई जानकारी साज्ञा करते हुए कहा कि समीक्षा बैठक में आई सूचना को ही पावरकारपोरेशन नकारा रहा है।
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा पावर कॉरपोरेशन खुद भ्रम पैदा कर रहा है। वह अपने द्वारा तैयार किए गए कागज का अवलोकन करें जो उपभोक्ता परिषद मीडिया को जारी कर रहा है। मीडिया खुद देख सकती है कि कौन भ्रम फैला रहा है। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन द्वारा आज एक बयान जारी करके 6 लाख 22 हज़ार पुराने मीटर ना जमा करने पर अपनी सफाई पेश करते हुए कहा गया है कि पुराने मीटर में दर्ज रीडिंग गायब होने के बारे में भ्रम पैदा किया जा रहा है। इसका जबाब देते हुए परिषद के अष्यक्ष ने बताया कि पावर कॉरपोरेशन खुद कल अपने अध्यक्ष की समीक्षा बैठक के लिए जो बुकलेट जारी की है उसमें ही बताया है कि 29 अगस्त 2025 तक 6 लाख 22 हजार पुराने मीटर नहीं जमा हुए। जहां तक सवाल है कि पुराने मीटरों में दर्ज रीडिंग गायब होने का तो उसे पर उपभोक्ता परिषद बताना चाहता है कि गोंडा में मुख्य अभियंता व मीटर कंपनी के साथ साझा बैठक में जो कार्य वृत्त जारी किया गया है उसमें खुद देखा जा सकता है कि लिखा गया है कि मीटर रीडिंग शून्य भरी जा रही है और 80 प्रतिशत मीटर में कबर सेलिंग सब टूटी हुई है। कई मीटर की डिस्प्ले यूनिट को लेजर या अन्य माध्यम से क्षतिग्रस्त किया गया है। इस कार्यवाही से विभाग के काफी राजस्व हानि की आशंका है। यह बिजली विभाग खुद कह रहा है। उपभोक्ता परिषद के अनुसार पावर कारपोरेशन ने जो लंबी चौड़ी सफाई पेश की है वह किसके तरफ से सफाई दी गई है उसमें यह भी नहीं लिखा गया है। जो अपने आप में सवाल पैदा कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि पावर कारपोरेशन ने 2 लाख चेक मीटर यदि लगा दिए हैं तो सभी मीटरों का मिलन उन्हें प्रदेश की जनता के सामने लाना चाहिए। जबकि भारत सरकार ने चेक मीटर के मिलान की पूरी रिपोर्ट प्रत्येक माह भेजने का निर्देश दिया था केवल एक दो मीटर का मिलन जारी करने से सत्यता नहीं सामने आएगी।
संघर्ष समिति ने निजीकरण पर उठाए पांच सवाल
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के मामले में पावर कार्पाेरेशन प्रबंधन की निजी घरानों से
मिली भगत और बड़े घोटाले की आशंका को देखते हुए विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से निजीकरण के सारे प्रकरण में सीबीआई जांच की मांग करते हुए निजीकरण का निर्णय तत्काल निरस्त किये जाने की मांग की है। यही नही निजीकरण को लेकर एक बार फिर संघर्ष समिति ने पॉच सवाल उठाए है।संघर्ष समिति के पदाधिकारियों संजय सिंह चौहान, जितेन्द्र सिंह गुर्जर, गिरीश पांडेय, महेन्द्र राय, पी.के.दीक्षित, सुहैल आबिद,आदि ने बताया कि निजीकरण के मामले में प्रारंभ में ही जिस प्रकार अवैध ढंग से ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति की गई उससे बड़े घोटाले की आशंका बलवती हो गई थी। इसे देखते हुए संघर्ष समिति ने प्रारंभिक तौर पर ही निजीकरण के सारे मामले में बड़े भ्रष्टाचार की आशंका जताई थी। समिति ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ने वाली सबसे बड़ी संस्था ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडिया से भी इस बाबत विचार विमर्श किया। विस्तृत विचार विमर्श के बाद ऐसे तथ्य सामने आए हैं जिससे ऐसा लगता है कि निजीकरण के मामले में बहुत बड़ा घोटाला और भ्रष्टाचार होने जा रहा है।संघर्ष समिति ने आज ऐसे पांच बिंदुओं को सार्वजनिक करते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि उत्तर प्रदेश सरकार की भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति को देखते हुए निजीकरण के सारे मामले की तत्काल सीबीआई जांच कराई जाए।
