- REPORT BY:AAJ NATIONAL NEWS || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK
लखनऊ। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा बिना विद्युत नियामक आयोग की अनुमति के उपभोक्ताओं पर स्मार्ट प्रीपेड मीटर अनिवार्य करने और मीटर की लागत 6016 वसूलने के मामले में आज उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। और पूर्व में कारपोरेशन के खिलाफ दाखिल अपनी अवमानना याचिका के क्रम में एक विरोध प्रस्ताव दाखिल किया जिसमें या मुद्दा उठाया कि जब आयोग ने स्पष्ट कर दिया की पावर कॉरपोरेशन की वसूली का आदेश आयोग आदेशों का उल्लंघन है फिर भी उपभोक्ताओं से अवैध रूप से की जा रही वसूली क्या सरकार की छवि धूमिल करने वाला नहीं है। इसलिए आयोग तत्काल प्रभाव से पावर कारपोरेशन को आदेशित करते हुए पूरी प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई और कार्पाेरेशन प्रबंधन के खिलाफ अभिलंब अबमानना की कार्रवाई शुरू करें।उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने विद्युत नियामक आयोग के सदस्य संजय कुमार सिंह से मुलाकात कर एक विरोध प्रस्ताव सौंपा। परिषद ने आयोग से तत्काल प्रभाव से पावर कॉरपोरेशन की इस संवैधानिक विरोधी कार्यवाही पर रोक लगाने और अब तक की लगभग 13 करोड़ से अधिक की अवैध वसूली उपभोक्ताओं को लौटाने की मांग की है। श्री वर्मा ने कहा कि “उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर तानाशाही चल रही है। बिना आयोग की अनुमति उपभोक्ताओं से वसूली करना विद्युत अधिनियम 2003 और आयोग के आदेशों का खुला उल्लंघन है।”
उन्होंने बताया कि आयोग ने पहले ही 17 अक्टूबर को पावर कॉरपोरेशन को नोटिस जारी कर स्पष्ट किया था कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर की दर आयोग द्वारा तय नहीं की गई है, और कॉरपोरेशन का आदेश आयोग के निर्देशों का उल्लंघन है। 15 दिन में कॉरपोरेशन जवाब दे अन्यथा उसके खिलाफ विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 142 के तहत कार्यवाही की जा सकती है। इसके बावजूद भी पावर कॉरपोरेशन मनमानी जारी रखे हुए है, जो न केवल विधिक रूप से गलत है, बल्कि शासन और आयोग की साख को भी धूमिल कर रहा है।श्री वर्मा ने कर्नाटक सरकार के गजट उदाहरण का हवाला देते हुए कहा कि कर्नाटक में रेगुलेटरी कमीशन ने विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के तहत उपभोक्ताओं को प्रीपेड या पोस्टपेड चुनने का विकल्प दिया है और कर्नाटक रेगुलेटरी कमीशन ने एक रेगुलेशन भी जारी किया। उत्तर प्रदेश में भी आयोग को इसी प्रकार का नियम बनाकर उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करनी चाहिए। जो विद्युत नियामक आयोग के लिए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क में जरूरी है और नियामक आयोग का यह कर्तव्य की वह स्मार्ट प्रीपेड मीटर से संबंधित रेगुलेशन जल्द बनाकर जारी करें।परिषद ने चेतावनी दी कि यदि पावर कॉरपोरेशन की मनमानी नहीं रोकी गई, तो यह उपभोक्ताओं के साथ अन्याय होगा और परिषद इस मुद्दे पर आगे कानूनी और जन आंदोलन दोनों विकल्पों पर विचार करेगी।
नरेन्द्र गुप्ता सचिव मनोनीत
