-तत्काल ब्लैक लिस्ट करके दे उसकी विदाई: उपभोक्ता परिषद
- REPORT BY:AAJ NATIONAL NEWS || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK
लखनऊ। प्रदेश के 42 जनपदों के निजीकरण के लिए पावर कॉरपोरेशन द्वारा असंवैधानिक रूप से नियुक्त कंसल्टेंट ग्रांट थ्रोनटों जिसको 25 मार्च 2025 को ट्रांजैक्शन एडवाइजर नियुक्त किया गया था। उपभोक्ता परिषद के अनुसार वैसे टाइमलाइन के तहत 145 दिन के अंदर पूरी प्रक्रिया समाप्त होकर सफलतापूर्वक सिलेक्टेड बीदर को हैंडिंग ओवर हो जाना चाहिए था। आज लगभग 150 दिन पूरे हो गए यानि जो टाइमलाइन सेट की गई थी वह समाप्त हो गई। ऐसे में आप उत्तर प्रदेश सरकार को अपने फैसले को तत्काल निरस्त करते हुए सभी बिजली कंपनियों को सरकारी क्षेत्र में कार्य करने के लिए एक नई कार्य योजना के तहत आगे बढ़ना चाहिए।
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा असंवैधानिक रूप से नियुक्त कंसल्टेंट के लिए जो टाइमलाइन सेट की गई थी अब वह समाप्त हो गई है।यह सभी को पता है कि अभी तक कंसलटेंट जो अमेरिका रेगुलेटर द्वारा दोषी है वह अपने को दोष मुक्त ही नहीं कर पाया, आगे वह क्या काम करेगा। लगभग 9 महीने से पूरे ऊर्जा सेक्टर में निजीकरण को लेकर काफी आक्रोश और गुस्सा है लगातार विरोध जारी है। ऐसे में अब पावर कॉरपोरेशन व उत्तर प्रदेश सरकार दोनों को यह मान लेना चाहिए कि उसके द्वारा जो निर्णय किया गया था वह पूरी तरह गलत साबित हुआ। उसी का नतीजा है कि उसकी एक भी टाइमलाइन समय से पूरी नहीं हो पाई। अब ऐसे में कंसल्टेंट ग्रांट थ्रोनटा के खिलाफ कठोर कार्रवाई करते हुए उसे ब्लैक लिस्ट भी कर देना चाहिए।उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा पावर कारपोरेशन को मान लेना चाहिए कि उसके द्वारा देश के बड़े निजी संस्थानों को लाभ पहुंचाने के नियत से जो मसौदा तैयार कराया गया वह पूरी तरह उपभोक्ता विरोधी और जन विरोधी है। इसके लिए पूरी तरह पावर कॉरपोरेशन स्तर पर पारदर्शी नीट का उल्लंघन किया गया। आने वाले समय में जब भी कभी निजीकरण के इस पूरी प्रक्रिया की जांच होगी तो बड़े पैमाने पर अधिकारियों की गर्दन फसेंगी।
निजीकरण मिलीभगत पर पूर्व केन्द्रीय सचिव ने उठाये सवाल
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश ने कहा है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण हेतु तैयार किए गए दस्तावेज और ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 को व्यापक जनहित में सार्वजनिक किया जाना चाहिये। इस बीच वाजपेई सरकार में विद्युत सचिव रहे पूर्व आई ए एस अधिकारी ई ए एस शर्मा ने डिस्कॉम एसोशिएशन की निजी घरानों और मीटर आपूर्तिकर्ता कंपनियों से संलिप्तता तथा फंडिंग को लेकर सवाल उठा दिया है। अटल बिहारी वाजपेई सरकार में विद्युत सचिव रहे पूर्व आईएएस अधिकारी ई ए एस शर्मा ने ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन को एक ई मेल भेजकर इस बात पर आश्चर्य प्रकट किया है कि पूर्व विद्युत सचिव श्री आलोक कुमार ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के साथ कैसे संबंध हो गए जबकि उन्हें यह अच्छी तरह जानकारी है कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन निजीकरण और स्मार्ट मीटर आपूर्तिकर्ता कंपनियों की लाबीइंग (पैरवी) करेगा । पूर्व विद्युत सचिव ई ए एस शर्मा सेवानिवृत आई ए एस ने ई मेल में लिखा है कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की फंडिंग के विषय में भी इन्वेस्टिगेशन करना पड़ेगा।
