-मुक़दमा दर्ज होने के बाद मौज कर रहे आरोपी,पुलिस नहीं कर रही कार्रवाई
-आरोपी गवाहों को भी दे रहे धमकियां,नहीं हो रही पीड़ित की सुनवाई
- REPORT BY:AAJ NATIONAL NEWS || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK
लखनऊ।भूमि विवाद से जुड़े मामलों को पुलिस हलके में निपटा रही है, जिसके चलते शातिर लोग गवाहों को गवाही न देने के लिए तरह से

डराते और धमकाने के साथ ही जान से मारने की धमकी दे रहे है।पूर्व के मुकदमें में कार्रवाई न होने से पीड़ित परेशांन है।अपराधियों को जेल न भेजे जाने से उनके हौसले बुलंद है।उन्होंने गवाहों को गवाही न देने के लिए रात्रि 11 बजे घर में घुस कर मारा पीटा तथा जान से मारने की धमकी भी दी।
यह आरोप ग्राम ग्राम मलूकपुर ढकवा परगना व तहसील मोहन लालगंज की रहने वाली शान्ती देवी पत्नी स्व.सर्वेश कुमार का है।उन्होंने बताया उनके ससुर सत्रोहन पुत्र गजोधर की मृत्यु 06 जुलाई 2018 को हो गई थी।उनके पति सर्वेश कुमार की भी मृत्यु 05 मई 2022 को ट्रैक्टर दुर्घटना में हो गई थी।शान्ती देवी के पति ने अपने जीवन काल में अपने पिता सत्रोहन की मृत्यु के उपरांत परिवार की सम्पत्ति में भूमि की वरासत से सम्बन्धित मुकदमा तहसीलदार न्यायिक तहसील मोहन लाल गंज लखनऊ की कोर्ट में वाद संख्या टी 201810460313416 दिनांक 12 अक्टूबर 2018 को दाखिल किया था जिसका न्यायालय द्वारा अन्तिम आदेश 05 सितम्बर 2019 को पारित किया गया था जिसके आवेदन में सिर्फ दो नाम सर्वेश कुमार व राज पाल ही थे जिसमें आपत्ति सिर्फ गुड़िया द्वारा ही की गई थी जिसका अनुपालन तहसील द्वारा आज तक नहीं किया गया।पीड़ित का आरोप है कि उसके पति की मृत्यु उपरांत भू माफिया जेठ राजपाल द्वारा ससुर सत्रोहन के भूमि की वरासत का पुनः आवेदन आन लाइन किया गया जिसमें सुमन देवी का नाम दर्ज करायें जाने के कारण का विवाद था जिसे तत्कालीन रा.नि. नें विवादित घोषित कर न्यायालय तहसीलदार मोहन लाल गंज की कोर्ट में भेज दिया गया जो वाद संख्या टी 202210460309609 दिनांक 02 मई 2022 को दर्ज हो कर स्तानांतरित न्यायालय नायब तहसीलदार गोसाईं गंज के यहाँ दिनांक 10 मई 2022 प्रचलित हुआ।
शान्ती देवी का आरोप है वाद विवादित होने तथा पैरवी न किये जाने के कारण वाद का निस्तारण नहीं हो सका तब शान्ती देवी द्वारा वकील के जरिये माध्यम से पक्षकार प्रार्थना पत्र के द्वारा वाद की सुनवाई कराते हुए बाद नोटिस आपत्ति दाखिल की। जिसमें शान्ती देवी की आपत्ति सिर्फ सुमन देवी के ही विरूद्ध थी।शान्ती देवी का कहना था कि सुमन देवी का विवाह स्व.प्रेम चन्द्र के साथ विधिक रुप से नहीं हुआ है गैर विधिक है। विपक्षी गणों में राज पाल ने न्यायालय में सुमन देवी को स्व.