राजाजीपुरम निवासी सुरेन्द्र कुमार गुप्ता को अखिल भारतीय ओबीसी अनुसूचित महासंघ का राष्टीय सचिव मनोनीत किया गया है। उनका मनोनयन महासंघ के अध्यक्ष रिशी चौरसिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री संगठन रामशंकर राजपूत ने संयुक्त रूप से किया।अखिल भारतीय ओबीसी अनुसूचित महासंघ द्वारा अपने समाज को एकजुट करने एवं सदस्यों के बीच सम्बंधों को प्रगाढ़ करने सामाजिक उत्थान और भाईचारे के लिए कार्य किया जाता है। श्री गुप्ता ने अपने मनोनयन पर धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि वे समाज और संगठन के लिए जितना बेहतर कर पाएगें करेगें।
दिल्ली घेरने की तैयारी में एनएमओपीएस और अटेवा टीम
नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम और ऑल टीचर्स एम्पलाईज वेलफेयर एसोसिएशन (अटेवा) के तत्वावधान में पूरे देश में विगत कई वर्षों से पुरानी पेंशन की बहाली और निजीकरण की समाप्ति के लगातार संघर्ष किया जा रहा है जिसका परिणाम है कि आज पुरानी पेंशन की बहाली और निजीकरण की समाप्ति देश का प्रमुख मुद्दा बन गया है। कई राज्यों राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, हिमाचल प्रदेश में पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल हो गई है और कई लाख कर्मचारी और शिक्षकों समेत अधिकारियों को पुरानी पेंशन का लाभ मिल रहा है। विजय कुमाार बंधु के अनुसार संगठन के संघर्ष की बदौलत 1जनवरी 2004 के पूर्व में प्रकाशित नौकरियों में बाद में ज्वाइन करने वालों को पुरानी पेंशन बहाली का लाभ मिला लेकिन जब तक देश भर के शिक्षक व कर्मचारियो को एनपीएस,यूपीएस को हटाकर पुरानी पेंशन की बहाली नही हो जाती, निजीकरण की समाप्ति और टीईटी की अनावश्यक अनिवार्यता समाप्त नहीं हो जाती। इसके लिए पूरे देश में एनएमओपीएस और अटेवा की दिल्ली घेरने की तैयारी शुरू हो चुकी है। 25 नवंबर को नई दिल्ली में एक विशाल प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा।फिलहाल इस दौरान एक लाख से अधिक शिक्षक कर्मचारी दिल्ली पहुचने का अनुमान लगाया गया है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु के अनुसार यूपीएस पूरी तरह से फेल योजना साबित हुई क्योंकि 24 लाख से ज्यादा केंद्रीय कर्मचारियों में 97 प्रतिशत लोगो ने इसको अस्वीकार कर दिया जबकि सरकार बार-बार उसका समय बढ़ा रही है इससे स्पष्ट है कि देश के शिक्षकों, कर्मचारियों ने एनपीएस और यूपीएस दोनों को नकार दिया। सरकार को चाहिए कि ओपीएस का भी विकल्प खोल दे, सारी हकीकत सामने आ जाएगी। सरकार ने निजीकरण की रफ्तार को तेज किया है जिससे देश में सरकारी संस्थान लगातार कमजोर हो रहे है और बेरोजगारी की दर बढ़ रही है। इन्हीं मुद्दों को लेकर एक विशाल प्रदर्शन 25 नवंबर को दिल्ली में किया जाएगा। सरकार लगातार शिक्षकों व कर्मचारियों का उत्पीड़न कर रही है जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार शिक्षक व कर्मचारियों के मुद्दों को हल करने के लिए उदारता दिखाए क्योंकि शिक्षक व कर्मचारी ही सरकार की रीढ़ है और वहीं सरकार की योजनाओं को धरातल पर ले जाता है। टीईटी की अनिवार्यता करके शिक्षकों को अपमानित किया जा रहा है शिक्षा के माहौल को खराब किया जा रहा है। अपने मुद्दे को ताकत देने के लिए स्नातक और शिक्षक विधान परिषद के आगामी होने वाले चुनाव में सभी शिक्षक और कर्मचारी अधिक से अधिक अपने नाम वोटर लिस्ट में बढ़वाए।
