LUCKNOW:वीरांगना ऊदा देवी की प्रतिमा के अनावरण से पहले नगर आयुक्त ने किया स्थल का निरीक्षण,क्लिक करें और भी खबरें

  • REPORT BY:AAJ NATIONAL NEWS|| EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK 

लखनऊ। देश के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अपने बलिदान से इतिहास में अमर हुई वीरांगना ऊदा देवी पासी की स्मृति में इब्राहिमपुर द्वितीय वार्ड क्षेत्र के सेक्टर 19 पासी चैराहा, वृंदावन कॉलोनी पीपरीखेड़ा के समीप उनकी 21 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा स्थापित की जा रही है। इस प्रतिमा का अनावरण आगामी 16 नवंबर को देश के रक्षा मंत्री एवं लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह जी, तथा प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा किया जाना प्रस्तावित है।अनावरण समारोह को ध्यान में रखते हुए नगर निगम और अन्य विभागों द्वारा स्थल पर तैयारियों को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी सिलसिले में शनिवार को नगर आयुक्त श्री गौरव कुमार ने प्रतिमा स्थल और आसपास के क्षेत्र का विस्तृत निरीक्षण किया। उन्होंने प्रतिमा स्थल, मार्ग, पार्क, प्रवेश द्वार और आस-पास की व्यवस्थाओं की स्थिति का बारीकी से अवलोकन किया।

निरीक्षण के दौरानसदस्य विधान परिषद रामचंद्र सिंह प्रधान, सदस्य विधान परिषद मुकेश शर्मा , एडीएम सिटी महेंद्र पाल सिंह, अपर नगर आयुक्त डॉ. अरविंद कुमार राव, जोन-8 के जोनल अधिकारी वकास सिंह, नगर निगम के जोनल अधिकारीगण तथा आवास विकास परिषद के अधिशासी अभियंता मौजूद रहे। नगर आयुक्त ने आवास विकास विभाग के अधिशासी अभियंता को क्षेत्र में आने वाली सड़कों की मरम्मत और समतलीकरण कार्य शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अतिथियों, आगंतुकों और स्थानीय नागरिकों के लिए मार्ग पूरी तरह सुगम और व्यवस्थित होना चाहिए। इसके साथ ही पार्क की परिधि दीवार की रंगाई-पुताई को प्राथमिकता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए गए, ताकि आयोजन स्थल आकर्षक और स्वच्छ दिखाई दे।नगर आयुक्त ने मुख्य अभियंता (आरआर) को निर्देश दिया कि क्षेत्र में बिजली पोलों पर अवैध रूप से लटके और उलझे तारों को तत्काल हटाया जाए, जिससे सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और कार्यक्रम स्थल की सुंदरता भी बनी रहे।उन्होंने सभी विभागों को समन्वय एवं समयबद्ध कार्यप्रणाली के साथ तैयारी पूरी करने को कहा, ताकि प्रतिमा अनावरण समारोह गरिमामय और सुचारू रूप से संपन्न हो सके।

नगर आयुक्त ने जंबूरी स्थल का किया निरीक्षण

भारत स्काउट एवं गाइड की डायमंड जुबली जंबूरी तथा 19वीं राष्ट्रीय जंबूरी का आयोजन इस वर्ष लखनऊ में होने जा रहा है। यह आयोजन 23 से 29 नवंबर 2025 तक वृंदावन योजना में डिफेंस एक्सपो क्षेत्र में प्रस्तावित है, जिसमें देश भर से लगभग 30,000 स्काउट-गाइड एवं यूनिट लीडर्स और 1500 विदेशी प्रतिभागियों के आने की संभावना है। इस बड़े और अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजन के चलते नगर निगम और अन्य विभागों की तैयारियों को तेज कर दिया गया है।