प्रेम चन्द्र की पत्नी कहा तथा सुमन देवी ने स्वयं को प्रेम चन्द्र की पत्नी होना बताया तथा साक्ष्यों में प्रधान का झूठा प्रमाण पत्र व झूठे गवाह न्यायालय में पेश किए न्यायालय द्वारा दौराने मुकदमा शान्ती देवी द्वारा दाखिल परिवार रजिस्टर की नकल का सत्यापन खण्ड विकास अधिकारी गोसाईंगंज से कराया गया जिसमें सुमन देवी का नाम दर्ज अभिलेख नहीं था की पुष्टि हुई, राज पाल द्वारा दौराने मुकदमा गैर विधिक पुनः वरासत का आन लाइन आवेदन किया गया तथा वर्तमान लेखपाल व रा.नि.से मिली भगत कर क्षेत्राधिकार से भिन्न वरासत प.क.11 स्वीकृति आदेश 09 जून 2023 रा.नि.द्वारा कर दिया गया जो बाद विरोध न्यायालय स्थगन आदेश के उपरांत अन्तिम आदेश 21फरवरी 2024 के माध्यम से साक्ष्य के अभाव तथा बल हीन होने का हवाला देते हुए बहाल कर दिया गया।
पीड़ित शान्ती देवी का आरोप है कि न्यायालय नायाब तहसीलदार गोसाईं गंज,मोहन लाल गंज द्वारा भी न्यायालय पत्रावली की कार्रवाई में विपक्षी गणों से विवाह से सम्बन्धित के न तो कोई साक्ष्य मांगे गए और न विपक्षी गणों ने दिये यहां तक कि न्यायालय द्वारा सुमन देवी को पक्षकार बनाये जाने का प्रार्थना पत्र तक भी नहीं लिया गया पत्रावली बाद बहस सुरक्षित आदेश पर लेने के बाद सुरक्षित आदेश पत्रावली पर लेखपाल की कोई रिपोर्ट पत्रावली पर नहीं थी जब शान्ती देवी के अधिवक्ता नें कुछ अन्य साक्ष्य दिये गये तो देखा कि पत्रावली पर बिना रा.नि.संस्तुति के लेखपाल रिपोर्ट भी प्रस्तुत है अनुचित आदेश किए जाने के शक पर शान्ती देवी ने वाद ट्रांसफर प्रार्थना पत्र 212(2) न्यायालय उपजिलाधिकारी के यहां वाद संख्या टी 202510460 303550 दिनांक 27 जनवरी 2024 योजित कर दिया गया जिसकी अनापत्ति आख्या अवर न्यायालय द्वारा उपजिलाधिकारी के न्यायालय को प्रेषित की गई। इसके 2 माह से भी कम समय में वाद का अन्तिम आदेश उपजिलाधिकारी न्यायालय द्वारा दिनांक 20 मार्च 2024 कर दिया गया किन्तु अवर न्यायालय द्वारा उपजिलाधिकारी न्यायालय से पहले ही जानबूझकर अपना अन्तिम आदेश दिनांक 21 फरवरी 2024 करते हुए उपजिलाधिकारी के पारित आदेश को निष्प्रभावी कर दिया गया जब कि प्रकरण पर न्यायालय की समस्त जानकारी द्वारा अधिवक्ता कर्मचारी आलोक व अखिलेश को समय-समय पर दी जा रही थी किन्तु अवर न्यायालय द्वारा पुनर्स्थापन प्रार्थना-पत्र भी नहीं स्वीकार किया गया।
शान्ती देवी का आरोप है कि अवर न्यायालय नायाब तहसीलदार गोसाईं गंज अन्तिम आदेश पर प्रार्थिनी द्वारा साक्ष्य संकलन कर उपजिलाधिकारी तहसील मोहनलालगंज लखनऊ में वाद संख्या टी 202410460319556 अन्तर्गत धारा 35(2) योजित किया गया अपील में विपक्षी गण उपस्थित हुए तथा अपनी आपत्ति दाखिल की गई बाद वादी आपत्ति जवाब, बहस उपरांत न्यायालय द्वारा पत्रावली आदेश हेतु सुरक्षित कर आदेश में समस्त तथ्य