LUCKNOW:निजीकरण से 76500 बिजली कर्मियों की नौकरी पर खतरा,क्लिक करें और भी खबरें

  • REPORT BY:PREM SHARMA || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK 

लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि यदि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण किया गया तो लगभग 76500 सरकारी कर्मचारियों की नौकरी पर खतरा मंडराने लगेगा। आज निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के 267 वें दिन बिजली कर्मियों ने निजीकरण रोकने के लिये निर्णायक संघर्ष का संकल्प लिया।संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली की बढ़ी हुई मांग को देखते हुए बिजली कर्मी आंदोलन के साथ-साथ उपभोक्ताओं की समस्याओं को भी सर्वाेच्च प्राथमिकता पर अटेंड कर रहे हैं । संघर्ष समिति ने कहा कि उनका नारा है – सेवा करेंगे और हक भी लेंगे।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में लगभग 17500 और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम में लगभग 10500 नियमित कर्मचारी कार्य कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त इन दोनों विद्युत वितरण निगमों में लगभग 50 हजार संविदा कर्मी काम कर रहे हैं। संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष द्वारा निजीकरण के बाद बिजली कर्मियों को तीन विकल्प दिए गए हैं। पहला विकल्प यह है कि वे निजी कंपनी की नौकरी स्वीकार कर लें। दूसरा विकल्प यह है कि वे अन्य विद्युत वितरण निगमों में वापस आ जाए और तीसरा विकल्प यह है कि वे स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति लेकर घर चले जाएं। संघर्ष समिति ने कहा कि ऐसे बिजली कर्मी बहुत बड़ी संख्या में हैं जो निजी कंपनियों की नौकरी छोड़कर पावर कारपोरेशन में सरकारी नौकरी करने आए थे। अब कई कई साल की नौकरी के बाद उनसे यह कहना कि वे फिर निजी कंपनी में चल जाए यह पूरी तरह अन्यायपूर्ण है और बिजली कर्मचारियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। दूसरे विकल्प के रूप में यदि बिजली कर्मी अन्य विद्युत वितरण निगमों में वापस आते हैं तो वे सरप्लस हो जाएंगे और उनकी छटनी की नौबत आ जाएगी। इतना ही नहीं तो पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम से अन्य विद्युत वितरण निगमों में आने वाली बिजली कर्मी नियमानुसार वरिष्ठता क्रम में 2025 बैच के नीचे अर्थात सबसे नीचे रखे जाएंगे। स्वाभाविक है कि सरप्लस होने पर सबसे पहले इन बिजली कर्मियों की ही छटनी होगी। संघर्ष समिति ने दिल्ली का उदाहरण देते हुए बताया कि वर्ष 2002 में निजीकरण के बाद दिल्ली के विद्युत वितरण निगमों में कुल 18097 बिजली कर्मी कार्यरत थे। निजीकरण के एक वर्ष के अंदर-अंदर निजी घरानों के उत्पीड़न से तंग आकर 8190 बिजली कर्मियों ने सेवानिवृत्ति ले ली। इस प्रकार दिल्ली में निजीकरण के एक साल के अंदर ही अंदर-अंदर 45ः बिजली कर्मी सेवानिवृत्ति लेकर घर चले गए। तब बिजली कर्मचारियों को पेंशन मिलती थी। अब पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम में कार्यरत 90ः बिजली कर्मचारियों को पेंशन नहीं मिलती वे सेवा निवृत्ति लेकर कहां जाएंगे ?

