LUCKNOW:बिजली कम्पनियों की परिसंपतियों को लेकर हो रही साजिश,क्लिक करें और भी खबरें

NEWS NO-01-उपभोक्ता परिषद ने देश की टॉप फाइव बिजली कंपनियों की परिसंपत्तियों का दिया व्यौरा

  • REPORT BY:PREM SHARMA||EDITED BY:AAJNATIONAL NEWS

लखनऊ। 42 जनपदों के निजीकरण को लेकर देश के बड़े उद्योगपति इतनी दिलचस्पी क्यों दिखा रहे है, इसका खुलासा उपभोक्ता परिषद ने करते हुए बताया कि देश में बिजली कंपनियों की परिसंपत्तियों पर बड़े निजी घरानों की नजर है। जिसमें से उत्तर प्रदेश भी प्रमुख रूप से चिन्हित है। सभी को पता है कि उत्तर प्रदेश की जो बिजली कंपनियों की परिसंपत्तियां है यदि उनका सही आकलन किया जाएगा तो देश का कोई भी निजी घराना दो जनपद को नहीं खरीद सकता। यहां पर उत्तर प्रदेश में 42 जनपदों को पांच कंपनियों मे बांटा जा रहा है। ऐसे में एक कंपनी में आठ जनपद की परसंपत्तियां शामिल होगी। इसके बावजूद  किसी भी देश के निजी घराने को खरीदने की हैसियत नहीं है। इसीलिए ग्रांट थ्रांनटन व पावर कॉरपोरेशन के कुछ उच्च अधिकारी बड़ा खेल कर रहे है। उत्तर प्रदेश में बात कर ले तो दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की जो कुल परसंपत्तियां 31 मार्च 2024 तक 36762 करोड़ और वही पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम की 54164 करोड़ परसंपत्तिया है। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम को यदि अकेले देखा जाए तो देश में किसी भी बिजली कंपनी के पास अकेले इतनी परिसंपत्तियां हैसियत नहीं है।
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन भारत सरकार की मई 2025 में जो बिजली कंपनियों की परफॉर्मेंस रिपोर्ट जारी हुई है। उसमें स्वतः कोई भी देख सकता है कि उत्तर प्रदेश की बिजली कंपनियां की परसंपत्तियां देश में टॉप फाइव में दूसरे नंबर पर है। पूरे देश में 31 मार्च 2024 को जो बिजली कंपनियों की राज्य सेक्टर में परिसंपत्तियां हैं इसका खुलासा उपभोक्ता परिषद कर रहा। पूरे देश की राज्य सेक्टर में जहां कुल परसंपत्तियां लगभग 13 लाख 60912 करोड़ है। पूरे देश में प्राइवेट सेक्टर की कुल परिसंपत्तियां केवल 87 हजार 58 करोड़ है। उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि उत्तर प्रदेश में जिस प्रकार से परिसंपत्तियों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है वह बहुत ही गंभीर मामला है इस पर तत्काल राज्य सरकार को हस्तक्षेप करना चाहिए।

एक नजर में टाप फाईव

राज्य सेक्टर                      परिसंपत्तिया (एसेट)
महाराष्ट्र                          1 लाख 87450 करोड़
उत्तरप्रदेश                        1 लाख 77535 करोड़
तमिलनाडु                        1 लाख 59283 करोड़

राजस्थान                        1लाख 02053 करोड़
आंध्रप्रदेश                        96 हजार 598 करोड़

