LUCKNOW:बिजली व्यवस्था में अप्रत्याशित सुधार तो फिर निरस्त करे निजीकरण,क्लिक करें और भी खबरें

-निजीकरण के विरोध में प्रदेश भर में ध्यानाकर्षण कार्यक्रम जारी

  • REPORT BY:AAJ NATIONAL NEWS || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK 

लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने आज यहां कहा कि कल दिल्ली में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री की अध्यक्षता में आयोजित ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स की बैठक में उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था में हुए अप्रत्याशित सुधार की चर्चा की गई । मीटिंग में बिजली की तकनीकी और वाणिज्यिक हानि में निरंतर कमी की सराहना की गयी है जिसकी पुष्टि प्रदेश के ऊर्जा मंत्री अरविन्द कुमार शर्मा द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से स्वयं की गई है।
संघर्ष समिति ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि जब सार्वजनिक क्षेत्र में रहते हुए एटीएंडसी हानियों में काफी गुणात्मक कमी हुई है और प्रदेश में पूर्व में हुए आगरा और ग्रेटर नोएडा का निजीकरण का प्रयोग विफल हो गया है तथा निजीकरण में हुए घोटाले व देश में अन्य जगहों पर निजीकरण के विफल प्रयोग को देखते हुए पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया तत्काल निरस्त की जानी चाहिए। संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कॉरपोरेशन कथित घाटे का हवाला देते हुए पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की दलील दे रहा है। संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कारपोरेशन का प्रबंधन घाटे को लेकर इतना संवेदनशील है तो उसे सबसे पहले आगरा का फ्रेंचाइजी करार तत्काल रद्द कर देना चाहिए,जिसके चलते पावर कारपोरेशन को प्रति वर्ष 1000 करोड रुपए का नुकसान हो रहा है । संघर्ष समिति ने कहा कि ए टी एंड डी हानियां के गलत आंकड़ों के कारण से टोरेंट पावर को बहुत सस्ती दरों पर पॉवर कॉरपोरेशन बिजली दे रहा जिससे विगत 14 वर्षों में 3432 करोड रुपए की हानि हो चुकी है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि काम करने के बावजूद बिजली कर्मचारियों को लगातार तीन माह तक वेतन नहीं दिया जाना यह बहुत ही गंभीर उत्पीड़नात्मक कार्यवाही है और पूरी तरह अमानवीय है। संविदा कर्मियों को बड़े पैमाने पर हटाए जाने से विभिन्न जनपदों में प्रदेश की बिजली व्यवस्था पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।निजीकरण किये जाने हेतु बिजली कर्मचारियों पर बड़े पैमाने पर की गई उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के वापस न लिये जाने से बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा व्याप्त है। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में आज लगातार 293 वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में समस्त जनपदों पर व्यापक विरोध प्रदर्शन किया और संकल्प व्यक्त किया कि जब तक निजीकरण का फैसला निरस्त नहीं किया जाता और समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस नहीं ली जाती तब तक बिजली कर्मी लगातार आंदोलन जारी रखेंगे।