संघर्ष समिति ने कहा कि पहला बिंदु विगत नवंबर में लखनऊ में विद्युत वितरण निगमों की मीटिंग है जिसमें निजी घरानों ने बड़ी संख्या में भागीदारी की थी और कार्यक्रम को स्पॉन्सर भी किया था। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की पृष्ठभूमि यही तैयार की गई थी। इस मीटिंग में देश के इतिहास में पहली बार शीर्ष प्रबंधन द्वारा डिस्कॉम एसोशिएशन बनाई है। निजीकरण को अंजाम देने के दृष्टिकोण से पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल को इसी मीटिंग में डिस्कॉम एसोशिएशन का जनरल सेक्रेटरी बनाया गया।दूसरा बिन्दु ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति में हितों के टकराव को शिथिलता देना है। इसके साथ ही झूठा शपथ पत्र देने और अमेरिका में पेनल्टी लगने की बात स्वीकार कर लेने के बाद भी ग्रांट थॉर्टन को नहीं हटाया गया और इसी कंसल्टेंट से निजीकरण के डॉक्यूमेंट तैयार कराए गए। तीसरी बात बिडिंग हेतु ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 को आधार माना जा रहा है जो डॉक्यूमेंट आज तक पब्लिक डोमेन में ही नहीं है। इसके पूर्व सितंबर 2020 में ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट जारी किया गया था जिस पर ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन सहित कई संस्थानों की आपत्ति आई थी। इन आपत्तियों का आज तक निस्तारण नहीं किया गया है और गुपचुप ढंग से उत्तर प्रदेश में निजीकरण के पहले ड्राफ्ट बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 जारी कर दिया गया। ड्राफ्ट बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 को न पब्लिक डोमेन में रखा गया है न इस पर किसी कीआपत्ती मांग की गई है।
उत्तर प्रदेश में निजीकरण करने के लिए यह सब मिली भगत का बड़ा खेल है।चौथा बिंदु यह है कि निजीकरण के सारे प्रकरण में कॉर्पाेरेट घरानों को विश्वास में लेकर काम किया जा रहा है। टाटा पावर के सीईओ प्रवीर सिन्हा ने हाल ही में तीसरी बार बयान देकर इस बात की पुष्टि की है जिसमें उन्होंने कहा है कि उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के डॉक्यूमेंट उनसे चर्चा करके बनाया गए हैं।पांचवा बिंदु यह है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम को कौड़ियों के मोल पूर्व निर्धारित निजी घरानों को बेचने के लिए इक्विटी के आधार पर बेचने की कोशिश की जा रही है। इक्विटी को लॉन्ग टर्म लोन में कन्वर्ट किए जाने के बाद 42 जनपदों की बिजली व्यवस्था मनचाहे कॉर्पाेरेट घरानों को कौड़ियों के दाम मिल जाएगी।
निजीकरण की जगह लगभग 4500 करोड़ की बिजली चोरी पर लगाए अंकुश
उपभोक्ता परिषद ने एक बार पावर कारपोरेशन को गेयर में लिया है। उन्होंने कहा कि जनहित और सरकार हित को देखते हुए पावर