संघर्ष समिति ने कहा है कि भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की योगी आदित्यनाथ की सरकार में उत्तर प्रदेश के 42 जनपदों के निजीकरण की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और कुछ निजी घरानों से मिलीभगत में निजीकरण का आर एफ पी डॉक्यूमेंट तैयार किया गया है। संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की है कि वह इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर प्रभावी कार्यवाही करने की कृपा करें। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण हेतु जब ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति की गई थी तब उस डॉक्यूमेंट में यह लिखा था कि ट्रांजैक्शन कंसलटेंट निजीकरण में उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन की मदद करेंगे और इस हेतु ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2020 को आधार माना जाएगा। संघर्ष समिति ने कहा की ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2020 पर ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन और कई अन्य संगठनों ने अपनी लिखित आपत्ति दर्ज की थी। भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय ने आज तक ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2020 को अंतिम स्वरूप नहीं दिया है। संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन ने उप्र विद्युत नियामक आयोग को निजीकरण हेतु जो आरएफपी डॉक्यूमेंट भेजा है उसमें निजीकरण का आधार ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 लिखा गया है। संघर्ष समिति ने कहा कि ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट नियुक्त करने के बाद आरएफपी डॉक्यूमेंट बनाने में ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2020 के स्थान पर 2025 का उल्लेख किया गया है। यह बहुत महत्वपूर्ण व्यतिक्रम है।ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 न तो पब्लिक डोमेन में है और न ही इसे भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय की वेबसाइट पर डाला गया है। इसे राज्य सरकारों और विद्युत वितरण निगमों को भी सर्कुलेट नहीं किया गया है और इस पर किसी की आपत्ति भी नहीं मांगी गई है।संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश के 42 जनपदों की लाखों करोड़ रुपए की विद्युत वितरण की परिसंपत्तियों को जिस ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 के आधार पर निजी घरानों को बेचने की तैयारी है उसे व्यापक जनहित में तत्काल सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
पद्मनाभ तीसरी बार अध्यक्ष, जेपी चौथी बार महामंत्री बने
रवीद्रालय प्रेक्षागृह में दो दिवसीय महाधिवेशन में उ.प्र. लोक निर्माण विभाग मिनिस्टीरियल एसोसिएशन के अध्यक्ष पद पर तीसरी बार पद्मनाभ