दस से कार्यबंदी, रोड़वेज परिषद का निकाय महासंघ को समर्थन
प्रदेश के निकाय कर्मचारियो की प्रदेश स्तरीय सेवा सम्बंधी व अन्य मांगो पर समयबद्ध निर्णय/ समाधान न किए जाने तथा दैनिक वेतन, संविदा तथा तदर्थ धारा 108 के कार्यरत कर्मचारियो के विनियमितीकरण हेतु जारी आदेश का पिछले 9 वर्षाे व 4 वर्षाे से नगर विकास में अनुपालन नही हो रहा। लम्बित समस्याऔ के विरोध स्वरूप .17 अक्टूबर 25 से लखनऊ ईकाई पर किया जा रहा प्रदेश स्तरीय आन्दोलन 24 अक्टूबर से होने वाले क्रमिक अनशन में .27 अक्टूबर को नगर निगम लखनऊ के विभिन्न संगठनो के अनिल दुबे,आर पी सिंह, शिव मोहन, शशिभूषण व मन्नू वर्मा शामिल रहे। स्थानीय निकाय महासंघ के इस आन्दोलन को राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के महामंत्री अतुल मिश्रा ने समर्थन करते हुए मुख्य सचिव और रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद ने समर्थन देते हुए महासचिव गिरीश मिश्रा ने प्रमुख सचिव को पत्र लिखा है।
’इस अवसर पर शशिकुमारमिश्र प्रदेश अध्यक्ष, आन्नद मिश्र, रामकुमार रावत,सै.कैसर रजा, संतोष श्रीवास्तव, कबीर दास,विजय यादव, शैलेन्द्र तिवारी,जितेन्द्र सि़द्धार्थ, सुनीता भट्ट ,बिन्दू सिंह, अनिल दुबे,अनिल शुक्ल, राजेन्द्र कुमार,अजय द्विवेदी ,हरिशंकर पाण्डेय,शशिभूषण मिश्र, सुधाकर मिश्र,ऋषि कुमार, शिवशंकर भारती,रवि मिश्र, विजेन्द्र कुमार, रुदल राजभर,नितिन त्रिवेदी,आकाश गुप्ता,शिवशंकर राय,आशीष कुशवाहा,मनोज मोर्या,कुवंर जय सिंह,राहुल कनौजिया आदि उपस्थित होकर समर्थन व्यक्त किया।यह क्रमिक अनशन महासंघ की लम्बित मांगो के समाधान होने तक अनवरत रुप से .7 नवम्बर तक चलेगा,क्रमिक अनशन के अगले चरण में 29 अक्टूबर को गाजियाबाद के ईकाई के साथी क्रमिक अनशन पर बैठेगे।महासंघ ने क्रमिक अनशन पर बैठे प्रदेश के कर्मचारियो का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश का कर्मचारी अपनी मांगो के समाधान हेतु किसी भी स्तर पर संघर्ष हेतु तैयार है,यदि प्रदेश सरकार व शासन द्वारा हमारी जायज समस्याऔ का समाधान नही करती तो महासंघ पूर्व घोषित दस नवम्बर से कार्य बन्दी करेगा। जिसमें अयोध्या से लेकर गोरखपुर,आगरा,वाराणसी आदि प्रदेश की सभी ईकाइयो की सभी सेवाएं बन्द होगी।
रोड़वेज कर्मचारी संयुक्त परिषद का प्रतिनिधि मण्डल एमडी से मिला
रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद,उ0प्र0 के एक सूक्ष्म प्रतिनिधि-मंडल ने आज निगम के प्रबंध निदेशक प्रभु नारायण सिंह (आई.ए. एस.) से शिष्टाचार भेंट की और परिवहन निगम में उनका स्वागत व अभिनन्दन किया। इसके बाद परिषद के महामंत्री गिरीश चन्द्र मिश्र ने परिवहन निगम व इसके कर्मचारियों से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण समस्याओं तथा निगम की आमदनी बढ़ाने आदि विषयों पर संक्षिप्त चर्चा किया।इस अवसर पर परिषद द्वारा निगम के प्रतिफलों में सुधार हेतु कुछ सुझाव भी प्रस्तुत किए गए, जिन्हें प्रबंध निदेशक ने गंभीरता से लेते हुए लागू करने पर विचार करने को कहा। प्रबंध निदेशक द्वारा आश्वस्त किया गया कि परिवहन निगम व इसके कर्मचारियों की समस्याओं के संबंध में शीघ्र ही रोडवेज परिषद के साथ विस्तार से चर्चा की जाएगी।प्रतिनिधिमंडल में रोडवेज परिषद के अध्यक्ष गिरिजा शंकर तिवारी, महामंत्री गिरीश चंद्र मिश्र उपमहामंत्री सतीश कुमार वर्मा तथा कोषाध्यक्ष बी. के. शुक्ल सम्मिलित थे।
