-अटेंडेंस लगाकर गायब मिले कर्मचारी, सीसीटीवी से होगी जांच,दो दिन में स्पष्टीकरण तलब किया
- REPORT BY:AAJ NATIONAL NEWS || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK
लखनऊ। नगर निगम मुख्यालय में गुरुवार सुबह 10.45 बजे लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल ने अचानक औचक निरीक्षण किया। सुबह
10.45 बजे मुख्यालय पहुंचीं महापौर ने जब कार्यालयों की हकीकत देखी तो कई अधिकारी एवं कर्मचारी अपनी सीट से नदारद मिले। इस स्थिति से नाराज होकर महापौर ने मुख्यालय के मुख्य दरवाजे पर ताला लगवा दिया और मौके पर मौजूद अटेंडेंस रजिस्टर जब्त कर लिया। इसके बाद उन्होंने पूरे नगर निगम मुख्यालय का गहन निरीक्षण किया।निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त गौरव कुमार अपने कार्यालय में मौजूद मिले। महापौर जब अपर नगर आयुक्तों के कार्यालयों में पहुंचीं तो वहां कोई अधिकारी मौजूद नहीं था। इस दौरान अपर नगर आयुक्त ललित कुमार, नम्रता सिंह, अरुण कुमार गुप्त एवं डॉ. अरविंद कुमार राव अपने कार्यालय में उपस्थित नहीं मिले। इतना ही नहीं, उप नगर आयुक्त रश्मि भारती का कार्यालय भी खाली मिला और समस्त सहायक नगर आयुक्त विकास सिंह, विनीत सिंह, रामेश्वर प्रसाद भी अपनी सीट पर अनुपस्थित पाए गए। चीफ इंजीनियर महेश वर्मा भी समय पर अपने कार्यालय में उपस्थित नहीं मिले।जबकि निरीक्षण में यह स्थिति भी सामने आई कि कुछ अधिकारी अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए अपने-अपने कार्यालय में मौजूद थे। इनमें मुख्य वित्त एवं लेखा अधिकारी महामिलिंद लाल, मुख्य कर निर्धारण अधिकारी अशोक सिंह और नगर स्वास्थ्य अधिकारी पी.के. श्रीवास्तव शामिल रहे। महापौर ने इन अधिकारियों की उपस्थिति पर संतोष जताया और कहा कि सभी कर्मचारियों को इन्हीं की तरह समय पर और जिम्मेदारी से कार्य करना चाहिए।
महापौर सुषमा खर्कवाल ने औचक निरीक्षण के बाद अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रति कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि नगर निगम लखनऊ शहर की जनता की सेवा करने और बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त रखने की जिम्मेदारी निभाता है। ऐसे में यदि अधिकारी और कर्मचारी समय पर कार्यालय नहीं पहुंचते और अपने कार्यों के प्रति लापरवाह रहते हैं तो इसका सीधा असर शहरवासियों को मिलने वाली सुविधाओं पर पड़ता है। यह किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।निरीक्षण के दौरान महापौर ने यह भी कहा कि नगर निगम मुख्यालय जनता की समस्याओं के निराकरण का प्रमुख केंद्र है। यहां यदि अधिकारी और कर्मचारी समय से मौजूद न रहें तो आम नागरिकों की शिकायतों और समस्याओं का समाधान प्रभावित होता है।
उन्होंने कहा कि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना उनका पहला लक्ष्य है।महापौर ने नगर आयुक्त को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि दो दिनों के भीतर सभी अनुपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा जाए और आगे की कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल मुख्यालय की कार्यशैली का नहीं बल्कि जनता की सुविधाओं से जुड़ा है, इसलिए इस लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा। महापौर ने यह भी घोषणा की कि इस पूरे मामले की शिकायत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से भी की जाएगी।