LUCKNOW:विकास का लक्ष्य पाने निजीकरण रोकना होगा: उपभोक्ता परिषद,क्लिक करें और भी खबरें

  • REPORT BY:AAJ NATIONAL NEWS || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK 

लखनऊ। प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा कल यह ऐलान किया गया है की उत्तर प्रदेश 2047 तक विकसित प्रदेश बनेगा इस अवसर पर एक समर्थ उत्तर प्रदेश पोर्टल का शुभारंभ किया गया है। उस पर प्रदेशवासियों से सुझाव मांगें जाने का निर्णय भी लिया गया है। उपभोक्ता परिषद ने कहा उत्तर प्रदेश निश्चित तौर पर 2047 तक विकसित भारत बनेगा लेकिन निजीकरण के आधार पर नहीं वर्तमान में उत्तर प्रदेश की जीएसडीपी( ग्रॉस स्टेट डोमेस्टिक प्रोडक्ट) पॉइंट 3 ट्रिलियन है जिसे 1 ट्रिलियन इकोनामी के स्तर पर ले जाना है। उत्तर प्रदेश की जो लगभग पॉइंट 3 ट्रिलियन डॉलर जीएसडीपी है उसमें बिजली क्षेत्र का लगभग 7 से 10 प्रतिशत योगदान है 1959 में राज्य विद्युत परिषद बना और तब से लगातार सरकारी क्षेत्र में काम कर रहा है। बाबा साहब ने 1934 में कहा था बिजली हमेशा सरकारी क्षेत्र में रहनी चाहिए यानी कि सार्वजनिक क्षेत्र में ही देश की उन्नति में अपना बड़ा योगदान देगी ऐसे में बाबा साहब के सपनों का भारत बनाने और 2047 तक विकसित प्रदेश तभी बन पाएगा जब निजीकरण के प्रस्ताव को उत्तर प्रदेश सरकार निरस्त करते हुए ऊर्जा क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सरकारी क्षेत्र में काम करेगी।

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा उत्तर प्रदेश में सभी बिजली कंपनियों का जो वार्षिक राजस्व आवश्यकता है वह लगभग 1 लाख व12865 करोड़ है। यह देश के कई छोटे राज्यों के बजट के बराबर है। ऐसे में प्रदेश के ऊर्जा सेक्टर को मुख्यमंत्री जी आप से यही मांग रहेगी कि मुख्यमंत्री ऊर्जा क्षेत्र को सरकारी क्षेत्र में ही आगे बढ़ाया जाए। जो लोग निजी क्षेत्र में प्रदेश की आधी बिजली व्यवस्था लगभग 42 जनपदों को देने की बात कर रहे हैं वह उत्तर प्रदेश के विकास से कोसों दूर का सपना देख रहे हैं। इसलिए अभी भी समय है प्रदेश को 2047 तक विकसित प्रदेश बनाने के लिए ऊर्जा क्षेत्र पर विशेष जोर देना पड़ेगा और वह तभी संभव है जब उत्तर प्रदेश सरकार सरकारी क्षेत्र में कार्य योजना बनाकर आगे बढ़ेगी। उपभोक्ता परिषद ने कहा जल्द ही उपभोक्ता परिषद इस पर एक व्यापक कार्य योजना बनाकर माननीय मुख्यमंत्री जी के ऐलान के क्रम में समर्थ उत्तर प्रदेश पोर्टल पर भेजेगा।

मुख्यमंत्री के विजन, बिजली निजीकरण निरस्त करने से होगा पूरा: संघर्ष समिति

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा जारी समर्थ उत्तर प्रदेश – विकसित उत्तर प्रदेश – 2047 विजन पोर्टल का स्वागत करते हुए कहा है कि विकसित उत्तर प्रदेश – 2047 के लिए बिजली के निजीकरण का निर्णय निरस्त कर बिजली को सार्वजनिक क्षेत्र में बनाए रखना बेहद जरूरी है। संघर्ष समिति विजन 2047 के पोर्टल पर शीघ्र ही अपना प्रस्ताव भेजेगी।

संघर्ष समिति ने कहा है कि निजीकरण के विरोध में अभियान और संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक निजीकरण का निर्णय वापस नहीं लिया जाता।विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा समर्थ उत्तर प्रदेश – विकसित उत्तर प्रदेश – 2047 का पोर्टल बनाकर उस पर आम नागरिकों का सुझाव मांगा जाना बेहद स्वागत योग्य कदम है। किसानों, गरीब और मध्यमवर्गीय उपभोक्ताओं तथा कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों को समाहित करते हुए संघर्ष समिति विजन 2047 के लिए अपना प्रस्ताव देगी। संघर्ष समिति ने कहा कि पांच ऐसे प्रमुख बिंदु है जिसके कारण विकसित उत्तर प्रदेश 2047 के लिए बिजली का सार्वजनिक क्षेत्र में बनाए रखना बेहद जरूरी है।