रिस्ट्रक्चरिंग से लेसा में 5600 पद समाप्त होगे,कर्मियों में भारी गुस्सा
-निजीकरण के विरोध में प्रांतव्यापी आंदोलन जारी
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर राजधानी लखनऊ की बिजली व्यवस्था बर्बाद होने से बचाने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है। संघर्ष समिति ने कहा कि लखनऊ में बिजली व्यवस्था में लगातार गुणात्मक सुधार हो रहा है किन्तु निजीकरण के लिए मनमाना प्रयोग कर लखनऊ की बिजली व्यवस्था को पटरी से उतारने की कोशिश की जा रही है जिसे तत्काल रोका जाना चाहिए।संघर्ष समिति ने बताया की नई व्यवस्था में लेसा में सभी वर्गों के मिलाकर कुल 5606 पद समाप्त किए जा रहे हैं जिससे बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा व्याप्त है। संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली कर्मी सुधार के प्रति हमेशा पॉजिटिव रुख रखते हैं किन्तु बिजली कर्मियों से बिना विचार विमर्श किए केवल निजीकरण की पृष्ठभूमि बनाने हेतु हजारों की तादाद में सभी वर्गों के पदों को समाप्त किया जा रहा है जिससे बिजली कर्मियों में भारी बेचौनी और उबाल है।
आंकड़े देते हुए संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि सबसे बड़ी मार अत्यंत अल्प वेतन भोगी संविदा कर्मियों पर पड़ने जा रही है। 15 मई 2017 के एक आदेश के अनुसार शहरी क्षेत्र में प्रत्येक विद्युत उपकेंद्र पर 36 कर्मचारी होने चाहिए। यह आदेश आज भी प्रभावी है। वर्तमान में लेसा में 154 विद्युत उपकेंद्र है। प्रति उपकेंद्र पर 36 कर्मचारियों के हिसाब से संविदा के 5544 कर्मचारी होने चाहिए। रिस्ट्रक्चरिंग के आदेश के अनुसार लेसा के चारों क्षेत्र में मिलाकर कुल 616 गैंग होंगे और 391 एस एस ओ होंगे। एक गैंग में तीन कर्मचारी काम करते हैं। इस प्रकार 616 गैंग में 1848 संविदा कर्मी काम करेंगे साथ ही 391 एस एस ओ काम करेंगे। इस नई व्यवस्था के हिसाब से 01 नवंबर से कुल 2239 संविदा कर्मी काम करेंगे जबकि 15 मई 2017 के आदेश के अनुसार 5544 संविदा कर्मियों को होना चाहिए । इस प्रकार 3305 संविदा कर्मी एक झटके में हटाए जा रहे हैं। संघर्ष समिति ने बताया की इसी प्रकार अधीक्षण अभियंता के चार पद, अधिशासी अभियंता के 17 पद, सहायक अभियंता के 36 पद, जूनियर इंजीनियर के 155 पद और टी जी 2 के 1517 पद समाप्त किए जा रहे हैं। अन्य संवर्गाे के पदों में भी कमी की जा रही है। संघर्ष समिति ने बताया की लेसा में रिस्ट्रक्चरिंग के बाद इस प्रकार 5606 पद समाप्त किए जा रहे हैं जिसमें 3305 पद संविदा कर्मियों के और 2301 पद नियमित कर्मचारियों के हैं। संघर्ष समिति के आह्वान पर आज लगातार 334वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में सभी जनपदों पर व्यापक विरोध प्रदर्शन किया।