शनिवार को नगर निगम लखनऊ के नगर आयुक्त गौरव कुमार ने कार्यक्रम स्थल का विस्तृत निरीक्षण किया। उन्होंने स्थल की वास्तविक स्थिति देखी और अधिकारियों के साथ हर बिंदु पर व्यवस्थाओं की समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान अपेक्षित तैयारियों की गति को लेकर उन्होंने असंतोष भी जताया और स्पष्ट निर्देश दिए कि काम में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए।निरीक्षण के दौरान अपर नगर आयुक्त डॉ. अरविंद कुमार राव, जोन-8 के जोनल अधिकारी विकास सिंह, मुख्य अभियंता (सिविल) महेश वर्मा, मुख्य अभियंता (आरआर) मनोज प्रभात, जोनल सेनेटरी अधिकारी जितेंद्र गांधी, लायन एनवायरो टीम तथा आवास विकास एवं लखनऊ विकास प्राधिकरण के अधिशासी अभियंता उपस्थित रहे। नगर आयुक्त ने निर्देश दिया कि कार्यक्रम स्थल और आस-पास के पूरे क्षेत्र में अंधेरे की कोई स्थिति न रहे। सभी बिजली के खंभों पर स्पाइरल लाइट लगाने का आदेश दिया गया। मुख्य अभियंता (आरआर) को सभी प्रकाश पोल की सूची तैयार कर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए, ताकि प्रकाश व्यवस्था की स्थिति स्पष्ट रहे और उसे तुरंत सुधार किया जा सके। चूंकि आयोजन में हजारों प्रतिभागी शामिल होंगे, नगर आयुक्त ने स्वच्छता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया। जोनल सेनेटरी अधिकारी को सभी सफाई कर्मियों की बीट वाइज ड्यूटी रोस्टर तैयार करने और पदानुक्रम के अनुसार निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। आयोजन स्थल के आसपास सूखे और गीले कचरे के पृथक संग्रहण और समयबद्ध निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया।हरियाली एवं वातावरणरू आवास विकास विभाग को पेड़ों की छटाई और क्षेत्र की साफ-सफाई तत्काल पूर्ण करने के निर्देश मिले।नगर आयुक्त ने सभी विभागों को स्पष्ट रूप से निर्देश दिया कि सभी तैयारियाँ 14 नवंबर तक हर हाल में पूरी कर ली जाएँ। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विभाग अपना ब्लूप्रिंट प्रस्तुत करे, जिसमें यह स्पष्ट हो कि कौन सा कार्य किस अधिकारी और किस विभाग की जिम्मेदारी है, ताकि किसी भी प्रकार की भ्रम या देरी की स्थिति न बने।

पावर ऑफिसर एसोसिएशन ने विद्युत संशोधन विधेयक भेजी आपत्तियां व सुझाव

उत्तर प्रदेश पावर ऑफिसर्स एसोसिएशन ने ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी विद्युत (संशोधन) विधेयक, 2025 का गहन अध्ययन किया है। संगठन ने इस विधेयक पर गंभीर आपत्तियाँ एवं सुझाव दर्ज कराते हुए कहा है कि प्रस्तावित संशोधन सार्वजनिक विद्युत क्षेत्र, कर्मचारियों तथा उपभोक्ताओं के हितों के प्रतिकूल हैं।