संयुक्त पेंशनर्स कल्याण समिति ने किया मंथन

डिप्लोमा इंजीनियर संघ भवन सभागार में संयुक्त पेंशनर्स कल्याण समिति, उत्तर प्रदेश की दो दिवसीय आयोजित बैठक आज संपन्न हुई। जिसमें प्रांतीय पदाधिकारी एवं संबद्ध संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ प्रदेश के विभिन्न मंडलों एवं जनपदों के संयोजकों ने भी प्रतिभाग किया। बैठक में मुख्य रूप से केंद्र सरकार द्वारा पारित वित्तीय वैलिडेशन एक्ट में पेंशनर्स के हितों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करने वाले प्रावधानों के विरुद्ध पेंशनर संगठनों द्वारा 23 जून को प्रधानमंत्री को जिलाधिकारी के माध्यम से भेजे गए ज्ञापन के संबंध में चर्चा की गई। बैठक में इस बात पर भी विचार किया गया कि अगर केंद्र सरकार द्वारा सातवें वेतन आयोग की तरह आठवें वेतन आयोग में भी पेंशनर्स के हितों का ध्यान रखा गया तो इसका वृहद स्तर पर स्वागत किया जाएगा अन्यथा प्रदेश ही नहीं देशभर में इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा। बैठक की अध्यक्षता सेवानिवृत प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष सत्यदेव सिंह और संचालन एन पी त्रिपाठी, संयोजक, द्वारा किया गया।
उक्त जानकारी देते हुए संयुक्त पेंशनर्स कल्याण समिति के सहसंयोजक प्रचार ओंकार नाथ तिवारी द्वारा बताया गया कि बैठक में ऑल इंडिया राज्य पेंशनर्स महासंघ के अध्यक्ष पी के शर्मा तथा पूर्व अध्यक्ष शिव शंकर दुबे के अतिरिक्त समिति के सहसंयोजक क्षमा नाथ दुबे, कोषाध्यक्ष भगवान सिंह वर्मा, सेवानिवृत्त पी पी एस संघ के उपाध्यक्ष महेंद्र त्रिपाठी, वार्डे के अध्यक्ष आर के भाटिया व कार्यकारी अध्यक्ष दिवाकर राय, महामंत्री बलवंत प्रसाद,पी डी एस के महामंत्री रामसनेही यादव, सेवानिवृत्त प्राथमिक शिक्षक संघ के महामंत्री गुलाबचंद तिवारी, अंबेश श्रीवास्तव, आर बी शुक्ला, डा जानकी शरण शुक्ला, जयवीर सिंह, ए के पांडे, बी एन मिश्रा, चंद्रिका प्रसाद त्रिपाठी, कैलाश नाथ द्विवेदी, अमृतलाल साहू, एस के मेहरोत्रा, के बी त्रिपाठी आदि ने प्रमुख रूप से अपने विचार व्यक्त किये।

उपभोक्ता परिषद के सवालों में उलझी बिजली कम्पनियॉ
-दोनों बिजली कंपनियों ने आयोग को लिखित में कहा अभी सैद्धांतिक अनुमति

उपभोक्ता परिषद द्वारा निजीकरण के सम्बंध में रखे गए तर्क और तथ्यों के सामने निजीकरण की कगार में खड़ी कम्पनियॉ उलझ गई है। दोनों कम्पनियों ने अपने लिखित जबाब में कहा है कि अभी सरकार की सैद्धांतिक सहमति मिली है। उपभोक्ता परिषद ने कहा भ्रष्टाचार में फसता देख अपने को पावर कॉरपोरेशन व दोनों बिजली कंपनियों ने उपभोक्ता परिषद के सवालों पर कोई जवाब न देकर यह कहकर मामले को दबाने की कोशिश की की अभी तो केवल अध्ययन कराया जा रहा है भाई जब अध्ययन हो रहा है तो टेंडर व एनर्जी टास्क फोर्स क्या कर रही थी।उपभोक्ता परिषद ने उत्तर प्रदेश सरकार व पावर कॉरपोरेशन से उठाई मांग कहा निजीकरण पर जो ग्रांट थॉर्नटन अध्ययन कर रहा है उसकी रिपोर्ट की जाए सार्वजनिक और यह भी बताएं पावर कॉरपोरेशन की पूर्व में तत्कालीन मुख्य सचिव सहित आधा दर्जन आईएएस नियामक आयोग में अध्ययन करने गए थे।

