- REPORT BY:AAJ NATIONAL NEWS || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK
लखनऊ। लोक निर्माण विभाग विद्युत यॉत्रिक संवर्ग का पुनगर्ठन किया गया है। विद्युत यॉत्रिक संवर्ग में तीन नए खण्डों का सृजन एवं तीन
स्टाफ अफसर के पद समाप्त किये गए है। विशेष सचिव शेषनाथ द्वारा इस आशय का ज्ञाप जारी किया गया है।
लोक निर्माण विभााग विद्युत यॉत्रिक संवर्ग का पुनगर्ठन जारी ज्ञाप में बॉदा, बस्ती और गोण्डा के तीन नए खण्ड बनाए गए है। स्टाफ अफसर लखनऊ, वाराणसी और मुरादाबा के स्टाफ अफसर के पद समाप्त इन तीन नए खण्डों का सृजन किया गया है। यॉत्रिक खण्ड फतेहपुर को प्रयागराज और इटावा को मिर्जापुर से सम्बंद्ध किया गया है। फतेहपुर खण्ड के नियंत्रक अधिकारी अधीक्षण अभियंता 44 वॉ वृत वाराणसी और मुख्य अभियंता पूर्वाचल गोरखपुर, यांत्रिक खण्ड इटावा को यांत्रिक खण्ड मिर्जापुर बनाकर अधीक्षण अभियंता 44 वॉ वृत वाराणसी और मुख्य अभियंता पूर्वाचल गोरखपुर,से सम्बंद्ध किया गया है। स्टाफ अफसर 30 वॉ वृत्त लखनऊ को अधिशासी अभिया विद्युत यॉत्रिक खण्ड बॉदा नियंत्रक अधिकारी अधीक्षण अभियंता कानुपर और मुख्य अभियंता मध्यांचल लखनऊ, स्टॉफ अफसर 44 वॉ वृत्त वाराणसी को अधिशासी अभियंता वाराणासी , अधीक्षण अभियंता गोरखपुर मुख्य अभियंता मुख्य अभियंता पूर्वाचल गोरखपुर,से सम्बंद्ध किया गया है।स्टाफ अफसर 47 वॉ वृत्त मुरादाबाद को अधिशासी अभियंता गोण्डा नियंत्रक अधिकारी अधीक्षण अभियंता 17 वॉ वृत्त लखनऊ और मुख्य अभियंता मुख्य अभियंता मध्यांचल लखनऊ से सम्बद्ध किया गया है।
वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के पीछे निजीकरण की योजना
-महाराष्ट्र में रिस्ट्रक्चरिंग के विरोध में बिजली कर्मी पर सड़कों पर उतरे
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के पीछे अधिक राजस्व वाले कई शहरों को अर्बन
डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी में निजी घरानों को देने की योजना है। वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग का सुझाव ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन का है और यह केवल निजीकरण के लिए है।महाराष्ट्र में रिस्ट्रक्चरिंग के विरोध में बिजली कर्मी सड़कों पर उतर आए हैं और उन्होंने हड़ताल की नोटिस दे दी है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में विगत 10 महीने से अधिक समय से चल रहे आंदोलन से खीझा हुआ पावर कार्पाेरेशन प्रबंधन अब कई शहरों की बिजली व्यवस्था रिस्ट्रक्चरिंग कर अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी को देने जा रहा है। इसी दृष्टि से अब तक केस्को, अलीगढ़ ,मेरठ, बरेली, लेसा, गाजियाबाद, मुरादाबाद, नोएडा और सहारनपुर की बिजली वितरण व्यवस्था के वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के प्रस्ताव को बोर्ड ऑफ डायरेक्टर से मंजूरी मिल चुकी है।
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग का प्रस्ताव ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की ओर से दिया गया है, जिस पर पावर कार्पाेरेशन प्रबंधन अमल कर रहा है। ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन,टाटा पावर और निजी कंपनियों की मदद से चार-पांच नवंबर को मुंबई में डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट का आयोजन कर रही है । महाराष्ट्र में भी इस आयोजन के पहले रिस्ट्रक्चरिंग का प्रस्ताव सामने आया है जिसका बिजली कर्मचारियों ने पुरजोर विरोध करना शुरू कर दिया है। संघर्ष समिति ने कहा कि वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर बड़े पैमाने पर स्वीकृत पदों की संख्या घटाई जा रही है जिससे अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी के बाद बिजली कर्मी, जूनियर इंजीनियर और अभियंता सरप्लस हो जाएंगे। हजारों की संख्या में संविदा कर्मियों की नौकरी जाएगी क्योंकि निजी फ्रेंचाइजी संविदा कर्मियों को और नियमित कर्मचारियों को अपने यहां नहीं रखती। संघर्ष समिति ने कहा कि वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के बाद केस्को में 325 पद मेरठ में 487 पद बरेली में 372 पद और लेसा में 2055 पद काम हो जाएंगे। इसके अतिरिक्त संविदा कर्मियों के हजारों पर समाप्त हो जाएंगे और उनकी नौकरी खतरे में पड़ जाएगी। निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के 306 दिन आज पूरे हो गए हैं। आज वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद में बिजली कर्मियों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
स्मार्ट प्रीपेड मीटर को अनिवार्य बनाए रखना संविधान और अधिकारों के खिलाफ
उत्तर प्रदेश में दीपावली से पहले नए विद्युत कनेक्शनों को लेकर उपभोक्ताओं की समस्याएं अब गरम मुद्दा बन गई हैं। उत्तर प्रदेश राज्य
विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष और राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने प्रदेश सरकार और पावर कारपोरेशन से मांग की थी कि उपभोक्ताओं को बिना किसी बाधा के नए बिजली कनेक्शन पूर्व की भांति सस्ती दरों पर दिए जाएं।इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल ने नए विद्युत संयोजनों को समय पर जारी किए जाने के लिए टीमों का गठन कर आदेश जारी किया है। इसमें समस्त मुख्य अभियंताओं और निदेशक वाणिज्य को साप्ताहिक स्तर पर निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
हालांकि परिषद का आरोप है कि इन प्रयासों के बावजूद स्मार्ट प्रीपेड मीटर की शर्त को अनिवार्य बनाए रखना संविधान और उपभोक्ता अधिकारों के खिलाफ है। परिषद ने मांग की है कि बिना किसी पूर्व निर्धारण और मूल्य निर्धारण के ऐसे मीटरों को जबरन थोपने की प्रक्रिया तुरंत बंद की जाए। विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) में उपभोक्ता को पोस्टपेड मी व प्रीपेड मीटर लेने का विकल्प है।वर्मा ने आरोप लगाया कि बिजली विभाग द्वारा अनिवार्य रूप से स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगवाने की शर्त थोपना पूरी तरह गलत और विद्युत नियामक आयोग के आदेशों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि अभी तक आयोग ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर की दरें तय नहीं की हैं, ऐसे में 6,000 प्रति मीटर की लागत वसूलना सरासर अनुचित और असंवैधानिक है।उन्होंने यह भी कहा कि आरडीएसएस (त्.क्.ै.ै.) योजना के तहत लगाए जा रहे मीटरों की लागत उपभोक्ताओं से वसूलना नियमों के विरुद्ध है। दीपावली जैसे त्यौहार के समय जब उपभोक्ता अपने घरों को रोशन करने के लिए नए कनेक्शन चाहते हैं, तब ऐसी शर्तें लगाना आम जनता के साथ अन्याय है।उप्भोक्ता परिषद ने मांग रखी है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर को अनिवार्य न किया जाए।दीपावली से पहले उपभोक्ताओं को समय पर बिजली कनेक्शन दिया जाए।6,000 की मीटर लागत वसूली तुरंत रोकी जाए।विद्युत अधिनियम और नियामक आयोग के आदेशों का पालन सुनिश्चित हो। अब देखना यह है कि प्रदेश सरकार और ऊर्जा विभाग उपभोक्ता परिषद की इन आपत्तियों पर क्या रुख अपनाते हैं। दीपावली नज़दीक है और लाखों उपभोक्ताओं को समय पर बिजली कनेक्शन की जरूरत है कृ ऐसे में यह मुद्दा और भी अहम हो गया है।