भारी भरकम पेड़ गिरा, एक की मृत्यु

लखनऊ में मंगलवार की सुबह तक हुई बारिश के बाद बड़ा हादसा हुआ है। इस हादसे में एक व्यक्ति की मौत होने की पुष्टि हुई है। कई लोग गम्भीर हुए है। कैसरबाग में एक भारी भरकम पीपल पेड़ का पेड़ गिर गया। पेड़ मछली मंडी के साथ ही आसपास के कई मकानों पर गिरा है। इससे दस से ज्यादा लोग दब गए। सूचना पर नगर निगम, प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और राहत कार्य शुरू कराया। हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई है। घटना की जानकारी मिलते ही डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक भी मौके पर पहुंचे। बड़ी संख्या में पुलिस बल और फायर ब्रिगेड के जवान राहत में लगे हैं। जहां पेड़ गिरा है, वहां मछली मंडी लगती थी। घायलों को पेड की डालें काट-काटकर निकाला गया। आला अधिकारी, कमिश्नर रौशन जैकब भी मौके उपस्थित रही ।प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया है कि पेड़ करीब 150 साल पुराना था।
सोमवार की पूरी रात बारिश होने के बाद यह घटना हुई है। पेड़ की टहनियों ने आसपास के घरों को भी क्षतिग्रस्त किया है। पेड़ के नीचे कई गुमटियां भी दबी हुई हैं। दबे लोगों को निकाल-निकाल कर अस्पताल भेजा गया। ब्रजेश पाठक ने कहा कि सभी का बेहतर इलाज कराया जाएगा। अधिकारियों को इस बारे में निर्देश भी दे दिया गया है।इतना विशाल था कि उसके गिरते ही टीन शेड की मंडी का बड़ा हिस्सा उसकी चपेट में आ गया। इससे अफरातफरी मच गई। मौके पर चीख-पुकार मच गई। हादसे में मछली बेचने वाले रामू दादा की मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों में एक गैस सिलेंडर सप्लाई करने वाला युवक भी शामिल है। दोनों को तत्काल अस्पताल भिजवाया गया। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि एक व्यक्ति की मौत की सूचना है। अन्य सभी घायलों को बलरामपुर अस्पताल और सिविल अस्पताल भेजा गया है। वहां सभी का इलाज चल रहा है। केजीएमयू को डॉक्टरों को भी अलर्ट कर दिया गया है। अगर जरूरत पड़ेगी तो वहां भी भेजकर तत्काल इलाज कराया जाएगा। इस दौरान रक्षामंत्री एवं सांसद राजनाथ सिंह, जोकि रक्षा मंत्रालय की बैठक में कलकत्ता में थे, उनको इस दर्दनाक घटना की जानकारी दी गयी। उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की व पीड़ित परिवारों को यथोचित सहयोग प्रदान करने का आदेश दिया। उन्होंने अपने सांसद प्रतिनिधि दिवाकर त्रिपाठी एवं जनसम्पर्क अधिकारी डॉ. राघवेन्द्र शुक्ल को तुरन्त घटना स्थल पर पहुंचने के निर्देश दिये तथा यथा सम्भव मदद करने का आदेश भी दिया। दिवाकर त्रिपाठी एवं डॉ. राघवेन्द्र शुक्ल तुरन्त घटना स्थल पहुंचे एवं पीड़ित परिवारों से भेंट कर उनको यथासम्भव सहयोग देने का आश्वासन दिया। क्षेत्रीय नागरिकों की मांग पर पीड़ित परिवार को रहने हेतु एक प्रधानमंत्री आवास एवं उनके मकान के पुनर्निर्माण हेतु सरकारी सहायता दिलाने का आश्वासन दिया। इसके अतिरिक्त वहां निर्मित एक सुलभ षौचालय का तुरन्त संचालन करने हेतु डॉ. राघवेन्द्र शुक्ल ने नगर आयुक्त से वार्ता की एवं विधवा बेटी की बच्ची के स्कूल फीस माफ कराने का आश्वासन दिया।