प्रदेश के दक्षिणांचल व पूर्वाचल वाले 42 जनपदों के निजीकरण का मुद्दा उपभोक्ता परिषद ने बिजली दर की सभी बिजली कंपनियों की सुनवाई में जोर-जोर से उठाया और कहा या बहुत बड़ा घोटाला है।कम लागत में बिजली कंपनियों को देश के बड़े निजी घरानो को बेचा जा रहा है यह विद्युत अधिनियम 2003 के प्रावधानों का उल्लंघन है। ग्रांट थ्रांटन नमक कंसल्टेंट जिसे पावर कारपोरेशन ने चयनित किया है वह अमेरिका रेगुलेटर द्वारा रुपया 40000 डॉलर की पेनल्टी में दोषी पाया गया है। झूठा शपथ पत्र देकर पावर कारपोरेशन में टेंडर लिया जो पहले भ्रष्टाचार है साथ ही बिजली कंपनियों की बहुत कम लागत केवल 65 00 करोड़ रिजर्व विड प्राइस सभी पांचो बिजली कंपनियों की तय करते हुए देश के बड़े निजी घरानों को लाभ देने की साजिश की गई है। जिस पर लिखित आपत्तियां बिजली दर की सुनवाई में दाखिल की थी जिस पर उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग द्वारा प्रदेश की दक्षिणांचल पूर्वांचल सहित पावर कॉरपोरेशन से जवाब तलब किया गया था और सभी आपत्तियों पर जवाब मांगा गया था। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष हुआ राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन व प्रदेश की दोनों बिजली कंपनियां दक्षिणांचल व पूर्वाचल उपभोक्ता परिषद के सवालों से इतना परेशान हो गई है कि उनके द्वारा निजीकरण पर उपभोक्ता परिषद द्वारा उठाई गई सभी आपत्तियां व विधिक सवालों सहित भ्रष्टाचार पर यह कहकर बचने की कोशिश की जा रही है कि अभी उनके द्वारा कंसलटेंट ग्रांट थॉर्नटन को केवल पूरे मामले पर अध्ययन करने के लिए कहा गया है। इस पर उपभोक्ता परिषद ने सवाल दगा कि वह भाई क्या मजाक है मामला विद्युत नियामक पहुंच विद्युत नियामक आयोग ने बड़े पैमाने पर कमियां उजागर की और आज विद्युत नियामक आयोग को अवगत कराया जा रहा है कि अभी केवल अध्ययन किया जा रहा है। उपभोक्ता परिषद ने कहा जनहित में फिर अध्ययन रिपोर्ट को सार्वजनिक कर दिया जाए तो उपभोक्ता परिषद भी जनहित में बता देगा कि यह अध्ययन रिपोर्ट कैसी है। उपभोक्ता परिषद ने कहा पावर कॉरपोरेशन व बिजली कंपनियां यह भी बताएं कि विगत दिनों प्रदेश के तत्कालीन मुख्य सचिव सहित आधा दर्जन आईएएस अफसर जब विद्युत नियामक आयोग में पहुंच गए थे निजीकरण के मामले को लेकर तो वहां भी अध्ययन करने गए थे। बड़ा चौंकाने वाला मामला सामने आया है दक्षिणांचल व पूर्वाचल कंपनी ने गुपचुप तरीके से जो उपभोक्ता परिषद की निजीकरण संबंधी आपत्तियों का जवाब विद्युत नियामक आयोग को प्रस्तुत किया है उसमें पहली बार लिखित रूप मैं स्वीकार किया है कि राज्य सरकार ने दोनों बिजली कंपनियां में सुधारो के लिए सैद्धांतिक स्वीकृति दी है। ग्रांट थ्रोनटन भारत एलएलपी को खुली निविदा प्रक्रिया के माध्यम से सलाहकार चुना गया है और सलाहकार को वितरण क्षेत्र में संभावित संरचनात्मक सुधारो व निजी भागीदारी के संबंध में अध्ययन करने के लिए निर्देशित किया गया है। यह जवाब विद्युत नियामक आयोग में दो दिन पहले दाखिल किया गया है। यानि की पावर कॉरपोरेशन व बिजली कंपनियां अपने को फंसा देख उपभोक्ता परिषद की आपत्तियों का बिंदवार जवाब न देकर केवल यह सूचित कर दिया है कि केवल अभी अध्ययन कराया जा रहा है। अब सवाल यह उठता है कि जब अध्ययन कराया जा रहा है तो इतना हंगामा क्यों। एनर्जी टास्क फोर्स तक पूरा मामला पहुंच गया टेंडर निकालने की बात होने लगी और अभी अध्ययन हो रहा है यह उत्तर प्रदेश की जनता के साथ बड़ा धोखा है।