NEWS NO-02-चेतावनी सभा में बिजली कर्मियों ने लिया सामूहिक जेल भरो का संकल्प

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के आह्वान पर आज प्रदेश भर में बिजली कर्मियों ने पॉवर कारपोरेशन में लागू आपातकाल के विरोध में समस्त जनपदों, परियोजनाओं और राजधानी लखनऊ में सभा कर चेतावनी दिवस मनाया। वक्ताओं ने पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन को चेतावनी दी कि उत्पीड़न, दमन और झूठे आंकड़ों के दम पर बिजली का निजीकरण नहीं होने दिया जायेगा। चेतावनी सभा में बिजली कर्मियों ने निजीकरण के विरोध में सामूहिक जेल भरो अभियान चलाने का संकल्प लिया।
संघर्ष समिति ने स्टेट विजिलेंस के माध्यम से संघर्ष समिति के शीर्ष पदाधिकारियों का उत्पीड़न किये जाने की घोर भर्त्सना करते हुए पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन डॉ आशीष गोयल की परिसम्पत्तियों की विजिलेंस से जांच कराये जाने की मांग की। संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कारपोरेशन के चेयरमैन द्वारा उत्पीड़न की दृष्टि से हजारों ट्रांसफर किये गये, संविदा कर्मियों को निकाला गया और कर्मचारी सेवा नियमावली में अलोकतांत्रिक संशोधन कर बिना जांच और बिना सफाई का अवसर दिये सेवा से बर्खास्त करने का तानाशाहीपूर्ण संशोधन किया गया। इन सबसे बिजली कर्मियों को डराने में असफल रहने पर चेयरमैन ने अब स्टेट विजिलेंस के जरिये एफ आई आर कराने का रास्ता निकाला है जिससे बिजली कर्मियों में उबाल आ गया है।
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की कि पावर कारपोरेशन के चेयरमैन डॉ आशीष गोयल की जयपुर, रानीखेत, ग्रेटर नोएडा, नोएडा, मथुरा के मकानों, जमीन और अन्य परिसम्पत्तियों की निष्पक्ष विजिलेंस जांच करायी जाये। उन्होंने कहा कि पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांलच विद्युत वितरण निगम के निजीकरण हेतु इतने उतावले हो गये हैं कि वे अब उत्पीड़न के नाम पर संघर्ष समिति के पदाधिकारियों पर मनगढ़ंत एफआईआर कराने पर आमादा हो गये हैं। उन्होंने कहा कि प्रबन्धन के इस कदम से बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा व्याप्त हो गया है।  विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के पदाधिकारियों ने आज यहां बताया कि पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन ने बड़े पैमाने पर मनमाने ढंग से स्थानान्तरण कर बिजली कर्मियों का उत्पीड़न किया। चेयरमैन के निर्देश पर अत्यन्त अल्प वेतन भोगी संविदा कर्मियों की छंटनी की जा रही है और फेसियल अटेंडेंस के नाम पर उनका वेतन काटा जा रहा है। उत्पीड़न की इन कार्यवाहियों से तथा झूठे आंकड़े देकर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की साजिश बिजली कर्मी कामयाब नहीं होने देंगे।

संघर्ष समिति ने बताया कि 22 जून की बिजली महापंचायत से बौखलाये पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन और शासन के कुछ अधिकारियों ने मिली भगत कर स्टेट विजिलेंस के माध्यम से संघर्ष समिति के कुछ बड़े पदाधिकारियों पर एफ आई आर दर्ज करायी है। एफ आई आर के माध्यम से बिजली कर्मियों को डराने और उत्पीड़न की कार्यवाही के पीछे केवल निजीकरण है। उन्होंने बताया कि आय से अधिक सम्पत्ति के मामले में प्रबन्धन एवं प्रशासन द्वारा झूठे और मनगढ़ंत आंकड़ों के आधार पर एफ आई आर करायी गयी है। यहां तक कि एफआईआर में आंकड़ों के मैनीपुलेशन में जोड़ घटाव की गलती साफ दिखाई दे रही है जो इस बात का प्रमाण है कि यह एफआईआर जल्दबाजी में डराने और बदनाम करने के लिए की गयी है।

NEWS NO-03-डीआरएम के समक्ष कमेटी सदस्य ने यात्रियों से जुड़े अहम मुद्दे उठाए

लखनऊ मंडल के मंडल रेल प्रबंधक से जोनल रेलवे यूजर्स कंसल्टेटिव कमेटी के सदस्य दीपक भारद्वाज ने भेंट की और यात्रियों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को विस्तार से उठाया। इस अवसर पर लखनऊ से समिति के सक्रिय सदस्य शौर्य पांडे भी उपस्थित रहे।