टीईटी पर मुख्यमंत्री के बयान का स्वागत

मुख्यमंत्री का टीईटी पर बयान पर स्वागत स्वागत करते हुए विजय कुमार बन्धु ने कहा कि अटेवा उम्मीद करता है कि इसका जल्द सुखद परिणाम निकलेगा। उन्होंने कहा कि सभी संगठनो को इस मामले में साथ आने की अपील करते हुए हा कि जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन देने का कार्यक्रम चलता रहेगा।
टीईटी प्रकरण बहुत गंभीर है सुप्रीम कोर्ट का निर्णय जब से आया है बेसिक शिक्षको में बहुत तनाव है। इसी तनाव मे कई दुःखद घटनाये हो गयी कारण इस दायरे में सभी को रख दिया गया जबकि कोई भी निर्णय (नियम ) खेल शुरु होने के बीच नही बदला जाता है। मुख्यमंत्री टीईटी प्रकरण का संज्ञान लिया और विश्वास दिलाया कि शिक्षकों के सम्मान और उनके अनुभव को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा और सरकार इस दिशा मे ठोस कदम उठाएगी, स्वागत योग्य बयान है। अटेवा मुख्य मंत्री आभार व्यक्त करता है। अटेवा शिक्षको के साथ है और इस विषय पर सभी संगठनो के एक साथ आने की अपील भी करता है जिससे मामले का जल्द सुखद वह सकारात्मक परिणाम निकले।

मंत्री समूह की बैठक में निजी घरानो की लाभ पर चर्चा दुर्भाग्यपूर्ण,उपभोक्ता परिषद की आयोग से मांग बकाए के आधार पर कम करें बिजली दरे

केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय भारत सरकार की अध्यक्षता में गठित मंत्री समूह की पांचवी बैठक में कल चर्चा करते हुए नियामक आयोग द्वारा अनिवार्य रूप से लागू करने व समय से बिजली दर का आदेश किए जाने पर चर्चा की गई। यह भी कहा गया की वितरण निगमों के घाटे की वजह से निजी निवेश के लिए कम आकर्षक होता जा रहा है। जो यह सिद्ध करता है बैठक में भी निजी घरानों को लाभ की योजना पर चर्चा की जाती है। जो अपने आप में दुर्भाग्यपूर्ण है। उपभोक्ता परिषद ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है जहां आज भी रोस्टर लागू है। मंत्रिमंडल समूह की बैठक में फुल कास्ट टैरिफ की बात होती है वैसे उत्तर प्रदेश में फुल कॉस्ट टैरिफ पहले से ही लागू है इसलिए उत्तर प्रदेश सरकार व केंद्र सरकार उत्तर प्रदेश में 24 घंटे सभी को बिजली का आदेश जारी करें। अन्यथा की स्थिति में गांव की जनता की बिजली दरों में 10 प्रतिशत की रिबेट लागू करें। उपभोक्ता परिषद ने आयोग से मांग की है कि वह उपभोक्ता के बकाए के आधार पर बिजली दरों में कमी का आदेश जारी कराये।

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है जहां पर प्रदेश के उपभोक्ताओं का बिजली कंपनियों पर लगभग 33122 करोड़ सर प्लस निकल रहा है। वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025-26 में भी लगभग 3000 करोड़ सरप्लस निकालने की पूरी उम्मीद है। ऐसे में उपभोक्ताओं के हित में उत्तर प्रदेश सरकार को आगे जाकर विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 108 के तहत विद्युत नियामक आयोग को बिजली दरों में कमी करने का आदेश देना चाहिए। क्योंकि अब उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग कभी भी बिजली दर का ऐलान कर सकता है। ऐसे में उत्तर प्रदेश सरकार की यह नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वह प्रदेश के उपभोक्ताओं का हिसाब बराबर करने के लिए नोएडा पावर कंपनी की तर्ज पर उत्तर प्रदेश की पांचो वितरण कंपनियों में भी बिजली दरों में कमी करने के लिए आयोग को संवैधानिक अधिकार के तहत आदेश पारित करें।उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा जहां तक सवाल है राज्य सरकारों द्वारा सब्सिडी घोषित किए जाने का तो वह राज्य सरकारी उपभोक्ताओं पर कोई एहसान नहीं करती उसके बदले वह चुनावी लाभ लेती है। चुनाव में लाभ लेने के लिए यदि सरकारी बिजली दर फ्री करने या बिजली दर में कमी करने का ऐलान करेगी तो उन्हें विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 65 के तहत सब्सिडी देना अनिवार्य है।

Aaj National

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