महापौर ने यह भी संकेत दिया कि यदि इस तरह की लापरवाही आगे भी सामने आई तो नगर निगम मुख्यालय में उपस्थिति और कार्यप्रणाली को और अधिक सख्ती से नियंत्रित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि तकनीकी माध्यमों और निगरानी प्रणाली को मजबूत करके सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी कर्मचारी या अधिकारी अपने कर्तव्यों से विमुख न हो। माननीय महापौर द्वारा जनता से अपील की गई है कि अगर 10 बजे आपको नगर निगम कार्यालय में अधिकारी व कर्मचारी सीट पर नहीं मिलें तो तुरंत इसकी शिकायत 638920005 पर करें। इसके साथ ही आप फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स पर भी टैग कर सकते हैं।
गेट पर लगा ताला, बाहर खड़े मिले कर्मचारी
महापौर ने निरीक्षण की शुरुआत से पहले ही नगर निगम मुख्यालय के मुख्य गेट और दूसरे गेट पर ताला जड़वा दिया था। इस कदम से अंदर-
बाहर की गतिविधियों पर नियंत्रण रखा गया। इस दौरान कई कर्मचारी और अधिकारी मुख्यालय के बाहर खड़े देखे गए।अटेंडेंस लगाकर गायब महापौर ने 311 एप के जरिए कर्मचारियों की अटेंडेंस सूची मंगाई। सूची की जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि कई कर्मचारी सुबह मुख्यालय परिसर में आकर अटेंडेंस तो दर्ज कर गए, लेकिन उसके बाद वे अपनी सीट पर मौजूद नहीं थे। महापौर ने इसे गंभीर लापरवाही करार दिया और ऐसे सभी कर्मचारियों की जांच के लिए सीसीटीवी फुटेज निकलवाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोषी पाए जाने पर किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा और कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
निजी घरानों की मोनोपॉली उपभोक्ताओं के हित में नहीं: विशेषज्ञ
-उप्र में दिल्ली और उड़ीसा जैसी गलती दोहराई जा रही
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि देश के बिजली के बड़े विशेषज्ञों की राय है कि पावर सेक्टर में निजी घरानों
की मोनोपोली किसी भी प्रकार उपभोक्ताओं के हित में नहीं है। इसे हर हाल में रोका ही जाना चाहिए। सबसे बड़ी बात यह है कि सरकार ने निजी क्षेत्र की कंपनियों को सी ए जी ऑडिट से मुक्त रखा है, उनका सी ए जी ऑडिट नहीं होता है। ऐसे में लाभ हानि का सही लेखा जोखा नहीं मिल पाता है और निजी कंपनियों को मिलने वाले मुनाफे का आम उपभोक्ताओं और कर्मचारियों को कोई लाभ नहीं मिल पाता है।
संघर्ष समिति ने कहा है कि विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में किये जा रहे बिजली के निजीकरण में वही भयंकर गलतियां दोहराई जा रही हैं जो दिल्ली और उड़ीसा का निजीकरण करने के समय की गई थी। इन्हीं गलतियों के चलते अरबों खरबों रुपए की परिसंपत्तियों को निजी घरानों को कौड़ियों के मोल दे दिया गया और आम उपभोक्ता ठगे रह गये।ऑल इंडिया पॉवर इंजीनियर्स फेडरेशन द्वारा पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण में किए जा रहे घोटालों का अध्ययन करने के लिए गठित विशेषज्ञों की टीम ने कहा है कि मनमाने ढंग से किए गए निजीकरण का आम उपभोक्ताओं को आज तक कोई लाभ नहीं मिला है। निजी घरानों को सुधार के नाम पर विद्युत वितरण का दिल्ली और उड़ीसा का बड़ा नेटवर्क कौड़ियों के मोल दे दिया गया।दिल्ली और उड़ीसा में सुधार का दावा करने वाली निजी कंपनियों ने आज तक यह नहीं बताया कि उन्होंने सुधार किया है तो सुधार का लाभ आम उपभोक्ताओं को स्थानांतरित क्यों नहीं हुआ और आम उपभोक्ताओं की बिजली दरें क्यों नहीं कम हुई ? निजी कंपनियां मुनाफे में आ गई हैं तो दरें उल्टे बढ़ाई क्यों जा रही है ? संघर्ष समिति ने कहा कि निजीकरण होने के बाद प्राइवेट कंपनियों का सी ए जी ऑडिट नहीं होता। सीएजी ऑडिट न होने से वास्तविक लाइन हानियां कम होने का लाभ उपभोक्ताओं को ट्रांसफर नहीं हो रहा है।