कारपोरेशन को निजीकरण की जगह 4500 करोड़ की बिजली चोरी रोकने पर काम करना चाहिए। झुठे ऑकड़ों आधार पर खेला जा रहा यह निजीकरण का खेल उपभोक्ता परिषद उन्हें खेलने नही देगा। उपभोक्ता परिषद के अनुसार प्रदेश के सभी लगभग 3 करोड़ 61 लाख विद्युत उपभोक्ताओं के लिए वर्ष 2025 -26 में 1 लाख 64593 मिलियन यूनिट बिजली खरीद प्रस्तावित है जिसका मूल्य 86992 करोड़ पूरे वर्ष के लिए आकलित किया गया है। जिसमें निजी घराने की कुल बिजली खरीद का 35121 करोड़ बात करें तो जो कुल राजस्व इस बिजली को बेचने से लगभग 75709 करोड़ प्राप्त होगा। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जो राजस्व सब्सिडी वर्ष 2025-26 के लिए 17512 करोड़ है। कुल बिजली खरीद की औसत लागत 5.28 प्रति यूनिट आ रही।
उपभोक्ता परिषद के अनुसार उत्तर प्रदेश में बिजली खरीद में पारदर्शी नीति अपनाकर सस्ती बिजली के उपाय पर बिजली कंपनियों को कम करने की जरूरत हैै। जिससे उत्तर प्रदेश में लगभग 3000 करोड़ की महंगी बिजली खरीद से निजात मिल सकती है। लेकिन उसके लिए कुछ कठोर निर्णय लेने पड़ेंगे। इसी प्रकार उत्तर प्रदेश में वितरण हानियों को यदि 13 प्रतिशत मान ले तो उसमें लगभग 5 प्रतिशत बिजली चोरी है। ऐसे में लगभग 8000 मिलियन यूनिट बिजली प्रत्येक साल बर्बाद होती है। साल भर में लगभग 4500 करोड़ की बिजली चोरी होती है। ऐसे में बिजली चोरी पर अंकुश लगाकर भी काफी हद तक हम अपने घाटे को कम कर सकते हैं। ऐसे में यह बात तो तय हो गई है कि महंगी बिजली खरीद और बिजली चोरी पर प्रभावी नीति बनाकर उत्तर प्रदेश में निजीकरण को डाला जा सकता है। उत्तर प्रदेश राज विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार व बिजली कंपनियों के प्रबंधन को प्रभावित तरीके से बिजली चोरी पर अंकुश लगाने और महंगी बिजली खरीद से निजात पाने की दिशा में सार्थक प्रयास करने की आवश्यकता है। निश्चित तौर पर इससे हम बिजली कंपनियों की सेहत में सुधार ला सकते हैं और कहीं ना कहीं हमें निजीकरण की जरूरत नहीं पड़ेगी। उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा एक दूसरी समस्या सत प्रतिशत राजस्व की वसूली है से संबंधित है उसके लिए भी हमें एक ठोस कार्य योजना बनाकर परफॉर्मेंस बेस व्यवस्था लागू करना चाहिए। परफॉर्मेंस हुआ, राजस्व वसूली बिजली चोरी पर अंकुश लगाने पर सार्थक परिणाम देने वालों को ही हमें बिजली क्षेत्र में उच्च पदों पर पदोन्नति करने के लिए विचार करना चाहिए। ऐसा नहीं है कि बिजली क्षेत्र में रिज़ल्ट देने वाले अभियंताओं की कमी है। बस सवाल यह कि उन्हें उचित मौका नहीं मिल पा रहा है। वर्तमान में स्मार्ट प्रीपेड मीटर में किस प्रकार निजी घराने खेल कर रहे हैं किसी से छुपा नहीं है।
नगर निगम सदन की सामान्य बैठक आज
नगर निगम लखनऊ की सामान्य बैठक 4 सितम्बर 2025 को नगर निगम मुख्यालय, लालबाग स्थित त्रिलोक नाथ हाल में आयोजित की जाएगी। बैठक पूर्वान्ह 11 बजे से प्रारम्भ होगी।महापौर सुषमा खर्कवाल के नेतृत्व में होने वाली इस सदन की बैठक में शहर के विकास और नागरिक सुविधाओं से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। विशेष रूप से सफाई व्यवस्था, पेयजल आपूर्ति, प्रकाश व्यवस्था, कर वसूली, अवैध अतिक्रमण हटाने और आगामी त्योहारों की तैयारियों पर विचार किया जाएगा।बैठक में सभी पार्षदों और विभागाध्यक्षों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी ताकि वार्ड स्तर की समस्याओं और सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जा सके।
कई ठेले-दुकानें हटाई गईं, जुर्माना वसूला