बैठक में चारबाग स्टेशन पर वाटर कूलर की व्यवस्था करने की बॉत रखते हुए श्री भारद्वाज ने बताया कि चारबाग स्टेशन पर पीने के पानी की व्यवस्था अपर्याप्त है। गर्मी के मौसम में यात्रियों को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। प्लेटफॉर्मों पर और अधिक वाटर कूलर लगाने और मौजूदा इकाइयों के नियमित रखरखाव की मांग की गई।स्टेशनों पर बंदरों के उत्पात की समस्या को गंभीर बताया गया। यात्रियों के खाने के सामान को छीना जाना, सामान को नुकसान पहुंचाना और बच्चों व बुजुर्गों को डराना आम घटनाएं बन चुकी हैं। डीआरएम से अनुरोध किया गया कि वन विभाग के सहयोग से प्रभावी समाधान निकाला जाए। यह ध्यान दिलाया गया कि कुछ महत्वपूर्ण ट्रेनों के स्टेशनों पर ठहराव का समय बहुत कम है, जिससे विशेषकर बुजुर्ग और भारी सामान वाले यात्रियों को चढ़ने-उतरने में कठिनाई होती है। गाड़ी संख्या 12553 – वैशाली एक्सप्रेस, गाड़ी संख्या 12555 – गोरखधाम एक्सप्रेस, गाड़ी संख्या 15273- सत्याग्रह एक्सप्रेस के लिए ठहराव समय बढ़ाने की मांग की गई।
गाड़ी संख्या 15026 (आनंद विहार – मऊ एक्सप्रेस) का क्षेत्रीय यात्रियों की सुविधा के लिए का मलिपुर स्टेशन पर इस गाड़ी का ठहराव दिए जाने की मांग रखी गई। यह स्टेशन स्थानीय यात्रियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बनता जा रहा है और इससे संपर्क व्यवस्था बेहतर होगी। बैठक में यह भी कहा गया कि कई ट्रेनों का कुल यात्रा समय बढ़ गया है, जिससे यात्री परेशान हैं। समय-सारणी की समीक्षा कर ट्रेनों की संचालन गति में सुधार की आवश्यकता जताई गई।डीआरएम ने सभी मुद्दों को गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि इन बिंदुओं की विस्तार से समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। संबंधित विभागों को सूचित कर समाधान की दिशा में ठोस प्रयास किए जाएंगे।

NEWS NO-04पति की मृत्यु के 10 वर्ष उपरान्त पत्नी को दिलाई पारिवारिक पेंशन बुकस

स्वर्गीय धर्मेन्द्र कुमार पुत्र स्व. फूल चंद्र ,द्वितीय श्रेणी लिपिक कर विभाग जोन-6 की मृत्यु 24 जून 2016 को हो गयी थी। स्व. धर्मेन्द्र कुमार की व्यक्तिगत पत्रावली सेवा-पुस्तिका गुम हो जाने के कारण लाभग्राही सारिका पत्नी स्व. धर्मेन्द्र को पारिवारिक पेंशन विगत 10 वर्षो से प्राप्त नहीं हो पा रही थी। नगर निगम कर्मचारी संघ,लखनऊ के प्रयास एवम् नगर निगम प्रशासन के सहयोग से डुप्लीकेट सेवा-पुस्तिका बनवा कर आज 27 जून 2025 को  सारिका पत्नी स्व. धर्मेन्द्र को पारिवारिक पेंशन की कार्यवाही पूर्ण करा कर पेंशन-बुक प्राप्त करायी गई। उनकी पत्नी को नवनिर्वाचित महामंत्री  और मंत्री रेखा यादव ने पेंषन बुक हस्तगत कराई।
नगर निगम कर्मचारी संघ के अध्यक्ष आनन्द वर्मा द्वारा कर्मचारी हित में किये कार्य हेतु नगर निगम प्रशासन का धन्यवाद् ज्ञापित किया गया तथा प्रशासन से माँग की गई है। जिन कर्मचारियों की व्यक्तिगत पत्रावली-सेवा-पुस्तिका गुम होने के कारण उनको सेवा सम्बन्धी लाभ प्रदान नहीं हो पा रहा है। उनकी डुप्लीकेट सेवा-पुस्तिका बनवा कर सेवा सम्बन्धी लाभ प्रदान करें। श्री वर्मा ने कहा कि मृतक आश्रितों से सम्बंधित लम्बित प्रकरणों को लेकर संघ निरन्तर प्रयासरत रहता है कि कोई भी मृतक आश्रित भटकाव का शिकार न हो।

Aaj National

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