संघर्ष समिति ने कहा कि विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली, उड़ीसा और आगरा के निजीकरण में कुछ बड़ी गलतियां की गई थीं जिसका लाभ निजी घरानों को मिला। उदाहरण के तौर पर निजीकरण करने हेतु ट्रांजैक्शन कंसलटेंट के चयन में कोई पारदर्शिता नहीं बरती गई। परिणाम स्वरूप कंसल्टेंट ने निजी घरानों से मिली भगत में ऐसा आर एफ पी डॉक्यूमेंट तैयार किया जो कुछ चुनिंदा निजी कंपनियों के हित में था। संघर्ष समिति ने कहा कि ऑल इंडिया पॉवर इंजीनियर्स फेडरेशन द्वारा गठित विशेषज्ञों की पूरी रिपोर्ट आते ही इसे सार्वजनिक किया जाएगा।
मेडिकल प्रवेश परीक्षा में अवैधानिक आरक्षणनीति: डा. संजय पाठक
प्रदेश में पिछले बीस वर्षो से मेडिकल प्रवेश परीक्षा में अवैधानिक आरक्षण नीति से सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को धोखा दिया जा रहा है।
मान्यनीय न्यायालय को डीजीएमई की भ्रामक दलील देकर न्याय से रोका ही नही जा रहा बल्कि इसकी आड़ में आर्थिक भ्रष्टाचार किया जा रहा है। यह बॉत आज स्थानीय होटल में नमो सेना इंडिया के महासचिव एवं अखिल भारतीय सनातन परिषद के राष्टीय संगठन मंत्री डा. संजय पाठक ने पत्रकारों को देते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय आदित्यनाथ से इस मामले में हस्तक्षेप करने तथा इस असंवैधानिक प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की है।
श्री पाठक ने पत्रकारो से बातचीत में बताया कि 2006 से चला आ रहा आरक्षण घोटाला डीजीएमई की भ्रामक दलीलों ने न्याय से वंचित है। हर साल सैकड़ों सामान्य वर्ग के विद्यार्थी इसका अभिशाप झेलने तथा अपने हक पाने से वंचित है। उत्तर प्रदेश की मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया में लगभग एक दशक से जारी अवैधानिक आरक्षण नीति ने आखिरकार न्यायपालिका को हस्तक्षेप करने पर मजबूर कर दिया है। लेकिन डीजीएमई की भ्रामक दलीलों ने अदालत को गुमराह कर इस साल भी सामान्य वर्ग के दर्जनों योग्य विद्यार्थियों के साथ अन्याय करवा दिया।उनके अनुसार आरक्षण को लेकर कानून स्पष्ट है। उत्तर प्रदेश शैक्षिक संस्थानों में प्रवेश हेतु आरक्षण अधिनियम, 2006 के अनुसार आरक्षण की सीमा एसी 21 प्रतिशत,एसटी 2 प्रतिशत और ओबीसी 27 प्रतिशत यानि आरक्षण कुल 50 प्रतिशत और शेष 50 प्रतिशतसीटें सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के लिए खुली रहनी चाहिए। इसको दरकिनार कर मनमानी और आर्थिक लूट के लिए 2010 से 2015 के बीच राज्य सरकार ने अम्बेडकर नगर, कन्नौज, जालौन और सहारनपुर में चार नए मेडिकल कॉलेज स्थापित किए। चूँकि ये कॉलेज स्पेशन कम्पोनेट प्लान से आंशिक रूप से वित्तपोषित थे। इस पर सरकार ने आदेश जारी कर दिया कि इनमें 70 प्रतिशत सीटें एसीएसटी 15 प्रतिशत ओबीसी को और मात्र 15 प्रतिशत सामान्य वर्ग को मिलेंगी।