त्रिवेदी और महामंत्री पद पर चौथी बार जे.पी. पाण्डेय चुने गए। निर्वाचित पदाधिकारियों को चुनाव अधिकारी ने शपथ दिलाई।
41 वे प्रान्तीय द्विवार्षिक महाअधिवेशन व चुनाव में निर्विरोध निर्वाचित पदाधिकारीयों में प्रान्तीय अध्यक्ष पद्म नाभ त्रिवेदी ,प्रांतीय कार्यकारी अध्यक्ष गोपाल प्रसाद, प्रांतीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष हेमन्त गूजर, प्रांतीय महामंत्री जे.पी.पाण्डेय, प्रान्तीय उपाध्यक्ष पंकज गोयल,राजीव श्रीवास्तव, सूर्यकान्त सोनी ,प्रांतीय संगठन मंत्री प्रशांत शर्मा, गंगादीन कुशवाहा व गिरिराज सिंह, प्रांतीय संगठन मंत्री महिला ममता रानी,सुमन रावत,नीलम चौधरी ,प्रांतीय वित्त मंत्री संजीव गुप्ता तथा प्रांतीय संप्रेक्षक अभिषेक श्रीवास्तव है। मतदान वाले पदों पर आज सुबह 7 बजे तक मतगणना हुयी व रात भरी चली। मतगणना के उपरांत विभिन्न क्षेत्रीय पदाधिकारियो का निर्वाचन भी संपन्न हुआ। यह जानकारी चुनाव अधिकारी यूपी सिंह, अध्यक्ष मिनिस्टीरियल एसोसिएशन पंचायती राज एवं उपेन्द्र नाथ त्रिपाठी अध्यक्ष उत्तर प्रदेश फेडरेशन ऑफ मिनिस्टीरियल सर्विस ने दी। उन्होंने बताया कि इसके अतिरिक्त 18 मंडलों में क्षेत्रीय अध्यक्ष, क्षेत्रीय महामंत्री, क्षेत्रीय कार्यकारी अध्यक्ष, क्षेत्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष, क्षेत्रीय उपाध्यक्ष पदों पर भी निर्वाचन संपन्न हुआ। निर्वाचित प्रान्तीय अध्यक्ष पद्म नाभ त्रिवेदी और प्रांतीय महामंत्री जे.पी.पाण्डेय ने अधिवेशन के उद्घाटन पर अपना अमूल्य समय देने के लिए प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक का आभार भी जताया। उन्होंने पदाधिकारियों से कहाकि हमारी सात सूत्रीय मांगों पर शासन और सरकार गम्मीर है हमें शीघ्र ही उसका लाभ मिलेगा।
ई-खसरा पड़ताल से मुक्त रखने के लिए सीएम को ज्ञापन,निदेशालय पर 28 को प्रदेशव्यापी धरना प्रदर्शन
सोमवार को अपरान्ह अधीनस्थ कृषि सेवा संघ जनपद शाखा, लखनऊ के द्वारा, जिलाधिकारी लखनऊ के माध्यम से मुख्यमंत्र उ.प्र. सरकार
को ज्ञापन प्रेषित किया गया। जिसमें अधीनस्थ कृषि सेवा संघ उ.प्र. की तरफ से मांग की गयी है कि कृषि विभाग के कार्मिकों को भी राजस्व विभाग,लेखपाल की तर्ज पर ही ई-खसरा पड़ताल से मुक्त रखा जाय । सघ के निर्देश पर प्रदेश के प्रत्येक जनपद में जिलाधिकारी के माध्यम से सीएम को ज्ञापन भेजा गया है। संघ ने आदेश निरस्त न होने की दशा में 28 अगस्त को निदेशालय में प्रान्त व्यापी धरना प्रदर्शन का निर्णय लिया है।अधीनस्थ कृषि सेवा संघ जनपद शाखा, लखनऊ के जिलामंत्री विजय विक्रम सिंह द्वारा बताया गया कि खसरा पड़ताल जोकि मुख्य रूप से राजस्व विभाग का कार्य रहा है। परन्तु मुख्य सचिव , उ.प्र. शासन के पत्रांक- 48, 30 जूलाई 2025 के द्वारा आयुक्त एवं राजस्व परिषद उ.प्र. अनुभाग- 7 लखनऊ के पत्रांक आर.-126, 02 जुलाई .2025 के क्रम में राजस्व विभाग, लेखपाल को ई-खसरा पड़ताल से पूर्ण रूप से मुक्त रखते हुये उक्त कार्य को कृषि विभाग के कार्मिकों से कराये जाने की बात कही गयी है जो कि बिल्कुल भी न्यायसंगत नही है।अधीनस्थ कृषि सेवा संघ उ.