उल्लिखत किए जाने के उपरांत भी उपजिलाधिकारी न्यायालय द्वारा न तो सत्यापित खण्ड विकास अधिकारी गोसाईंगंज के द्वारा प्रस्तुत परिवार रजिस्टर की नकल का संज्ञान लिया गया और न ही कूट रचित दाखिल न्यायालय के साक्ष्यों का ही संज्ञान लिया गया यहां तक कि अपीलीय न्यायालय द्वारा सुमन देवी से विवाह से सम्बन्धित का कोई साक्ष्य भी नहीं मांगा गया अन्य संकलित साक्ष्यों को भी नज़र अंदाज़ करते हुए अपीलीय न्यायालय द्वारा भी विपक्षी गणों से मिली भगत कर दिनांक 27 अगस्त 2025 को अन्तिम आदेश पारित कर दिया गया आदेश में राज पाल के अतिरिक्त अन्य किसी को पक्षकार न बनाए जाने के कारण अपील को दोष पूर्ण मानते हुए अपील बलहीन होने का हवाला दे कर निरस्त कर दिया गया जिसके विरुद्ध पीड़िता नें प्रमुख सचिव नियुक्त को दिनांक 20 सितम्बर 2025 को प्रार्थना पत्र के माध्यम से शिकायत की गई जिसमें तत्कालीन पेशकार का स्थानांतरण कर दिया गया अथवा करा लिया गया।
पीड़िता पीड़ित शान्ती देवी का आरोप है कि उसके मामले में वरासत में सुमन देवी पत्नी स्व. दिनेश, राज पाल पुत्र स्व. सत्रोहन, वर्तमान ग्राम प्रधान संजय मलूकपुर ढकवा परगना व तहसील मोहनलालगंज जिला लखनऊ तथा तत्कालीन राजस्व निरीक्षक व वर्तमान रा.नि.लेखपाल तथा अन्य सरकारी कर्मचारी भी दोषी है जिनके द्वारा जानबूझकर कूट रचित दस्तावेजों से भूमि की वरासत दर्ज कर भूमि विक्रय किए जाने का अपराध कारित किया गया है जिसकी शिकायत पर पुलिस द्वारा मुकदमा अपराध संख्या 0433 दिनांक 02/11/2025 धारा 340(2),336(3),338,318(4) बी.एन.एस.एस.2023 दर्ज थाना मोहनलालगंज में किया है।पीड़िता का आरोप है कि विपक्षी गण इस मामले में पहले भी एक अन्य प्रकरण में विपक्षी राजपाल, चंद्रपाल पुत्र गण शत्रोहन व सत्रोहन पुत्र गजोधर भू सरकारी भूमि को अन्य व्यक्ति को खड़ा कर भूमि की रजिस्ट्री किए जाने के विरुद्ध मु.अ.सं0 0406 दिनांक 09.07.2017 धारा 420,467,468471,506 थाना गोसाईगंज में दर्ज है। जिसमें विपक्षी राजपाल द्वारा जेल में ही मुख्य आरोपी का मर्डर करवा दिया गया था।
पीड़िता का आरोप है कि बीती दिनांक 23 नवम्बर 2025 दिन रविवार समय रात्रि करीब 11:00 बजे प्रकरण के गवाह सोनू पुत्र स्व. सियाराम व संजय पुत्र स्व. सुखई जब अपने घर पर खाना खा पी कर आराम कर रहे थे तभी विपक्षी एक राय होकर उनके घर में घुसकर उन्हें गवाही देने के बाबत बुरी तरह से मारा पीटा तथा गवाही देने से मना किया न मानने पर जान से मारने की धमकी दी।पीड़िता शान्ती देवी का आरोप है कि विपक्षी काफी दबंग व सोरे पुस्त किस्म के पेशेवर अपराधी है पुलिस द्वारा उन्हें गिरफ्तार कर जेल ना भेजने के कारण उसके बच्चों के भी जान माल का खतरा है।उन्होंने इस मामले की रिपोर्ट दर्ज करने की मांग की है।