इससे आरक्षण की सीमा 79 प्रतिशत तक पहुँच गई, जो न केवल अधिनियम 2006 बल्कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित 50 प्रतिशत की संवैधानिक सीमा का भी उल्लंघन था। उदाहर के तौर पर इन चार कॉलेजों में कुल 340 राज्य-कोटा सीटें थीं। इनमें से सामान्य वर्ग के लिए केवल 28 सीटें छोड़ी गईं, जबकि अधिनियम के अनुसार कम से कम 170 सीटें सामान्य वर्ग को मिलनी चाहिए थीं। यानी हर साल लगभग 140 सीटें सामान्य वर्ग से छीनकर गलत तरीके से एसटीएससी को दी गईं। पिछले 10 वर्षों में इसका खामियाजा हजार से अधिक मेधावी विद्यार्थियों पर पड़ा। यही नहीं, ओबीसी को भी 27 प्रतिशत के बजाय केवल 15 प्रतिशतदिया गया, जिससे हर साल लगभग 30 सीटें ओबीसी वर्ग से छिनती रहीं।श्री पाठक ने बताया कि इसका खुलासा तब हुआ जब नीट एवं यूजी 2025 में 523 अंक लाने वाली छात्रा सबराह अहमद ने इस अवैध व्यवस्था को चुनौती दी। 25 अगस्त को एकल पीठ ने राज्य सरकार के सभी आदेशों को अवैध घोषित करते हुए कहा कि डीजीएमई ने कानून की गलत व्याख्या कर आरक्षण सीमा का उल्लंघन किया है।
इप्सेफ का प्रतिनिधिमंडल राहुल गांधी मिला
इप्सेफ का 10 प्रतिनिधिमंडल नेता विरोधी दल एवं सांसद राहुल गांधी से रायबरेली में उनसे मिलकर कर्मचारियों की पीड़ा सुनाई, राहुल गांधी
ने वादा किया कि देशभर के कर्मचारी की कठिनाईयों,अन्य समस्याओं को दूर करने में पूरा सहयोग करते रहे हैं और करते रहेंगे।
यह जानकारी देते हुए इंडियन पब्लिक सर्विस इंप्लाइज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष वी पी मिश्र ने संवाददाताओं को बताया कि एन टी पी गेस्ट हाउस में 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल मिलकर देश भर के करोड़ों कर्मचारियों की पीड़ा से उन्हें अवगत कराया। श्री मिश्र ने उन्हें अवगत कराया की उनके प्रयास से यूपीए सरकार में प्रस्तावित वर्ष 2016 से 2 वर्ष पूर्व ही सातवें वेतन आयोग का गठन हो गया था, 1 जनवरी 2016 से उसका लाभ दिया गया था। इप्सेफ की मांगों पर केंद्र सरकार ने आठवें वेतन आयोग की घोषणा तो कर दी परंतु इसका गठन न होने से इसका लाभ 1 जनवरी 2026 से मिल पाना संदिग्ध लगता है । 50ः से ज्यादा डी ए हो जाने पर 50 प्रतिशत डीए मर्जर भी भारत सरकार ने मर्जर नहीं किया है।पुरानी पेंशन को बहाल करने का इंडिया गठबंधन ने वादा तो किया था परंतु अभी तक बहाली नहीं की गई। युवाओं को आउटसोर्स के रूप में एजेंसी के माध्यम से कर्मचारी रखने से युवा वर्ग को अल्पवेतन 8000 प्रतिमाह मिलता है। राहुल गांधी ने आश्वासन दिया कि वे युवाओं को रोजगार दिलाने एवं उनकी कठिनाइयों को दूर करने में पूरा सहयोग करेंगे। प्रतिनिधिमंडल में वी पी मिश्र राष्ट्रीय अध्यक्ष, अतुल मिश्रा उप महामहासचिव ,सुरेश कुमार रावत उपाध्यक्ष ,प्रेमचंद चतुर्वेदी ,प्रमोद कुमार, संजय मधेशीया, राजेश सिंह ,रमेश चंद्र श्रीवास्तव, दिवाकर सिंह आदि लोग शामिल थे।
बैकुंठधाम को 25 कुर्सियों का दान
संत श्री सोमवारी महाराज सेवा संस्थान, बैकुंठधाम रवि सिंह संत श्री सोमवारी महाराज सेवा संस्थान, बैकुंठधाम, विद्युत शवदाह गृह में लम्बे समय से सतत सेवा कार्य कर रहा है। इसी प्रेरणा से माथुर चतुर्वेदी समाज, लखनऊ ने अपनी सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए 25 कुर्सियाँ विद्युत शवदाह गृह हेतु भेंट की हैं।इस सम्बंध में रविसिंह बताया कि संस्थान ने इस उदार दान के लिए माथुर चतुर्वेदी समाज, लखनऊ का हृदय से आभार व्यक्त और उनके इस सामाजिक योगदान को नमन करता है। जबकि उनके द्वारा यह आश्वासन भी दिया गया है कि भविष्य में भी किसी भी प्रकार की सहायता की आवश्यकता होने पर वे सेवा हेतु तत्पर रहेंगे।आपका यह सहयोग न केवल संस्थान के लिए प्रेरणादायी है बल्कि समाज के अन्य वर्गों को भी जनसेवा हेतु जागरूक करता है।