नगर निगम लखनऊ ने शहर में लगातार बढ़ते अवैध अतिक्रमण और यातायात अवरोधों को गंभीरता से लेते हुए बुधवार को एक सघन और
बहुस्तरीय अभियान चलाया। यह कार्रवाई माननीय महापौर सुषमा खर्कवाल के निर्देश और नगर आयुक्त गौरव कुमार के आदेश पर की गई। अभियान का मुख्य उद्देश्य प्रमुख सड़कों, सार्वजनिक स्थलों और फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त कर नागरिकों को सुगम और सुरक्षित यातायात उपलब्ध कराना है।
जोन-1 क्षेत्र में नरही तिकोनिया पार्क की बाउंड्री के किनारे किए गए अवैध कच्चे और पक्के निर्माण को हटाया गया। साथ ही चारों तरफ स्थायी और अस्थायी अतिक्रमण को भी हटाया गया। अभियान के दौरान 15 स्थानों पर नालियों के ऊपर किए गए पक्के निर्माण को चिन्हांकित कर हटाने की कार्यवाही की तैयारी की गई। इसके अलावा कालीदास मार्ग से 1090 चौराहा तक चलाए गए अभियान में कई अस्थायी अतिक्रमण हटाए गए।अभियान के तहत विभिन्न जोनों में कार्रवाई की गई। जोन-2 में जोनल सेनेटरी अधिकारी श्री राम सकल यादव के नेतृत्व में वार्ड मोतीनगर, पान दरीबा और चारबाग क्षेत्रों में गंदगी, अतिक्रमण और प्रतिबंधित प्लास्टिक पर संयुक्त कार्रवाई की गई। इस दौरान गंदगी व अतिक्रमण में 6 चालान कर 8,000 रुपये तथा प्रतिबंधित प्लास्टिक में 3 चालान कर 12,000 रुपये का जुर्माना वसूला गया।जोन-5 में कृष्णानगर मेट्रो स्टेशन से विजय नगर मोड़ होते हुए विशाल मेगा मार्ट तक अतिक्रमणकारियों पर बड़ी कार्रवाई की गई। इस दौरान 8 काउंटर, 4 गुमटी, 12 ठेले हटाए गए और 1 लकड़ी का तख्त जब्त किया गया। साथ ही अतिक्रमणकारियों को भविष्य में दोबारा कब्जा न करने की कड़ी चेतावनी दी गई। वहीं, जोन-6 में वार्ड चौक क्षेत्र में चौक चौराहे से कोनेश्वर चौराहे तक अतिक्रमण और पॉलीथिन विरोधी अभियान चलाया गया। इस दौरान 20 ठेले और 15 अस्थायी दुकानें हटाई गईं। साथ ही 1 लकड़ी की मेज, 2 लोहे की बेंच, 3 प्लास्टिक कुर्सियां, 3 छाते, 6 तराजू और 4 टायर जब्त किए गए। अतिक्रमणकारियों से 2,500 रुपये जुर्माना भी वसूला गया। भविष्य में दोबारा अतिक्रमण न हो, इसके लिए संबंधित थानाध्यक्ष को पत्र भेजा गया। नगर आयुक्त गौरव कुमार ने कहा कि शहर में अतिक्रमण और गंदगी फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी। फुटपाथ और सड़कों को अतिक्रमण मुक्त कर नागरिकों को सुगम यातायात उपलब्ध कराना निगम की प्राथमिकता है। साथ ही प्रतिबंधित प्लास्टिक के उपयोग पर भी कड़ी निगरानी रखी जाएगी।
पुरानी पेंशन के लिए शिक्षक कर्मचारियों का 5 को उपवास
एनएमओपीएस के बैनर तले पुरानी पेंशन बहाली के खिलाफ निरन्तर अभियान, आन्दोलन जारी है। अब 5 सितम्बर को बैनर के तले कर्मचारी
शिक्षक सामूहिक रूप से उपवास कर एक बार फिर सरकार का ध्यान आकृर्षित करेगें।एनएमओपीएस के आह्वान पर शिक्षक दिवस के अवसर पर पूरे देश का शिक्षक व कर्मचारी सरकार से पुरानी पेंशन की बहाली की मांग करेगा। एनएमओपीएसै के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने कहा कि पूरे देश का शिक्षक, 5सितंबर को पुरानी पेंशन की बहाली के लिए उपवास करेगा। सरकार से देश का शिक्षक व कर्मचारी लगातार पुरानी पेंशन बहाली की मांग कर रहा है। किंतु सरकार पुरानी पेंशन बहाल न कर यूपीएस का झुनझुना थमा दिया है। शिक्षकों को मजबूर होकर उपवास करना पड़ रहा है। इसलिए सरकार शिक्षक की बुढ़ापे की लाठी पुरानी पेंशन बहाल करे। राष्ट्रीय