उत्तर प्रदेश पावर ऑफिसर एसोसिएशन के कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा व अध्यक्ष आरपीकेन ने कहा भारत सरकार ऊर्जा मंत्रालय को जो उत्तर प्रदेश के दलित व पिछला वर्ग के शीर्ष प्रतिनिधि संगठन द्वारा आपत्तियां व सुझाव भेजे गए हैं वह बहुत ही हम है जिसे केंद्र सरकार को तत्काल मानते हुए निजीकरण रूपी प्रावधान तत्काल मसौदे से समाप्त कर देना चाहिए। एसोसिएशन की मुख्य आपत्तियाँ एवं टिप्पणियों में कहा गया कि विधेयक में एक ही क्षेत्र में अनेक वितरण लाइसेंसधारकों को साझा नेटवर्क के माध्यम से बिजली आपूर्ति की अनुमति दी गई है। इससे निजी कंपनियाँ सरकारी वितरण नेटवर्क का उपयोग कर लाभ अर्जित करेंगी, जबकि रख-रखाव एवं लागत का बोझ सार्वजनिक उपक्रमों पर रहेगा। यह स्थिति दूरसंचार क्षेत्र में ठैछस् बनाम निजी कंपनियों जैसी असमानता पैदा करेगी।विधेयक में निजी भागीदारी को बढ़ावा दिया गया है, किंतु सामाजिक न्याय, आरक्षण नीति और सार्वजनिक जवाबदेही के सिद्धांतों की अनदेखी की गई है।डॉ. भीमराव अंबेडकर ने 1934 में कहा था कि “विद्युत सदा सार्वजनिक क्षेत्र में रहनी चाहिए।” यह संशोधन उनके विचारों और संविधान की समाजवादी भावना के विपरीत है। इसलिए मसौदे से निजीकरण के प्रस्ताव को तत्काल समाप्त किया जाए।वर्षों की सार्वजनिक निवेश से विकसित वितरण नेटवर्क, ट्रांसफार्मर और उपकेन्द्र जैसी संपत्तियाँ निजी उपयोग हेतु खोली जा रही हैं, जिससे उपभोक्ताओं, सस्ती बिजली व्यवस्था तथा कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।संविधान राज्य को संसाधनों का समान वितरण सुनिश्चित करने और संपत्ति की एकाग्रता रोकने का निर्देश देता है। प्रस्तावित संशोधन इन मूल संवैधानिक सिद्धांतों के विपरीत है। एसोसिएशन की मुख्य मागों में वितरण नेटवर्क साझा करने का प्रावधान तत्काल वापस लिया जाए।बिजली उत्पादन एवं वितरण सार्वजनिक क्षेत्र के नियंत्रण में ही रहे। मसौदे से निजीकरण का प्रस्ताव निरस्त किया जाए। किसी भी निजीकरण संबंधी कदम से पूर्व कर्मचारियों, उपभोक्ताओं और सामाजिक संगठनों से सार्थक परामर्श किया जाए, विधेयक में सामाजिक न्याय, आरक्षण एवं सार्वजनिक जवाबदेही के संवैधानिक सिद्धांतों को स्पष्ट रूप से शामिल किया जाए।एसोसिएशन ने मंत्रालय से अनुरोध किया है कि इन आपत्तियों पर गंभीर विचार कर विधेयक में आवश्यक संशोधन किए जाएँ ताकि विद्युत क्षेत्र की सार्वजनिक प्रकृति, पारदर्शिता और सामाजिक उत्तरदायित्व सुरक्षित रह सके।

बिहार चुनाव के बिजली दरों का होगा धमाका !
उपभोक्ता परिषद ने बिजली दरों में हो रही देर पर जताई आशंका

उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा राज्य में सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद अब बिजली दरों में बढ़ोतरी और निजीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का दबाव विद्युत नियामक आयोग पर बनाया जा रहा है। परिषद को जानकारी मिली है कि कॉरपोरेशन बिहार चुनाव परिणामों के बाद इस प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने की साजिश कर रहा है ताकि इस संवेदनशील मुद्दे पर राजनीतिक सहयोग हासिल किया जा सके। गौरतलब हूं की उत्तर प्रदेश में निजीकरण का पूरा मामला 25 नवंबर 2024 को शुरू किया गया था और यह वही टाइमिंग थी जब महाराष्ट्र में चुनाव खत्म हुआ। उसके दूसरे दिन उत्तर प्रदेश में निजीकरण की बात शुरू हो गई इस बार बिहार चुनाव के बाद जो रणनीति बनाई जा रही है उसे पर उपभोक्ता परिषद की पैनी नजर है।