पहला बिन्दु – आम जनता के लिए बिजली उपभोग की ऐसी एकमात्र वस्तु है जो सबके लिए बराबर से आवश्यक है किन्तु बिजली की वास्तविक लागत को देखते हुए सब लोग इसका भुगतान करने में समर्थन नहीं है। यही कारण है कि किसानो, घरेलू उपभोक्ताओं, वाणिज्यिक और औद्योगिक क्षेत्र के लिए बिजली की अलग-अलग दरें निर्धारित की जाती है। किसानों, घरेलू उपभोक्ताओं खासकर गरीब और मध्यमवर्गीय उपभोक्ताओं को लागत से कम मूल्य पर बिजली दी जाती है। सार्वजनिक क्षेत्र में बिजली वितरण कंपनियां यह काम वर्षों से घाटा उठाकर करती रही है। निजीकरण होने के बाद कोई निजी कंपनी घाटा उठाकर बिजली नहीं देगी। सस्ती बिजली न मिलने पर कृषि क्षेत्र और गरीब उपभोक्ताओं पर सबसे बड़ा असर पड़ेगा जो विकसित उत्तर प्रदेश 2047 की राह में बाधक होगा। दूसरा बिन्दु – सरकारी क्षेत्र के बिजली उत्पादन घरों की बिजली सबसे सस्ती होती है। उत्तर प्रदेश में सरकारी क्षेत्र के बिजली उत्पादन घरों की बिजली का औसत मूल्य 04 रुपया 17 पैसे प्रति यूनिट है। निजी क्षेत्र से खरीदी जाने वाली बिजली 07 रुपए से 19 रुपए प्रति यूनिट तक की मिलती है। स्वाभाविक है बिजली के निजीकरण के बाद बिजली खरीद की लागत बढ़ेगी और निजी क्षेत्र की विद्युत वितरण कंपनियों के सामने महंगी बिजली बेचने का यह सबसे बड़ा बहाना होगा।

तीसरा बिन्दु – उत्तर प्रदेश में निजी बिजली उत्पादन घरों के साथ 25 -25 साल के बिजली क्रय करार हैं जिनमें से अधिकांश की दरें सरकारी क्षेत्र की तुलना में काफी अधिक हैं। बदलते समय में इसकी तुलना में भारत में काफी सस्ती सौर ऊर्जा उपलब्ध है। विकसित उत्तर प्रदेश 2047 के लिए जरूरी है कि निजी क्षेत्र के साथ चल रहे महंगी बिजली खरीद करारों को रद्द कर सौर ऊर्जा और अन्य साधनों से उपलब्ध हो रही सस्ती बिजली के करार किए जाएं। चौथा बिन्दु – सार्वजनिक क्षेत्र के लिए बिजली एक सेवा है जबकि निजी क्षेत्र के लिए बिजली एक व्यवसाय है। उदाहरण के तौर पर उत्तर प्रदेश में घरेलू बिजली की अधिकतम करें 06 रुपए 50 पैसे प्रति यूनिट है जबकि निजी क्षेत्र में मुंबई में घरेलू बिजली की दरें 16 रुपए 71 पैसे प्रति यूनिट है । निजीकरण होते ही उत्तर प्रदेश में भी बिजली के दाम आकाश छूने लगेंगे।साफ है कि विकसित उत्तर प्रदेश 2047 की राह में बिजली का निजीकरण होना सबसे बड़ा बाधक सिद्ध होगा। पांचवां बिन्दु – हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान और बाद में भी यह समाचार आए हैं कि जम्मू कश्मीर में साइबर सिक्योरिटी के खतरे के लिए बिजली का नेटवर्क एक बड़ा माध्यम था। ऐसे में बिजली केवल एक सेवा नहीं है बल्कि बिजली सार्वजनिक क्षेत्र में बनाए रखना इसलिए भी जरूरी है कि इससे साइबर सिक्योरिटी का खतरा न उत्पन्न होने पाये।

सदन में बवाल, महापौर नाराज

कूड़ा प्रबंधन की बदहाली पर पार्षदों ने गुरुवार को लखनऊ नगर निगम की सदन बैठक में जमकर हंगामा किया। सदन की बैठक की शुरुआत में ही तकरार होने लगी। इसके बाद पार्षदों का हंगामा इतना बढ़ गया कि मेयर सुषमा खर्कवाल सदन छोड़कर बाहर निकल गईं।

लखनऊ नगर निगम की सदन बैठक प्रारंभ होते ही भाजपा पार्षद मुकेश सिंह मोंटी समाजवादी पार्टी खेमे में बैठ गए। इससे पहले मोंटी ने भाजपा महानगर अध्यक्ष को अपना इस्तीफा भेजा था, लेकिन वह मंजूर नहीं किया गया। फिलहाल सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई है और मोंटी को महापौर ने अपने कक्ष में बुलाकर उन्हें काफी समझाया। सदन में पार्षद शैलेन्द्र वर्मा ने सदन में जोन-4 के जोनल अधिकारी और कर अधीक्षक अनुराग उपाध्याय पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने एक बड़े होटल के कमर्शियल टैक्स में करोड़ों का घोटाला किया है।शैलेन्द्र वर्मा के अनुसार होटल पर 37 करोड़ 89 लाख रुपये का टैक्स बनता था, लेकिन आरोप है कि इसे चार बार रिवाइज कर केवल 14 करोड़ रुपये तक घटा दिया गया। इसके अलावा उन्होंने गोमती नगर स्थित सम्मिट बिल्डिंग के कई लाइसेंसों को लेकर भी गंभीर अनियमितताओं की ओर ध्यान दिलाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए महापौर ने तत्काल जांच के आदेश जारी कर दिएं।बीजेपी पार्षद अरुण राय ने पर्यावरण अभियन्ता संजीव प्रधान को हटनें की मांग करते हुए कहा कि छोटे छोटे दुकानदारों से 50 ग्राम पन्नी जब्त कर 2 से 3 हजार जुर्माना करते है, आखिर जब्त पन्नी कहा रखते है उस जगह का नाम पता बताए, जो बड़े स्थर पर पन्नी बनाने वाली हैं आखिर फैक्ट्री पर कार्यवाई क्यों नही होती-मेयर ने कहा नगर आयुक्त जवाब दे लेकिन नगर आयुक्त को जब -जब पुकारा गया उन्होंने कभी चीफ को बोला या फिर पर्यावरण अभियन्ता को जबाब देने के लिए कहा था। नगर निगम की सामान्य बैठक अब मंगलवार 11 बजे फिर से होगा।

 

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