प्र. के महामंत्री फईम अख्तर द्वारा अवगत कराया गया कि उक्त मांग से सम्बन्धित प्रदेश के समस्त जनपदों में आज जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री उ.प्र. सरकार को ज्ञापन प्रेषित किया गया है। अगर सरकार द्वारा समय रहते निर्णय नही लिया गया तो 28 अगस्त 2025 को अधीनस्थ कृषि सेवा संघ उ.प्र. के प्रांतीय नेतृत्व में कृषि भवन लखनऊ पर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन के साथ कृषि निदेशक, उ.प्र. के माध्यम से मुख्यमंत्री, उ.प्र. सरकार को सम्बोधित ज्ञापन प्रेषित किया जाना प्रस्तावित है।
काली पट्टी बांध बिजली अभियंताओं ने दर्ज कराया विरोध
बलिया में स्थानीय भाजपा नेता द्वारा अधीक्षण अभियंता लाल सिंह के साथ ऑफिस में जूते से हमला किए जाने को लेकर आज पूरे उत्तर प्रदेश के सभी बिजली कंपनियों में दलित व पिछड़े वर्ग के अभियंताओं ने काली पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज कराया। इस दौरान संगठन के पदाधिकारी ने शाम 7 बजे फील्ड हॉस्टल कार्यालय कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए इस बात पर गहरी नाराजगी जताई कि वर्तमान में पावर कारपोरेशन प्रबंधन दलित अभियंताओं को टारगेट करके उनके खिलाफ कार्यवाही पर आमादा है। उसका नतीजा है कि बहुत से अभियंता माननीय उच्च न्यायालय का निर्णय लेकर आने के बाद भी उनके साथ न्याय नहीं हो रहा है और बड़े पैमाने पर ऐसे भी अभियंता है जिनके लंबित मामलों को निस्तारित नहीं किया जा रहा है। पावर ऑफिसर एसोसिएशन के पदाधिकारी ने कहा भले ही स्थानीय भाजपा नेता की गिरफ्तारी हो गई है।आज भी उसके साथ ही खुले घूम रहे हैं।जो भी इस पूरी घटना में दोषी है सबके खिलाफ कार्रवाई होना चाहिए।
उत्तर प्रदेश पावर ऑफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष आरपी केन, कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा, संगठन सचिव बिंदा प्रसा, ने कहा जिस प्रकार से पूरे उत्तर प्रदेश में सभी बिजली कंपनियों में दलित व पिछला वर्ग के अभियंता वर्तमान परिवेश में काम कर रहे ह।ैं उनके लिए बहुत ही कठिन समय है। ज्यादातर अभियंताओं को ऐसे क्षेत्र में भेजा जाता है। उनका उत्पीड़न शुरू कर दिया जाता है। ऊपर से जो स्थानीय नेता है जैसे बलिया में कांड हुआ इस प्रकार की घटना कार्य करते है।आजादी के इतने वर्ष बाद भी यह सोचकर भी दलित व पिछड़े वर्ग के लोग भयभीत हैं। भले वह क्लास वन अफ़सर हो जाए या कितने भी ऊंचे पदों पर पहुंच जाए। उनके कार्यालय में कोई भी पहुंच कर अकारण उन्हें अपमानित करने पर आमादा हो जाता है, जिस पर राज्य सरकार को सोचना चाहिए।
कोरोना काल के सीज भत्ते रिलीज किए जाएः महासंघ
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी महासंघ उ.