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि विद्युत अधिनियम 2003 के तहत बिजली दरों की घोषणा अधिकतम 120 दिनों में हो जानी चाहिए। किंतु 9 सितंबर को यह अवधि पूरी होने के बाद भी अब तक लगभग 180 दिन बीत जाने पर भी दरें घोषित नहीं की गई हैं। जो देश में पहली बार हुआ है। इसे संवैधानिक संकट की स्थिति कहा जा सकता है। इसी प्रकार निजीकरण के मामले में भी विद्युत नियामक आयोग ने जून में कमियां निकाल कर उत्तर प्रदेश सरकार को निजीकरण के मसौदे को लौटाया था आज तक उसका जवाब दाखिल नहीं हुआ विद्युत नियामक आयोग में कानून के तहत 90 दिन में जवाब दाखिल हो जाना चाहिए था। एक तरह से अब यह मसौदा संवैधानिक नहीं रहा।वहीं, निजीकरण के प्रस्ताव पर विद्युत नियामक आयोग ने जिन कमियों की ओर संकेत किया था, उन पर पिछले 7 महीनों में भी उत्तर प्रदेश ऊर्जा विभाग व पावर कॉरपोरेशन द्वारा कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया है। यह स्पष्ट करता है कि पावर कॉरपोरेशन राजनीतिक दबाव में कार्य कर रहा है और सरकार के साथ मिलकर बिहार चुनावों के बाद इस पर कार्रवाई की योजना बना रहा है।परिषद अध्यक्ष ने कहाकि“उत्तर प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं का बिजली कंपनियों पर लगभग घ्33,122 करोड़ का सरप्लस है, और इस वित्तीय वर्ष में भी लगभग घ्5,000 करोड़ का अधिशेष निकलेगा। ऐसे में बिजली दरों में किसी भी प्रकार की बढ़ोतरी का कोई औचित्य नहीं है। देश में ऐसा कोई कानून नहीं है जो इस परिस्थिति में बिजली दरें बढ़ाने की अनुमति देता हो। यदि फिर भी दरें बढ़ाने या निजीकरण की साजिश की गई, तो उपभोक्ता परिषद इसका मुंहतोड़ जवाब देगी।”उत्तर प्रदेश राज विद्युत उपभोक्ता परिषद ने स्पष्ट किया है कि वह उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगी और इस साजिश को किसी भी सूरत में सफल नहीं होने देगी।

जवाहर भवन इन्दिरा भवन में सांपों का आतंक

जवाहर भवन इन्दिरा भवन कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष सतीश कुमार पाण्डेय ने बताया कि जवाहर भवन इन्दिरा भवन परिसर के चारों तरफ जंगली पेड़ तथा वर्षों पुरानी गाड़ियों की वजह से जहरीले सांपों का जमावड़ा बढ़ता जा रहा है। जिससे शासकीय कर्मचारी तथा सुरक्षा गार्डों में भय का माहौल बना हुआ है।
उन्होंने बताया कि इस संबंध में महासंघ ने व्यवस्थाधिकारी को भी पत्र लिखा था कि कर्मचारी को सुरक्षा प्रदान करने के लिए नियम अनुसार कार्रवाई करें परंतु अभी तक इस संबंध में कोई प्रगति नहीं हुई है। श्री पाण्डेय  ने राज्य संपत्ति अधिकारी से गुहार लगाई है कि दोनों भवनों में कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए चारों तरफ जंगली पेड़ कटवाने कबाड़ गाड़ियों को हटवाने चारों तरफ पड़े कबाड़ को हटवाने तथा जहरीले सांपों को पकड़वाने की कार्यवाही कराएं अन्यथा महासंघ मूलभूत जन समस्याओं को लेकर आंदोलन के लिए बाध्य होगा।

बिजली कर्मियों को संघर्ष समिति का रेड एलर्ट
-निजीकरण करने की कोशिश का बिजली कर्मी करेंगे पुरजोर विरोध