सचिव व प्रदेश महामंत्री डॉ नीरजपति त्रिपाठी ने कहा कि सरकार हठधर्मिता छोड़ एनपीएस और यूपीएस को समाप्त कर पुरानी पेंशन बहाल करे। उपवास के कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए पूरे देश में सभी से संवाद व बैठकों का सिलसिला लगातार जारी है। राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ राजेश कुमार ने कहा कि देश का अर्द्धसैनिक बल का जवान हो या फिर सफाई कर्मचारी या फिर अधिकारी, सभी चाहते हैं कि सरकार जल्द से जल्द पुरानी पेंशन बहाल करे क्योंकि अब से रिटायर होने वाले कर्मचारियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।
हर वार्डे में चलेगा निरीक्षण व सफाई अभियान
आगामी त्यौहारों की तैयारियों और लगातार हो रही बारिश से उत्पन्न चुनौतियों को देखते हुए नगर निगम लखनऊ ने विशेष रात्रि सफाई
अभियान जारी है। नगर आयुक्त गौरव कुमार के निर्देश पर 02 सितंबर से शुरू हुए इस अभियान का उद्देश्य शहर में स्वच्छता, मार्ग प्रकाश व्यवस्था, जलभराव की रोकथाम, क्षतिग्रस्त मैनहोल व लीकेज की मरम्मत और संचारी व वेक्टर जनित बीमारियों पर नियंत्रण करना है। नगर निगम प्रशासन ने बताया कि इस अभियान को चरणबद्ध तरीके से चलाया जाएगा। इसके लिए शहर के सभी 110 वार्डों को अलग-अलग दिन चिन्हित किया गया है और हर वार्ड में एक नोडल अधिकारी की तैनाती की गई है। मंगलवार से शुरू हुए इस अभियान को बुधवार को भी आगे बढ़ाया गया और देर रात तक नगर निगम अधिकारियों द्वारा विभिन्न जोनों में निरीक्षण कर आवश्यक कार्यवाही की गई।
जोन-1 में अपर नगर आयुक्त ललित कुमार के नेतृत्व में नगर अभियंता, जलकल विभाग के अधिशासी अभियंता, विद्युत यांत्रिक शाखा के अवर अभियंता, जोनल अधिकारी और सेनेटरी अधिकारी ने राम मोहन राय वार्ड का निरीक्षण किया। यहां नालियों की सफाई, मार्ग प्रकाश व्यवस्था और जलभराव को लेकर टीम ने समीक्षा की।जोन-2 में अपर नगर आयुक्त अरुण कुमार गुप्त ने मालवीय नगर वार्ड का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने नाइट स्वीपिंग और पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने के निर्देश दिए। जोन-6 में नगर स्वास्थ्य अधिकारी पी.के. श्रीवास्तव ने कल्याण सिंह वार्ड का निरीक्षण किया। वहीं मल्लाही टोला प्रथम वार्ड का निरीक्षण मुख्य अभियंता आरआर श्री मनोज प्रभात के नेतृत्व में किया गया। टीम ने बरसात के दौरान मच्छरों की रोकथाम के लिए फॉगिंग और एंटी-लार्वा छिड़काव बढ़ाने के निर्देश दिए। जोन-7 में मुख्य कर निर्धारण अधिकारी श्री विनय कुमार राय ने शहीद भगत सिंह प्रथम वार्ड का निरीक्षण किया। यहां अतिक्रमण और सड़क किनारे कचरे के ढेर हटाने पर बल दिया गया। जोन-8 में अपर नगर आयुक्त डॉ. अरविंद कुमार राव ने शारदा नगर द्वितीय वार्ड का निरीक्षण किया। सहायक नगर आयुक्त विनीत सिंह सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान सड़कों की सफाई, स्ट्रीट लाइट और पेयजल आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा की गई। नगर आयुक्त गौरव कुमार ने बताया कि यह रात्रि सफाई अभियान एक दिन का नहीं है बल्कि इसे नियमित रूप से सभी 110 वार्डों में चलाया जाएगा। हर वार्ड में नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी तय की गई है और संबंधित जोनल अधिकारियों को रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