प्र ने राज्य सरकार से कोरोना काल में सीज किए भत्तों को तत्काल रिलीज करने की मांग की है। महासंघ के अध्यक्ष रामराज दुबे ने कहा कि कोरोना के खिलाफ जारी जंग के लिए वित्तीय संसाधन तलाशने में जुटी उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने नगर प्रतिकर भत्ता और सचिवालय भत्ता समेत राज्य कर्मचारियों के छह प्रकार के भत्तों को खत्म करने का फैसला किया था। राज्य सरकार ने यह फैसला कैबिनेट बाई सर्कुलेशन किया था। इन छह प्रकार के भत्तों को खत्म करने से सरकार को एक साल में तकरीबन 1500 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान लगाया गया था। अब जबकि प्रदेश की माली हालत ठीक है। वित्त मंत्री सदन में भी राजस्व बढ़ोत्तरी बता चुके है। ऐसे में उक्त सीज भत्तों को रिलीज कर इस महंगाई में कर्मचारियों को राहत दी जाए। कर्मचारी नेता ने कहा कि चतुर्थ श्रेणी भर्ती रोके रखने तथा उनकी अनदेखी से राज्य एवं केन्द्र कर्मचारियों भारी आक्रोश व्याप्त है। यदि समय रहते कर्मचारियों की मांगो पर विचार नहीं किया गया तो राज्य के कर्मचारियों के साथ बैठक करके गांधीवादी आन्दोलन की रूपरेखा तैयार की जायेगी जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी शासन,प्रशासन की होगी। राज्य में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी 65 प्रतिशत से अधिक सेवानिवृत्त हो गये हैं। यदि शेष रिक्त पदों समस्त राज्यों को भर्ती हेतु आदेशित किया जाय, जिससे स्थायी रोजगार युवाओं प्राप्त हो सके। नई पेंशन समाप्त कर पुरानी पेंशन समस्त राज्यों में बहाल की जाये। आउटसोर्सिंग व्यवस्था को समाप्त किया जाय। आशा कार्यकर्ती, आंगनबाड़ी कार्यकर्ती को मानदेय के रूप में 20,000 प्रतिमाह घोषित किया जाये और सभी कार्यकर्तीयों को स्थाई कर्मचारी घोषित किया जाये।
सचिव, वित्त के साथ पेंशनर्स संगठनों के प्रतिनिधियों की बैठक
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम अनुसार सचिव वित्त एवं पेंशन राशिकरण कटौती अवधि पुनर्निर्धारण समिति के अध्यक्ष मंजर अब्बास रिजवी की अध्यक्षता में नवीन भवन सचिवालय स्थित पारिजात सभागार में पेंशन राशिकरण की कटौती अवधि को 15 वर्ष से घटाकर कम किए जाने के बिंदु पर पेंशनर्स संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक संपन्न हुई।बैठक के पश्चात संयुक्त पेंशनर्स कल्याण समिति उत्तर प्रदेश के संयोजक एन पी त्रिपाठी व सह संयोजक प्रचार ओंकार नाथ तिवारी ने बताया की बैठक में उपस्थित विभिन्न पेंशनर संगठनों के प्रतिनिधियों ने माननीय न्यायालय के द्वारा दिए गए स्थगनादेश के अनुरूप पेंशन राशिकरण की कटौती अवधि को अधिकतम 11 वर्ष किए जाने की मांग करते हुए अपने तर्क प्रस्तुत किये। समिति के अध्यक्ष मंजर अब्बास रिजवी द्वारा राशिकरण धनराशि की संपूर्ण कटौती तथा रिस्क फैक्टर पर प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत चर्चा की गई। पेंशनरों की ओर से डॉ. ओमप्रकाश श्रीवास्तव एवं शांति स्वरूप द्वारा साक्ष्यों सहित तर्क प्रस्तुत किए गए। बैठक में संयुक्त पेंशनर्स कल्याण समिति के संयोजक एन पी त्रिपाठी, क्षमा नाथ दुबे, श्याम सुंदर अग्निहोत्री, विश्वनाथ दीक्षित, इं. दिवाकर राय, राधेश्याम ओझा, महेंद्र त्रिपाठी, बीके तिवारी, अख्तर अली फारुकी, आनंद प्रकाश श्रीवास्तव, ओंकार नाथ तिवारी, संतोष कुमार मेहरोत्रा, अमरनाथ यादव ओमप्रकाश त्रिपाठी तथा शासन की ओर से समिति के अध्यक्ष मंजर अब्बास रिजवी के अतिरिक्त सदस्य वित्त आयोग नील रतन कुमार, विशेष सचिव वी के सिंह सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे।