वाटिकाओं में पौधरोपण, हर पार्क में करेगें वृक्षारोपण

जनहित कल्याण समिति, विराज खंड – 5 गोमती नगर, लखनऊ द्वारा कॉलोनी के पार्कों में वृक्षारोपण का अभियान चलाया गया। कॉलोनी के हनुमान वाटिका, राम वाटिका एवं उत्सव वाटिका पार्कों में कॉलोनीवासियों द्वारा व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण एवं स्वच्छता का कार्य किया गया।समिति ने निर्णय लिया है कि शहर के हर पार्क में पर्याप्त जगह होने पर समिति 11-11 ऐसे पौधे रोपित करेगी जो ऑकसीजन और औषधियॉ गुणकारी होगे।समिति के अध्यक्ष एम पी सिंह, महामंत्री रंजीत सिंह, राजेश सक्सेना, श्रीप्रकाश गुप्ता (अध्यक्ष सेतु निगम डिप्लोमा इंजीनियर्स एसोसिएशन) तथा महिला प्रकोष्ठ से  कनक गुप्ता ने इस अभियान का नेतृत्व किया।इस अवसर पर आर एस एस के सह नगर संघ चालक  रुद्र नारायण द्वारा पर्यावरण, धर्म एवं सांस्कृति को सजोंकर रखने एवं एकता अखंडता को बनाए रखने पर कॉलोनी वासियों को संबोधित किया गया।

नगर निगम टीम ने 1.10 करोड़ की भूमि मुक्त कराई गई

नगर निगम लखनऊ व राजस्व प्रशासन की संयुक्त टीम ने गुरुवार को बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाकर सरकारी भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराया। यह कार्रवाई नगर आयुक्त  गौरव कुमार एवं अपर नगर आयुक्त  नम्रता सिंह के आदेशानुसार की गई।निर्देशों के क्रम में सहायक नगर आयुक्त एवं प्रभारी अधिकारी सम्पत्ति  रामेश्वर प्रसाद तथा तहसीलदार अरविन्द कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में यह अभियान संचालित हुआ।

ग्राम अलीनगर सुनहरा, तहसील सरोजनीनगर, जिला लखनऊ में स्थित खसरा संख्या 401/0.529 हेक्टयर ऊसर दर्ज भूमि में से लगभग 200 वर्गफुट और खसरा संख्या 554 संख्या/0.126 हेक्टयर ऊसर दर्ज भूमि में से 13,562 वर्गफुट भूमि पर कुछ व्यक्तियों ने अस्थाई रूप से कब्जा कर रखा था। प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर यह कब्जा हटवाया।अभियान को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए नायब तहसीलदार  रत्नेश कुमार के निर्देशन में लेखपाल  अनुपम कुमार,  अरविन्द कुमार गौतम,  विनय पाल तथा थाना कृष्णानगर के थानाध्यक्ष पर्याप्त पुलिस बल के साथ मौजूद रहे। टीम की सक्रियता और स्थानीय पुलिस की सतर्कता से संपूर्ण कार्रवाई बिना किसी विरोध के सफलतापूर्वक पूरी की गई।नगर निगम अधिकारियों ने बताया कि कब्जे से मुक्त कराई गई भूमि का कुल क्षेत्रफल 13,762 वर्गफुट है। इसका वर्तमान बाजार मूल्य लगभग 1 करोड़ 10 लाख रुपये आंका गया है। भूमि मुक्त कराए जाने के बाद अब इसका उपयोग जनहितकारी योजनाओं में किए जाने की संभावना बढ़ गई है। नगर आयुक्त  गौरव कुमार ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अपर नगर आयुक्त  नम्रता सिंह ने कहा कि चिन्हित सभी अवैध कब्जों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा।

अतिक्रमण विरोधी अभियान, भारी मात्रा में सामान जब्त

शहर में लगातार बढ़ते अवैध अतिक्रमण और यातायात अवरोधों को गंभीरता से लेते हुए नगर निगम लखनऊ ने गुरुवार को एक सघन और बहुस्तरीय अभियान चलाया। यह कार्रवाई माननीय महापौर  सुषमा खर्कवाल के निर्देश तथा नगर आयुक्त  गौरव कुमार के आदेश पर की गई। अभियान का मुख्य उद्देश्य प्रमुख सड़कों, सार्वजनिक स्थलों और फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त कर नागरिकों को सुगम और सुरक्षित यातायात उपलब्ध कराना था।

जोन-1 क्षेत्र में व्यापक अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया गया। कार्रवाई ग्लोब पार्क स्वास्थ्य भवन चौराहा से जिलाधिकारी कार्यालय चकबस्त कोठी होते हुए कैसरबाग बस अड्डे तक की गई, जहां सड़क और फुटपाथ से अस्थाई अतिक्रमण हटाया गया। इसी तरह स्वास्थ्य भवन चौराहे से मण्डलायुक्त कार्यालय होते हुए शहीद स्मारक रेजीडेंसी बाउंड्री से डालीगंज पुल तक भी अतिक्रमण हटाया गया, जिसमें 5 ट्रक सामान जब्त किया गया। साथ ही कालीदास मार्ग से 1090 चौराहा तक अस्थाई अतिक्रमण हटवाया गया।
जोनल अधिकारी जोन-6 मनोज यादव के नेतृत्व में वार्ड हैदरगंज प्रथम एवं अम्बरगंज क्षेत्र में अभियान चलाया गया। इस दौरान 30 ठेले, 8 गुमटी, 40 अस्थाई दुकानें हटाई गईं। इसके अलावा लकड़ी का तख्त, स्टील के काउंटर, लोहे के रैंगल, प्लैक्स बोर्ड, स्टूल, तराजू आदि सामान जब्त किया गया। अतिक्रमणकर्ताओं से घ्2100 जुर्माना वसूला गया तथा थानाध्यक्ष को पुनः अतिक्रमण न होने की चेतावनी हेतु पत्र प्रेषित किया गया।जोन-5 क्षेत्र में जोनल अधिकारी श्री नन्दकिशोर के नेतृत्व में आलमबाग चंदर नगर पुलिस चौकी से आलमबाग बस अड्डा, देवी पुलिया और आलमबाग थाने तक अतिक्रमण अभियान चलाया गया। इस दौरान 8 काउंटर, 8 गुमटी, 2 झोपड़ी पट्टी और 6 ठेले हटाए गए। वहीं 1 गुमटी, 2 काउंटर और 1 लोहे की बेंच जब्त की गई।नगर निगम जोन-2 में जोनल अधिकारी सुश्री शिल्पा कुमारी की अध्यक्षता में ऐशबाग और मालवीय नगर क्षेत्र में अभियान चलाया गया। बाजारखाला से बल्कि अड्डे तक अस्थाई अतिक्रमण, गंदगी और प्लास्टिक के विरुद्ध कार्रवाई की गई। इस दौरान 2 काउंटर, 3 टीन सेट और 4 स्टूल जब्त किए गए। गंदगी/अतिक्रमण करने वालों पर 9 चालान के माध्यम से 11,000 और प्लास्टिक के खिलाफ 3 चालान द्वारा 4,500 का जुर्माना वसूला गया। इस दौरान एसएचओ बाजारखाला  ब्रजेश सिंह अपनी पुलिस टीम के साथ मौजूद रहे।

Aaj National

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