बत्तीस साल बाद यूपीएसएलडीसी की साइट हुई सार्वजनिक
-विद्युत उपभोक्ता परिषद का प्रयास रंग लाया
उत्तर प्रदेश में निजी क्षेत्र की पहली कंपनी नोएडा पावर कंपनी जिसके द्वारा 1993 से आज तक लगभग 32 साल में यूपीएसएलडीसी की साइट
पर कोई भी ग्रामीण शहरी व इंडस्ट्री की सप्लाई पोजीशन सार्वजनिक नहीं किया था।
उपभोक्ता परिषद ने जब इसका मामला उठाया और विद्युत नियामक आयोग के सामने रखा और विद्युत नियामक आयोग ने दो दिन पहले यूपीएसएलडीसी का आर्डर जारी करते हुए उसमें या निर्देश जारी कर दिया कि यदि सूचना सार्वजनिक नहीं की गई तो नोएडा पावर कंपनी के खिलाफ विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 142 के तहत कार्यवाही प्रारंभ कर दी जाएगी। उपभोक्ता परिषद की मांग पूरी तरह संवैधानिक है अंतत देश की निजी घराने की कंपनी ने सभी डाटा प्रत्येक दिन के अनुसार ग्रामीण शहरी व उद्योगों को कितनी बिजली रोज नोएडा पावर कंपनी दे रहा है वह सभी यूपीएसएलडीसी की साइट पर आना सुरु हो गया। उपभोक्ता परिषद की लड़ाई रंग लाई नोएडा पावर कंपनी के पसीने छूट गए अब उपभोक्ता परिषद की दूसरी मांग जल्द ही यूपीएसएलडीसी को नया एमडी सरकार दे जो स्वतंत्र होकर काम करें। जिस पर विद्युत नियामक आयोग ने अपने यूपीएसआरटीसी की आदेश में निर्देश जारी कर दिया है कि यूपीएसएलडीसी का स्वतंत्र प्रबंध निदेशक बनाया जाए।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि नोएडा पावर कंपनी में जो सामग्री खरीद मी ट्रांसफार्मर व अन्य सामग्री में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार चल रहा है उसे पर विवाह सुधार कर ले अन्यथा की स्थिति में उसका भी भंडाफोड़ किया जाएगा देश के निजी घराने को लूटने की छूट उत्तर प्रदेश में नहीं मिलने वाली उपभोक्ता परिषद संवैधानिक तरीके से रेगुलेटरी फ्रेमवर्क में सभी मुद्दों को सार्वजनिक करेगी।
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा देश के निजी घराने को लगभग 32 साल बाद उपभोक्ता परिषद ने यह आइना दिखा दिया कि जो भी सूचना सार्वजनिक आम जनता के लिए होनी चाहिए उसे आप रोक नहीं सकते और अंततः उपभोक्ता परिषद की मांग पर विद्युत नियामक आयोग ने जब कठोर कदम उठाया तो नोएडा पावर कंपनी के पसीने छूट गए उसे पता था कि अब वह बचाने वाला नहीं है वह दिन दूर नहीं जब नोएडा पावर कंपनी में सामग्री खरीद में जो घालमेल चल रहा है उसका भी पर्दाफाश किया जाएगा।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा अब एसएलडीसी की साइट पर नोएडा पावर कंपनी के सितंबर 2025 के ग्रामीण शहरी व उद्योगों को जो बिजली आपूर्ति का डाटा सार्वजनिक किया गया है उसमें ग्रामीण को लगभग 19 घंटे से लेकर 20 घंटे तक विद्युत आपूर्ति दी गई है और वही शहरी विद्युत उपभोक्ताओं को 23 घंटा 48 मिनट तक विद्युत आपूर्ति दी गई है और उद्योगों को भी 23 घंटा 58 मिनट तक विद्युत आपूर्ति दी गई है जैसा की नोएडा पावर कंपनी के आंकड़े सार्वजनिक किए गए हैं अब यह काम सरकार का है कि वह देखें कि यह आंकड़े सही है अथवा नहीं।