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा है कि केन्द्र सरकार से मिलने वाली वित्तीय सहायता की शर्त के आधार पर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण किए जाने का पुरजोर विरोध किया जाएगा। संघर्ष समिति ने इसे सीधे-सीधे ब्लैकमेल की संज्ञा दी है। बिहार चुनाव के बाद पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का टेंडर होने की संभावना के समाचार के बाद संघर्ष समिति ने उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मियों और अभियंताओं को संघर्ष के लिए तैयार रहने का रेड अलर्ट जारी किया है।संघर्ष समिति ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की है कि वह सशर्त वित्तीय सहायता दिए जाने के ऐसे किसी भी बेल आउट पैकेज को अस्वीकार कर दें।यह उत्तर प्रदेश के स्वाभिमान से जुड़ा हुआ मामला है।
संघर्ष समिति ने बताया कि यह पता चला है कि उप्र के मुख्य सचिव और ऊर्जा विभाग के आला अधिकारियों की एक टीम ने कल शाम पीएमओ में बिजली सलाहकार श्री तरुण कपूर से मिलकर उनके समक्ष पूर्वांचल विद्युत निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया की प्रगति का प्रजेंटेशन किया है। यह जानकारी मिली है कि इस मीटिंग में ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स द्वारा सुझाए गए बेल आउट पैकेज पर चर्चा हुई और उप्र के मुख्य सचिव ने इस बेल आउट पैकेज की शर्तों के आधार पर उप्र में पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण पर सहमति दे दी है। संघर्ष समिति ने बताया कि ग्रुप आफ मिनिस्टर्स द्वारा सुझाए गए बेल आउट पैकेज की शर्तों के अनुसार राज्य सरकारों को तीन विकल्प दिए जाएंगे। इनमें से कोई एक विकल्प मानने पर ही केंद्र सरकार वित्तीय सहायता देगी। पहला विकल्प यह है कि विद्युत वितरण निगमों की 51ः इक्विटी निजी क्षेत्र को बेच दी जाय । दूसरी शर्त है कि 26ः इक्विटी निजी क्षेत्र को बेची जाए और पूरा प्रबंधन निजी क्षेत्र को दे दिया जाय। तीसरा विकल्प केवल उन विद्युत वितरण कंपनियों के लिए है जो ए ए ए कैटेगरी में आते हैं। ऐसे विद्युत वितरण निगमों को अपने को स्टॉक एक्सचेंज में एनालिस्ट कराना होगा। संघर्ष समिति ने कहा कि तीनों विकल्प निजीकरण के विकल्प हैं और केंद्र सरकार द्वारा वित्तीय सहायता देने की शर्त जोड़कर निजीकरण थोपना आर्म ट्विस्टिंग और ब्लैकमेल है। संघर्ष समिति ने बताया कि यह जानकारी मिली है कि बिहार चुनाव के बाद किसी भी समय इन शर्तों के दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर दिए जाएंगे और पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम तथा दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की 51ः इक्विटी बेचने के टेंडर प्रकाशित किए जाएंगे। इन संभावनाओं को देखते हुए संघर्ष समिति ने प्रदेश के सभी बिजली कर्मचारियों, संविदा कर्मियों, जूनियर इंजीनियरों और अभियंताओं को रेड अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि वह ऐसी किसी संभावना के विरोध में निर्णायक संघर्ष करने के लिए पूरी तैयारी रखें। ध्यान रहे संघर्ष समिति का निर्णय है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का टेंडर होते ही प्रदेश के तमाम बिजली कर्मी और अभियंता सत्याग्रह करते हुए सामूहिक जेल भरो आंदोलन प्रारंभ करेंगे जिसकी सारी जिम्मेदारी सरकार और प्रबंधन की होगी। आज अवकाश का दिन होने के कारण संघर्ष समिति ने टोलियां बनाकर जनपदों में आवासीय कॉलोनी में जाकर बिजली कर्मियों से व्यापक जनसंपर्क अभियान किया। कल रविवार के दिन भी यही जनसंपर्क अभियान जारी रहेगा।

Aaj National

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *